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मजलिसों में करबला में प्रवेश का फलसफा बयां किया
Updated Fri, 14 Sep 2018 12:30 AM IST
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मजलिसों में करबला में प्रवेश का फलसफा बयां किया
सहारनपुर। मोहर्रम की दूसरी तारीख पर विभिन्न इमाम बारगाहों में मजलिसों का आयोजन किया गया। इसमें मुस्लिम धार्मिक विद्वानों ने वारिदे करबला, करबला में प्रवेश और तौहीद का फलसफा बयां किया।
मरसिए खानी खुवाजा हसन मोहम्मद, डा. अमीर अब्बास, खुवाजा रईस अब्बास, आसिफ अल्वी, इफ्तेखार हैदर, एसएमहुसैन जैदी, अथर अली जैदी ने की। पहली मजलिस इमाम बारगाह सामानियान मोहल्ला कायस्थान में हुई। मुरादाबाद से मोलाना फतेह मोहम्मद साहब ने खिताब फरमाया। दूसरी मजलिस मोहल्ला अंसारियान स्थित फरहत मेहंदी काजमी के आवास पर हुई। आजमगढ़ से डा. आजमी ने खिताब किया। तीसरी मजलिस बड़ी इमाम बारगाह जाफर नवाज में हुई। ईरान से आए मोलाना किफायत हुसैन साहब ने फलसफा बयां किया। चौथी मजलिस छोटी इमाम बारगाह में हुई। लखनऊ से आए मोलाना महमूद अब्बास बाकरी साहब ने खिताब फरमाया। विद्वानों ने बताया कि जब इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का काफिला करबला के रास्ते में ही था, तब यजीद के गवर्नर इबने जियाद ने अपने सिपहसालार हुर्र को हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और काफिले को बंदी बना कर करबला लाने को भेजा था। हुर्र का लश्कर इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम को तलाशता हुआ काफिले तक पहुंचा तो हुर्र प्यास से बेहाल हो चुका था। हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने हुर्र की हालत देखते हुए अपने साथियों से कहा कि तुम हुर्र को पानी से सैराब करो। तब हुर्र को पानी पिलाया गया, जो हुर्र के साथ घोड़े थे, उन्हें भी पानी से सैराब किया गया। हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने अपने लश्कर का सारा पानी हुर्र के लश्कर को पिला दिया। पानी पीने के बाद हुर्र ने हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम अैर उनके लश्कर को बंदी बनाकर मैदान करबला ले आया था। उसके बाद जब यजीद ने हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के लश्कर का पानी बंद कर दिया और बच्चे प्यास से तड़पने लगे तब हुर्र को शर्मिंदा होना पड़ा। हुर्र अपनी खता मानते हुए हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के पास अपने भाई, बेटे के साथ आया और उनसे माफी मांगी। तब इमाम हुसैन ने हुर्र को माफ कर दिया। उसके बाद हुर्र ने हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की तरफ से यजीद के खिलाफ जंग लड़ी और करबला में सब से पहले शहीद हुआ।
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सहारनपुर। मोहर्रम की दूसरी तारीख पर विभिन्न इमाम बारगाहों में मजलिसों का आयोजन किया गया। इसमें मुस्लिम धार्मिक विद्वानों ने वारिदे करबला, करबला में प्रवेश और तौहीद का फलसफा बयां किया।
मरसिए खानी खुवाजा हसन मोहम्मद, डा. अमीर अब्बास, खुवाजा रईस अब्बास, आसिफ अल्वी, इफ्तेखार हैदर, एसएमहुसैन जैदी, अथर अली जैदी ने की। पहली मजलिस इमाम बारगाह सामानियान मोहल्ला कायस्थान में हुई। मुरादाबाद से मोलाना फतेह मोहम्मद साहब ने खिताब फरमाया। दूसरी मजलिस मोहल्ला अंसारियान स्थित फरहत मेहंदी काजमी के आवास पर हुई। आजमगढ़ से डा. आजमी ने खिताब किया। तीसरी मजलिस बड़ी इमाम बारगाह जाफर नवाज में हुई। ईरान से आए मोलाना किफायत हुसैन साहब ने फलसफा बयां किया। चौथी मजलिस छोटी इमाम बारगाह में हुई। लखनऊ से आए मोलाना महमूद अब्बास बाकरी साहब ने खिताब फरमाया। विद्वानों ने बताया कि जब इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का काफिला करबला के रास्ते में ही था, तब यजीद के गवर्नर इबने जियाद ने अपने सिपहसालार हुर्र को हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और काफिले को बंदी बना कर करबला लाने को भेजा था। हुर्र का लश्कर इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम को तलाशता हुआ काफिले तक पहुंचा तो हुर्र प्यास से बेहाल हो चुका था। हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने हुर्र की हालत देखते हुए अपने साथियों से कहा कि तुम हुर्र को पानी से सैराब करो। तब हुर्र को पानी पिलाया गया, जो हुर्र के साथ घोड़े थे, उन्हें भी पानी से सैराब किया गया। हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने अपने लश्कर का सारा पानी हुर्र के लश्कर को पिला दिया। पानी पीने के बाद हुर्र ने हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम अैर उनके लश्कर को बंदी बनाकर मैदान करबला ले आया था। उसके बाद जब यजीद ने हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के लश्कर का पानी बंद कर दिया और बच्चे प्यास से तड़पने लगे तब हुर्र को शर्मिंदा होना पड़ा। हुर्र अपनी खता मानते हुए हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के पास अपने भाई, बेटे के साथ आया और उनसे माफी मांगी। तब इमाम हुसैन ने हुर्र को माफ कर दिया। उसके बाद हुर्र ने हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की तरफ से यजीद के खिलाफ जंग लड़ी और करबला में सब से पहले शहीद हुआ।
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