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आबकारी व पुलिस की चुप्पी पर उठे सवाल
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Wed, 03 Feb 2016 11:33 PM IST
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महेशगंज में अवैध शराब की फैक्ट्री के मामले में आबकारी व पुलिस विभाग ने तीसरे दिन भी कोई कार्रवाई नहीं की। दोनों विभाग की चुप्पी गंभीर सवाल खड़े कर रही है। इस मामले में शराब माफिया सुधाकर सिंह को सरगना बताया जा रहा है। क्राइम ब्रांच की टीम ने मुकदमा भी दर्ज कराया है। इसमें बाबागंज ब्लाक प्रमुख पंकज सिंह समेत अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। तीन दिन बाद भी मजदूरों को छोड़कर किसी और पर पुलिस ने काई कार्रवाई नहीं की है।
बड़े पैमाने पर हुई कार्रवाई के बाद भी आबकारी विभाग और पुलिस को खबर मिली कि जिले में अवैध शराब का बड़ी मात्रा में कई ठिकानों पर भंडारण किया गया है। शराब की लाइसेंसी दुकानों पर भी अवैध शराब की बिक्री होती है। इन खबर के बाद भी आबकारी विभाग के साथ पुलिस मौन साधे हुए है। तीसरे दिन भी दोनों विभागों ने शराब की दुकानों की छानबीन करना भी मुनासिब नहीं समझा। यदि ताबड़तोड़ दुकानों पर छापेमारी की जाती तो अवैध शराब भारी मात्रा में मिल सकती थी लेकिन आबकारी व पुलिस विभाग कार्रवाई न कर शायद उन्हें बचने का मौका दे रहा है।
अवैध शराब का कारोबार करने वालों ने कार्रवाई से बचने के लिए आबकारी व पुलिस विभाग में मुखबिर भी पाल रखे हैं। यदि पुलिस विभाग या फिर आबकारी विभाग के आला अधिकारियों का कोई निर्देश मिलता है और वे कार्रवाई की तैयारी भी करते हैं, लेकिन शराब माफिया के मुखबिर सभी को पहले से आगाह कर देते हैं। जिससे वे कार्रवाई के दौरान पुलिस व आबकारी विभाग के हाथ नहीं लगते।
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बड़े पैमाने पर हुई कार्रवाई के बाद भी आबकारी विभाग और पुलिस को खबर मिली कि जिले में अवैध शराब का बड़ी मात्रा में कई ठिकानों पर भंडारण किया गया है। शराब की लाइसेंसी दुकानों पर भी अवैध शराब की बिक्री होती है। इन खबर के बाद भी आबकारी विभाग के साथ पुलिस मौन साधे हुए है। तीसरे दिन भी दोनों विभागों ने शराब की दुकानों की छानबीन करना भी मुनासिब नहीं समझा। यदि ताबड़तोड़ दुकानों पर छापेमारी की जाती तो अवैध शराब भारी मात्रा में मिल सकती थी लेकिन आबकारी व पुलिस विभाग कार्रवाई न कर शायद उन्हें बचने का मौका दे रहा है।
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अवैध शराब का कारोबार करने वालों ने कार्रवाई से बचने के लिए आबकारी व पुलिस विभाग में मुखबिर भी पाल रखे हैं। यदि पुलिस विभाग या फिर आबकारी विभाग के आला अधिकारियों का कोई निर्देश मिलता है और वे कार्रवाई की तैयारी भी करते हैं, लेकिन शराब माफिया के मुखबिर सभी को पहले से आगाह कर देते हैं। जिससे वे कार्रवाई के दौरान पुलिस व आबकारी विभाग के हाथ नहीं लगते।
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