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मामूली बात को लेकर छात्र ने लगाई फांसी

अमर उजाला ब्यूरो/ रामपुर Updated Sun, 09 Sep 2018 12:46 AM IST
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रामपुर। मामूली बात को लेकर दसवीं के छात्र ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया है।  मामूली बात पर दसवीं के छात्र द्वारा आत्महत्या कर लेने का यह मामला सिविल लाइंस थाना क्षेत्र की विष्णु विहार कालोनी स्थित बैंक कालोनी का है। बैंक कालोनी निवासी सीआरपीएफ में तैनात ध्यान सिंह यादव की तैनाती इस समय जम्मू-कश्मीर में है। शनिवार की दोपहर में ध्यान सिंह के 13 साल का बेटे आकाश यादव ने घर के एक कमरे में फंदे पर झूल गया।
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आकाश दयावती मोदी अकादमी में दसवीं का छात्र था। शनिवार को वह स्कूल नहीं गया था। शनिवार की सुबह उसकी मां काम में व्यस्त थी। इस बीच उसने कमरे को अंदर से बंदकर फंदे पर लटक गया। काफी देर तक कमरे से जब बाहर नहीं निकला तो परिवार के लोगों ने खिड़की से झांककर देखा तो परिवार के लोग हक्के-बक्के रह गए। उन्होंने आननफानन में लोगों ने कमरे का दरवाजा तुड़वा दिया। परिवार के लोगों का शोरशराबा सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए और फिर पंखे में लटके आकाश को उतारकर जिला अस्पताल ले गए,जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। परिवार के लोगों का रोकर बुरा हाल है। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। आत्महत्या के पीछे मामूली बात बताई जा रही है। सूत्रों की माने तो दोस्तों के साथ घूमने को लेकर उसे डांट पड़ी थी। घटना की जानकारी आकाश के पिता को दे दी गई है, वह श्रीनगर से रवाना हो चुके हैं। परिजन और मोहल्ले के लोग इस घटना को लेकर कुछ भी कहने से इंकार कर रहे हैं।  

घर का इकलौता बेटा था आकाश 
रामपुर। आकाश घर का इकलौता बेटा था। उसकी मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया है। सीआरपीएफ में तैनात ध्यान सिंह के एक बेटा व दो बेटियां हैं। आकाश इकलौता होने की वजह से सबका लाड़ला था।  


किशोरों में बढ़ता अवसाद बन रहा है आत्महत्या की वजह
रामपुर। किशोरों में बढ़ती आत्महत्या की घटनाओं से मनोचिकित्सक भी चिंतित हैं। उनका मानना है कि टीवी और इंटरनेट के जिंदगी में बढ़ते दखल की वजह से किशोरों में अवसाद बढ़ रहा है। शनिवार को डीएमए के दसवीं के छात्र आकाश यादव ने मामूली सी बात पर अपनी जान दे दी।        इससे पहले भी कई किशोर आत्मघाती कदम उठा चुके  हैं। आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं को लेकर मनोवैज्ञानिक चिंतित हैं।       


यह हैं आत्महत्या की प्रमुख वजह
-टूूूूटते संयुक्त परिवार       
- माता-पिता का कामकाजी होना,        
-बच्चों की छोटी-मोटी समस्याओं पर ध्यान नहीं देना        
- टीवी व इंटरनेट की किशोरों की दखलंदाजी       
-किशोरों में मानसिक अवसाद का बढ़ना        
मनोवैज्ञानिकों ने सुझाए बचाव के तरीके
-जीवनशैली में बदलाव        
-माता-पिता बच्चों की गतिविधियों पर निगाह रखें और उनकी समस्याएं सुनें और सुलझाने की कोशिश करें।श्रेष्ठा के मामले में भी यही हुआ है. वह कहते हैं कि ऐसी घटनाओं के लिए जैविक के अलावा सामाजिक और मनोवैज्ञानिक वजहें भी जिम्मेदार हैं।      
-बच्चों को टीवी व इंटरनेट से दूर रखें      
-बच्चों के बदलते व्यवहार  पर नजर रखें      
-बच्चों की काउंसलिंग कराएं      

-ज्यादातर एकल परिवारों में माता-पिता दोनों के कामकाजी होने की वजह से उनके पास बच्चों की समस्याओं पर ध्यान देने की फुर्सत नहीं होती, इससे लगातार कुंठा के चलते बच्चा मानसिक अवसाद की हालत में पहुंच जाता है। माता-पिता को समय निकाल कर बच्चे की आदतों में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों पर बारीक निगाह रखनी चाहिए।       
डा.कुलदीप सिंह चौहान , मनोचिकित्सक      

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