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जिले के छह ब्लॉक प्रमुखों में चार ब्लॉकों में महिलाओं का कब्जा
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रामपुर। जिले के छह ब्लॉक प्रमुखों में चार ब्लॉकों में महिलाओं का कब्जा हो गया है। सिर्फ सैदनगर और बिलासपुर से ही पुरुष ब्लॉक प्रमुख चुने गए हैं। इसमें भी सैदनगर के ब्लॉक प्रमुख का कोई राजनैतिक इतिहास नहीं है। वह पहली बार बीडीसी का चुनाव लड़े और जीत गए। ब्लॉक प्रमुख के लिए दावेदारी की तो वहां भी उनका निर्विरोध चुनाव हो गया।
जिले में क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष (ब्लॉक प्रमुख) के छह पद हैं। इनमें से चमरौआ अन्य पिछड़ा वर्ग की महिला के लिए आरक्षित थी, जबकि शाहबाद की अनुसूचित जाति की महिला के आरक्षित थी। स्वार, सैदनगर, बिलासपुर एवं मिलक अनारक्षित थीं। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष का जब चुनाव कार्यक्रम जारी किया गया तो सभी ने अपनी-अपनी सियासी बिसात बिछानी शुरू कर दी। स्वार से जहां दो महिलाओं एवं दो पुरुषों ने अपना नामांकन कराया था तो शाहबाद में सिर्फ तीन महिलाएं ही चुनाव मैदान में उतरीं। दोनों ही ब्लॉकों में प्रमुख की कुर्सी पर महिलाएं काबिज हो गईं और दोनों के ही पति पूर्व विधायक हैं। इनमें शाहबाद से दो बार विधायक रहे काशीराम दिवाकर की पत्नी मुन्नी देवी तो स्वार में चमरौआ से पूर्व विधायक अली युसूफ अली की पत्नी शाहीन युसूफ ब्लॉक प्रमुख बनी हैं। चमरौआ सीट पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित होने की वजह से शाहबाद के पूर्व ब्लॉक प्रमुख जगपाल यादव ने इस बार चमरौआ ब्लॉक से अपनी पत्नी हरिबाला की दावेदारी पेश की और वो निर्विरोध चुन ली गईं जबकि मिलक से पूर्व ब्लॉक प्रमुख अर्चना गंगवार ही चुनाव मैदान में थीं, लिहाजा वो भी निर्विरोध चुनी गईं। सैदनगर से ब्लॉक प्रमुख चुने गए मोहित सैनी की कोई राजनैतिक पृष्ठभूमि नहीं रही है। एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले मोहित ने पहली बार बीडीसी का चुनाव लड़ा और जीत गए। छह भाइयों में दूसरे नंबर के मोहित ने ब्लॉक प्रमुख के लिए दावेदारी की तो वहां भी निर्विरोध चुन लिए गए।
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जिले में क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष (ब्लॉक प्रमुख) के छह पद हैं। इनमें से चमरौआ अन्य पिछड़ा वर्ग की महिला के लिए आरक्षित थी, जबकि शाहबाद की अनुसूचित जाति की महिला के आरक्षित थी। स्वार, सैदनगर, बिलासपुर एवं मिलक अनारक्षित थीं। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष का जब चुनाव कार्यक्रम जारी किया गया तो सभी ने अपनी-अपनी सियासी बिसात बिछानी शुरू कर दी। स्वार से जहां दो महिलाओं एवं दो पुरुषों ने अपना नामांकन कराया था तो शाहबाद में सिर्फ तीन महिलाएं ही चुनाव मैदान में उतरीं। दोनों ही ब्लॉकों में प्रमुख की कुर्सी पर महिलाएं काबिज हो गईं और दोनों के ही पति पूर्व विधायक हैं। इनमें शाहबाद से दो बार विधायक रहे काशीराम दिवाकर की पत्नी मुन्नी देवी तो स्वार में चमरौआ से पूर्व विधायक अली युसूफ अली की पत्नी शाहीन युसूफ ब्लॉक प्रमुख बनी हैं। चमरौआ सीट पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित होने की वजह से शाहबाद के पूर्व ब्लॉक प्रमुख जगपाल यादव ने इस बार चमरौआ ब्लॉक से अपनी पत्नी हरिबाला की दावेदारी पेश की और वो निर्विरोध चुन ली गईं जबकि मिलक से पूर्व ब्लॉक प्रमुख अर्चना गंगवार ही चुनाव मैदान में थीं, लिहाजा वो भी निर्विरोध चुनी गईं। सैदनगर से ब्लॉक प्रमुख चुने गए मोहित सैनी की कोई राजनैतिक पृष्ठभूमि नहीं रही है। एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले मोहित ने पहली बार बीडीसी का चुनाव लड़ा और जीत गए। छह भाइयों में दूसरे नंबर के मोहित ने ब्लॉक प्रमुख के लिए दावेदारी की तो वहां भी निर्विरोध चुन लिए गए।
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