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बड़ागांव में रही दिवाली मेले की धूम
Updated Sat, 21 Oct 2017 09:26 PM IST
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कुमारसैन (रामपुर बुशहर)।
दिवाली पर्व बड़ागांव में धूमधाम से मनाया। आराध्य देवता ब्रह्मेशवर महादेव के मंदिर में शनिवार सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। इसके चलते दिवाली मेला भी मनाया। देवता ब्रह्मेशवर महादेव के भंडारी जोनी ने कहा कि देवता ब्रह्मेशवर महादेव की विशेष कचहरी सजी, जिसमें देवता के गुरों ने दैविक शक्तियों से लोगों की समस्याओं का समाधान किया और उन्हें आशीर्वाद दिया।
ब्राह्मण समुदाय की महिलाओं की ओर से देवता ब्रह्मेशवर महादेव के सामने पारंपरिक गीत गाए गए। इस पारंपरिक दिवाली मेले में लोग अपने घरों से पक्के हुए चावल मंदिर लाते हैं। यहां पर सभी को इकट्ठा किया जाता है। दिवाली मेले में सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद रहे। तीन दिवसीय पारंपरिक दिवाली मेले में शुक्रवार रात्रि को क्षेत्र के लोग देवता ब्रह्मेशवर महादेव के मंदिर पहुंचे। यहां पर उन्होंने मशालें जलाकर आराध्य देवता ब्रह्मेशवर महादेव का भव्य स्वागत किया। दिवाली की रात को देवता ब्रह्मेशवर महादेव के मंदिर में भजन संकीर्तन का आयोजन भी हुआ। स्थानीय लोग एक रस्सा बनाकर खूब खेले। देवता के गुर पुरुषोत्तम ने कहा कि यह मेला क्षेत्र की सुख समृद्धि आपसी भाईचारे और लोगों में देव आस्था को बनाए रखता है। इसे आज भी पारंपरिक ढंग से मनाया जाता है।
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दिवाली पर्व बड़ागांव में धूमधाम से मनाया। आराध्य देवता ब्रह्मेशवर महादेव के मंदिर में शनिवार सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। इसके चलते दिवाली मेला भी मनाया। देवता ब्रह्मेशवर महादेव के भंडारी जोनी ने कहा कि देवता ब्रह्मेशवर महादेव की विशेष कचहरी सजी, जिसमें देवता के गुरों ने दैविक शक्तियों से लोगों की समस्याओं का समाधान किया और उन्हें आशीर्वाद दिया।
ब्राह्मण समुदाय की महिलाओं की ओर से देवता ब्रह्मेशवर महादेव के सामने पारंपरिक गीत गाए गए। इस पारंपरिक दिवाली मेले में लोग अपने घरों से पक्के हुए चावल मंदिर लाते हैं। यहां पर सभी को इकट्ठा किया जाता है। दिवाली मेले में सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद रहे। तीन दिवसीय पारंपरिक दिवाली मेले में शुक्रवार रात्रि को क्षेत्र के लोग देवता ब्रह्मेशवर महादेव के मंदिर पहुंचे। यहां पर उन्होंने मशालें जलाकर आराध्य देवता ब्रह्मेशवर महादेव का भव्य स्वागत किया। दिवाली की रात को देवता ब्रह्मेशवर महादेव के मंदिर में भजन संकीर्तन का आयोजन भी हुआ। स्थानीय लोग एक रस्सा बनाकर खूब खेले। देवता के गुर पुरुषोत्तम ने कहा कि यह मेला क्षेत्र की सुख समृद्धि आपसी भाईचारे और लोगों में देव आस्था को बनाए रखता है। इसे आज भी पारंपरिक ढंग से मनाया जाता है।
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