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शायर शकील बरेलवी के सम्मान में मुशायरा आयोजित
Updated Fri, 03 Nov 2017 12:26 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। मेहमान शायर शकील बरेलवी के सम्मान में मुशायरा आयोजित किया गया। जिसमें शायरों ने अपने पसंदीदा शेर प्रस्तुत कर श्रोताओं की भरपूर मनोरंजन किया।
बुधवार की रात्रि मोहल्ला पठानपुरा में कार्यक्रम का उद्घाटन अमन वेलफेयर सोसाइटी के संस्थापक जर्रार बेग और शमा रोशन वकत खान ने किया। शकील बरेलवी ने पढ़ा हवा ये बेसबब जो चल रही है, चिरागों से हमारे जल रही है। जावेद आसी ने कहा झूठ को उसने जो मंजर के हवाले कर दिया, हमने अपना सच भी खंजर के हवाले कर दिया। गुलजार जिगर ने पढ़ा है फूल भी हमारे खुशबू भी हमारी है, हिंदी भी हमारी है उर्दू भी हमारी है। कलम बिजनौरी ने कहा सिर्फ मुफलिस नहीं धनवान भी आ जाते हैं, वक्त की जद में ये सुलतान भी आ जाते हैं। डा. सलमान दिलकश ने पढ़ा एक दिलकश से तरन्नुम का हुआ था एहसास, कल कुछ इस तरह पुकारा मेरी मां ने मेरा नाम। फहीम असर राज्जुपुरी ने कहा ये कह के बात काट दी बेटे ने बाप की, मैं अब जवान हो गया बच्चा नहीं रहा। नईम अख्तर ने पढ़ा तेरे दीदार की हसरत में चले आते हैं, हम भी पागल हैं मुहब्बत में चले आते हैं। नदीम अनवर ने कहा ये नहीं कि इस जहां में कोई फिर मिला नहीं है, तेरे बाद सच तो ये है कहीं दिल लगा नहीं है। रात्रि करीब दो बजे तक चले मुशायरे में शायरों ने अपने कलाम से श्रोताओं की जमकर वाहवाही बटोरी। अध्यक्षता फैजान कुरैशी और संचालन गुलजार जिगर ने किया। इस मौके पर गुफरान अंसारी, शहनवाज अंसारी, सलीम ख्वाजा, कलीम खां, अहसान कुरैशी, अब्दुस्सलाम अंसारी आदि रहे।
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बुधवार की रात्रि मोहल्ला पठानपुरा में कार्यक्रम का उद्घाटन अमन वेलफेयर सोसाइटी के संस्थापक जर्रार बेग और शमा रोशन वकत खान ने किया। शकील बरेलवी ने पढ़ा हवा ये बेसबब जो चल रही है, चिरागों से हमारे जल रही है। जावेद आसी ने कहा झूठ को उसने जो मंजर के हवाले कर दिया, हमने अपना सच भी खंजर के हवाले कर दिया। गुलजार जिगर ने पढ़ा है फूल भी हमारे खुशबू भी हमारी है, हिंदी भी हमारी है उर्दू भी हमारी है। कलम बिजनौरी ने कहा सिर्फ मुफलिस नहीं धनवान भी आ जाते हैं, वक्त की जद में ये सुलतान भी आ जाते हैं। डा. सलमान दिलकश ने पढ़ा एक दिलकश से तरन्नुम का हुआ था एहसास, कल कुछ इस तरह पुकारा मेरी मां ने मेरा नाम। फहीम असर राज्जुपुरी ने कहा ये कह के बात काट दी बेटे ने बाप की, मैं अब जवान हो गया बच्चा नहीं रहा। नईम अख्तर ने पढ़ा तेरे दीदार की हसरत में चले आते हैं, हम भी पागल हैं मुहब्बत में चले आते हैं। नदीम अनवर ने कहा ये नहीं कि इस जहां में कोई फिर मिला नहीं है, तेरे बाद सच तो ये है कहीं दिल लगा नहीं है। रात्रि करीब दो बजे तक चले मुशायरे में शायरों ने अपने कलाम से श्रोताओं की जमकर वाहवाही बटोरी। अध्यक्षता फैजान कुरैशी और संचालन गुलजार जिगर ने किया। इस मौके पर गुफरान अंसारी, शहनवाज अंसारी, सलीम ख्वाजा, कलीम खां, अहसान कुरैशी, अब्दुस्सलाम अंसारी आदि रहे।
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