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व्यापारियों ने किया आयकर विभाग में हंगामा
Updated Wed, 27 Sep 2017 02:03 AM IST
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सहारनपुर। आयकर विभाग की टीम द्वारा की जा रही छापामारी के विरोध में उद्यमियों एवं व्यापारियों ने आयकर भवन पर पहुंचकर हंगामा किया। उद्यमियों एवं व्यापारियों ने आयकर विभाग के अधिकारियों की कार्य प्रणाली पर रोष जताया तथा आतंकित करने का आरोप लगाया।
संयुक्त उद्यमी एवं व्यापारी संघर्ष समिति के पदाधिकारी मंगलवार को एकत्रित होकर सुबह ही आयकर विभाग के कार्यालय पहुंचे और आयकर विभाग की कार्यप्रणाली पर रोष जताया। व्यापारियों ने कहा कि एक ओर तो सरकार द्वारा व्यापारिक एवं औद्योगिक विकास के वातावरण को इंस्पेक्टर राज से मुक्ति दिलाने के लिए विभिन्न मंचों पर नीतिगत मामलों में शामिल किया जाता है जिससे व्यापारी एवं औद्योगिक विकास में वृद्धि हो सके तथा राजस्व बढ़ सके। दूसरी ओर कुछ अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा स्वलोलुपता एवं निजी स्वार्थवश सर्वे का डर दिखाकर व्यापारियों और उद्यमियों को आतंकित करने का प्रयास किया जा रहा है। सर्वे में जीडीपी निम्न स्तर पर आ गई है। नवंबर में नोटबंदी और फिर जीएसटी के कारण व्यापार घट चुका है। जीएसटी से सरकार को पहले ही चरण में इतना राजस्व प्राप्त हो गया है जिसका सरकार को भी अनुमान नहीं था। व्यापारियों ने जीएसटी को स्वीकार भी कर लिया। व्यापारियों एवं उद्यमियों को आशा थी कि अब सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाई को बंद कर देगी। लेकिन व्यापारी एवं उद्यमी हितों का ध्यान में न रखकर उत्पीड़नात्मक रवैया सर्वे के नाम पर कर रही है। जिसका सभी उद्यमी एवं व्यापारिक संगठन विरोध करते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि आयकर विभाग द्वारा उद्यमियों एवं व्यापारियों को बेवजह परेशान किया गया तो संगठन टकराव के लिए मजबूर हो जाएगा। इस मामले में संगठन ने संयुक्त आयकर आयुक्त आर्केंद्र सिंह को ज्ञापन सौंपा। संगठन के शिष्टमंडल ने आरोप लगाया कि अधिकारियों का रवैया सहयोगात्मक एवं सकारात्मक नहीं रहा। जिसके चलते शिष्टमंडल की बातचीत नहीं हो सकी। ज्ञापन देने वालों में शीतल टंडन, कृष्ण राजीव सिंघल, रामजी सुनेजा, एसके सूरी, विवेक मनोचा, सुरेंद्र मोहन सिंह चावला, कृष्णलाल ठक्कर, अनूप खन्ना, कुलदीप धमीजा, दानिश आजम, मुकुंद मनोहर गोयल, अजय शर्मा, हरजीत सिंह, प्रमोद सडाना शामिल रहे।
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संयुक्त उद्यमी एवं व्यापारी संघर्ष समिति के पदाधिकारी मंगलवार को एकत्रित होकर सुबह ही आयकर विभाग के कार्यालय पहुंचे और आयकर विभाग की कार्यप्रणाली पर रोष जताया। व्यापारियों ने कहा कि एक ओर तो सरकार द्वारा व्यापारिक एवं औद्योगिक विकास के वातावरण को इंस्पेक्टर राज से मुक्ति दिलाने के लिए विभिन्न मंचों पर नीतिगत मामलों में शामिल किया जाता है जिससे व्यापारी एवं औद्योगिक विकास में वृद्धि हो सके तथा राजस्व बढ़ सके। दूसरी ओर कुछ अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा स्वलोलुपता एवं निजी स्वार्थवश सर्वे का डर दिखाकर व्यापारियों और उद्यमियों को आतंकित करने का प्रयास किया जा रहा है। सर्वे में जीडीपी निम्न स्तर पर आ गई है। नवंबर में नोटबंदी और फिर जीएसटी के कारण व्यापार घट चुका है। जीएसटी से सरकार को पहले ही चरण में इतना राजस्व प्राप्त हो गया है जिसका सरकार को भी अनुमान नहीं था। व्यापारियों ने जीएसटी को स्वीकार भी कर लिया। व्यापारियों एवं उद्यमियों को आशा थी कि अब सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाई को बंद कर देगी। लेकिन व्यापारी एवं उद्यमी हितों का ध्यान में न रखकर उत्पीड़नात्मक रवैया सर्वे के नाम पर कर रही है। जिसका सभी उद्यमी एवं व्यापारिक संगठन विरोध करते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि आयकर विभाग द्वारा उद्यमियों एवं व्यापारियों को बेवजह परेशान किया गया तो संगठन टकराव के लिए मजबूर हो जाएगा। इस मामले में संगठन ने संयुक्त आयकर आयुक्त आर्केंद्र सिंह को ज्ञापन सौंपा। संगठन के शिष्टमंडल ने आरोप लगाया कि अधिकारियों का रवैया सहयोगात्मक एवं सकारात्मक नहीं रहा। जिसके चलते शिष्टमंडल की बातचीत नहीं हो सकी। ज्ञापन देने वालों में शीतल टंडन, कृष्ण राजीव सिंघल, रामजी सुनेजा, एसके सूरी, विवेक मनोचा, सुरेंद्र मोहन सिंह चावला, कृष्णलाल ठक्कर, अनूप खन्ना, कुलदीप धमीजा, दानिश आजम, मुकुंद मनोहर गोयल, अजय शर्मा, हरजीत सिंह, प्रमोद सडाना शामिल रहे।
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