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एनटीपीसी हादसा, बॉयलर, हॉपर, क्लिंकर की नापजोख
Updated Tue, 14 Nov 2017 11:47 PM IST
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एनटीपीसी हादसा: बॉयलर, हॉपर व क्लिंकर की जांच की
रायबरेली। दिल्ली से आई उच्च स्तरीय जांच टीम ने दिन और रात करीब 10 घंटे से ज्यादा समय तक एनटीपीसी की हादसे वाली यूनिट नंबर छह में बॉयलर, हॉपर, क्लिंकर समेत अन्य उपकरणों की पड़ताल की और मंगलवार को लौट गई। टीम का खास फोकस बॉयलर व हॉपर रहा। टीम ने जानने का प्रयास किया कि आखिर विस्फोट क्यों और किस लापरवाही की वजह से हुआ।
एनटीपीसी में 1 नवंबर को हुए हादसे के बाद एनटीपीसी के अधिशासी निदेशक एसके राय, महाप्रबंधक यांत्रिक उद्यन कुमार एवं वरिष्ठ अधिकारी एके समायर की टीम 4 नवंबर को यहां जांच करने आई थी। एक सप्ताह तक पड़ताल करने के बाद 10 नवंबर को टीम दिल्ली लौट गई थी। यह टीम दो दिन बाद सोमवार देर शाम फिर आई। टीम के सदस्यों ने देर रात तक जांच करने के बाद मंगलवार को भी धमाकेदार वाली यूनिट की जांच की। टीम का सारा फोकस बॉयलर, हॉपर, क्लिंकर रहा। टीम ने बकायदा हर उपकरण के साथ क्लिंकर की भी नापजोख की। क्लिंकर निकलकर हॉपर में कैसे फंस सकता है। इसकी भी वजह तलाशी।
एनटीपीसी सूत्रों का कहना है कि एक सप्ताह तक चली जांच में कुछ बिंदु छूट गए थे, जिनको देखने और उनका मेजरमेंट लेने के लिए टीम आई थी। टीम ने सोमवार रात और मंगलवार को दिन में करीब 10 घंटे से ज्यादा समय तक रुककर जांच की। इसके बाद दस्तावेज तैयार करके लौट गई। इस संबंध में एनटीपीसी के पीआरओ एके श्रीवास्तव का कहना है कि जांच टीम आई थी। यूनिट नंबर छह की पड़ताल के बाद वापस लौट गई।
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रायबरेली। दिल्ली से आई उच्च स्तरीय जांच टीम ने दिन और रात करीब 10 घंटे से ज्यादा समय तक एनटीपीसी की हादसे वाली यूनिट नंबर छह में बॉयलर, हॉपर, क्लिंकर समेत अन्य उपकरणों की पड़ताल की और मंगलवार को लौट गई। टीम का खास फोकस बॉयलर व हॉपर रहा। टीम ने जानने का प्रयास किया कि आखिर विस्फोट क्यों और किस लापरवाही की वजह से हुआ।
एनटीपीसी में 1 नवंबर को हुए हादसे के बाद एनटीपीसी के अधिशासी निदेशक एसके राय, महाप्रबंधक यांत्रिक उद्यन कुमार एवं वरिष्ठ अधिकारी एके समायर की टीम 4 नवंबर को यहां जांच करने आई थी। एक सप्ताह तक पड़ताल करने के बाद 10 नवंबर को टीम दिल्ली लौट गई थी। यह टीम दो दिन बाद सोमवार देर शाम फिर आई। टीम के सदस्यों ने देर रात तक जांच करने के बाद मंगलवार को भी धमाकेदार वाली यूनिट की जांच की। टीम का सारा फोकस बॉयलर, हॉपर, क्लिंकर रहा। टीम ने बकायदा हर उपकरण के साथ क्लिंकर की भी नापजोख की। क्लिंकर निकलकर हॉपर में कैसे फंस सकता है। इसकी भी वजह तलाशी।
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एनटीपीसी सूत्रों का कहना है कि एक सप्ताह तक चली जांच में कुछ बिंदु छूट गए थे, जिनको देखने और उनका मेजरमेंट लेने के लिए टीम आई थी। टीम ने सोमवार रात और मंगलवार को दिन में करीब 10 घंटे से ज्यादा समय तक रुककर जांच की। इसके बाद दस्तावेज तैयार करके लौट गई। इस संबंध में एनटीपीसी के पीआरओ एके श्रीवास्तव का कहना है कि जांच टीम आई थी। यूनिट नंबर छह की पड़ताल के बाद वापस लौट गई।
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