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गन्ना क्रय केंद्रों के कांटों में मिलीं खामियां
Updated Thu, 12 Apr 2018 11:45 PM IST
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गन्ना क्रय केंद्रों के कांटों में मिलीं खामियां
सहारनपुर। जिला गन्ना अधिकारी डॉ. आरडी द्विवेदी ने बृहस्पतिवार को सरसावा शुगर मिल के क्रय केंद्रों का निरीक्षण किया। इसमें कहीं घटतौली तो कहीं फर्जी पर्चियां बनती मिलीं। एक क्रय केंद्र पर ईंटों से गन्ना तुलता मिला। क्रय केंद्रों पर कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी गई है।
जिला गन्ना अधिकारी सबसे पहले गन्ना क्रय केंद्र सांपला पहुंचे। यहां तैनात तौल लिपिक के उपस्थित न रहने के बावजूद केंद्र पर तैनात चौकीदार नकलीराम द्वारा गन्ना तौल कार्य किया जा रहा था। निरीक्षण के समय किसानों ने बताया कि बिना समिति आपूर्ति पर्ची के बिना ही गन्ना तौल कराया जा रहा है। इसके बाद वह सौराना केंद्र का निरीक्षण करने पहुंचे। यहां लिपिक के अलावा क्रय केंद्र हरनाखेड़ी पर तैनात तौल लिपिक द्वारा काम किया जा रहा था। यहां कांटे की रॉड पर ईंटें रखी थीं। हैरानी की बात यह रही कि कांटे पर कोई वजन न होने के बावजूद कांटे का मानिटर 26.10 क्विंटल वजन दर्शा रहा था। केंद्र पर कांटे की जांच के लिए मानक बांट भी नहीं मिला।
पिलखनी क्रय केंद्र की जांच में कांटा सही वजन देते हुए मिला, मगर जांच में पाया गया कि कांटे की क्षमता पांच टन होने के बावजूद उसे स्थाई रूप से 26 कुंतल के वजन पर फिक्स कर दिया गया है। यानी गन्ने की गाड़ी के साथ मानक बांट रखकर वजन नहीं किया जा रहा है। डीसीओ ने गड़बड़ियों की रिपोर्ट गन्ना निरीक्षक और सहायक चीनी आयुक्त को भेजी है।
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सहारनपुर। जिला गन्ना अधिकारी डॉ. आरडी द्विवेदी ने बृहस्पतिवार को सरसावा शुगर मिल के क्रय केंद्रों का निरीक्षण किया। इसमें कहीं घटतौली तो कहीं फर्जी पर्चियां बनती मिलीं। एक क्रय केंद्र पर ईंटों से गन्ना तुलता मिला। क्रय केंद्रों पर कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी गई है।
जिला गन्ना अधिकारी सबसे पहले गन्ना क्रय केंद्र सांपला पहुंचे। यहां तैनात तौल लिपिक के उपस्थित न रहने के बावजूद केंद्र पर तैनात चौकीदार नकलीराम द्वारा गन्ना तौल कार्य किया जा रहा था। निरीक्षण के समय किसानों ने बताया कि बिना समिति आपूर्ति पर्ची के बिना ही गन्ना तौल कराया जा रहा है। इसके बाद वह सौराना केंद्र का निरीक्षण करने पहुंचे। यहां लिपिक के अलावा क्रय केंद्र हरनाखेड़ी पर तैनात तौल लिपिक द्वारा काम किया जा रहा था। यहां कांटे की रॉड पर ईंटें रखी थीं। हैरानी की बात यह रही कि कांटे पर कोई वजन न होने के बावजूद कांटे का मानिटर 26.10 क्विंटल वजन दर्शा रहा था। केंद्र पर कांटे की जांच के लिए मानक बांट भी नहीं मिला।
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पिलखनी क्रय केंद्र की जांच में कांटा सही वजन देते हुए मिला, मगर जांच में पाया गया कि कांटे की क्षमता पांच टन होने के बावजूद उसे स्थाई रूप से 26 कुंतल के वजन पर फिक्स कर दिया गया है। यानी गन्ने की गाड़ी के साथ मानक बांट रखकर वजन नहीं किया जा रहा है। डीसीओ ने गड़बड़ियों की रिपोर्ट गन्ना निरीक्षक और सहायक चीनी आयुक्त को भेजी है।
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