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सर्वपितृ अमावस्या को गया में अर्पित करें अपने समस्त पितरों को तर्पण, होंगे सभी पूर्वज प्रसन्न, 28 सितम्बर
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अयोध्या प्रकरणः कल्याण सिंह बतौर आरोपी 27 को अदालत में तलब, विशेष न्यायाधीश ने दिया आदेश

अयोध्या प्रकरण के विशेष न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार यादव ने पूर्व मुख्यमंत्री व राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह को बतौर आरोपी तलब किया है।

22 सितंबर 2019

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प्रतापगढ़

रविवार, 22 सितंबर 2019

आठ दिन में आंसू निकाल रहा प्याज

महाराष्ट्र व मध्य प्रदेश में बरसात व बाढ़ के चलते जिले में प्याज के दाम आसमान छू रहे हैं। आठ दिन के भीतर प्याज के दाम दोगुने हो गए हैं। बरसात के चलते दो दिन के भीतर हरी सब्जियों के दामों में भी उछाल आ गया। मंडी से निकलते ही सब्जी महंगी हो जा रही है। प्याज का दाम लगातार बढ़ता ही जा रहा है।
किसानों को भले ही सब्जियों के अच्छे रेट न मिल पा रहे हों, लेकिन मंडी से निकलते ही सब्जियों के दामों में आग लग जाती है। मौजूदा समय सबसे अधिक मारामारी प्याज के दामों को लेकर है। आठ दिन पहले जो प्याज 20-25 रुपये प्रति किलो थी। आज उसी प्याज का दाम 55 से लेकर 60 रुपये हो गया है। जो सेब को भी टक्कर देने लगा है।
प्याज के दाम सुनकर लोग भले ही लाल हो रहे हैं लेकिन दाम में कमी के बजाय लगातार इजाफा होता जा रहा है। जिससे प्याज काटने से पहले ही लोगों की आंखों से आंसू निकल रहे हैं। मंडी में अभी तक जो सब्जी कम रेट में मिल रही थी। उन सब्जियों का भी दाम अचानक बढ़ गया है। दो दिनों से बरसात के चलते मंडियों में ताजी सब्जियों की आवक बंद हो गई है।
जिसके चलते हरी सब्जियों के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं। सब्जियों के दाम में लगातार इजाफा देख लोग ग्रामीण अंचलों की बाजारों में सुबह शाम सब्जी खरीदने के लिए चक्कर लगा रहे हैं। शहर की हर सब्जी मंडियों में बिकने वाली सब्जियों के दाम अलग-अलग हैं। दहिलामऊ निवासी हरीश शुक्ला का कहना है कि कंपनी गार्डेन के पास लगनी वाली सब्जी मंडी में अधिक दाम पर दुकानदार सब्जी बेचते हैं जबकि वही सब्जी पंजाबी मार्केट के बगल सब्जी मंडी में कम दाम में मिलती है।
खुशखुशवापुर की रहने वाली मोहसिना का कहना है कि वह भी सब्जी लेने के लिए पुरानी सब्जी मंडी ही जाती हैं। जानकारों का कहना है कि प्याज के रेट में अभी और बढ़ोत्तरी होगी। मध्य प्रदेश व महाराष्ट्र के नासिक से प्याज की आवक कम हो गई है। उम्मीद है बरसात बंद होने पर दूसरी सब्जियों के दाम घटेंगे।

जमाखोरी से बढ़ रहे रेट
महुली मंडी समिति में आढ़त लगाने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि फसल आने के बाद किसानों को जमाखोर शोषण करते हैं। औने पौने दाम में प्याज खरीदकर अपने गोदामों में डंप कर लेते हैं। सीजन खत्म होने के बाद वही प्याज बाहर निकालकर महंगा करके बेचा जाता है। आवक का बहाना बनाकर जमाखोर अपना मुनाफा कमाने के लिए ऐसा रास्ता निकालते हैं। इस महंगाई का सामना अब जनता को करना पड़ रहा है।

आठ दिन के भीतर फुटकर सब्जियों के दामों में अंतर पर एक नजर
सब्जी पहले सब्जियों के दाम अब सब्जियों का दाम
प्याज 23-28 रुपये प्रति किलो 55-60 रुपये प्रति किलो
लहसुन 75 रुपये प्रति किलो 80 रुपये प्रति किलो
टमाटर 20 रुपये प्रति किलो 30 रुपये प्रति किलो
नई आलू 45 रुपये प्रति किलो 50 रुपये प्रति किलो
धनिया हरी 170 रुपये प्रति किलो 200 रुपये प्रति किलो
अदरक 110 रुपये प्रति किलो 120 रुपये प्रति किलो
 
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नवजात को अपनों ने झाड़ियों में फेंका, गैराें ने अपनाया

मां मुझे नौ माह तक पेट में जिंदा रखने के बाद झाड़ियों में मरने के लिए क्यूं फेंक दिया। ऐसा करते समय तुम्हारा हाथ क्यूं नहीं कांपा। शायद यह सवाल रोने के दौरान नवजात अपनी बेरहम से करता रहा। हालांकि उसे बचाने वाले नई जिंदगी देने के लिए जोरआजमाइश लगातार कर रहे हैं।

सूचना के बाद पहुंची पुलिस ने नवजात को उपचार के लिए महिला अस्पताल के एसएनआईसीयू में भर्ती कराया। हर कोई बेरहम मां को कोसता नजर आया। 
उदयपुर थाना क्षेत्र के नसीरपुर पूरे पंडित में बुधवार को एक बेरहम मां की करतूत से हर किसी का कलेजा कांप उठा।

लोकलाज के भय से किसी बेरहम मां ने बुधवार को सुनसान स्थान पर नीम के  पेड़ के नीचे झांड़ियों में नवजात बच्चे को फेंककर भाग गई। नवजात बच्चे के रोने की आवाज सुनकर ग्रामीण पहुंचे। लोगों ने देखा तो झाड़ियों में नवजात बच्चा पड़ा था। उसे बाहर निकाला। ऐसा लग रहा था उसे कुछ देर पहले ही फेंका गया था।

नवजात को गांव में फुलवारी की देखभाल करने वाले दंपति रमेश सोनकर व सत्यवती देवी ने अपना लिया। हालांकि उनकी खुशी अधिक देर तक नहीं रह सकी। सूचना मिलने पर बरसात के बावजूद पुलिस पहुंची। पुलिसकर्मियों ने नवजात की हालत नाजुक देख उसे सीएचसी ले गए। जहां डाक्टरों ने उसकी हालत गंभीर देखते हुए जिला महिला अस्पताल रेफर कर दिया।
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गांव में झमाझम, शहर में रिमझिम बरसात

आसमान में डेरा जमाए बादल बुधवार भोर से ही बरसात कर लोगों को राहत दिया। दिनभर रिमझिम बरसात होती रही,जबकि गांवों में रुक-रुककर बारिश हुई। मगर बारिश से शहर में जगह-जगह जलजमाव व किचकिच से लोगों को आवागमन में दिक्कत हुई। मौसम विभाग के अनुसार अधिकतम तापमान 27.5 व न्यूनतम 25.0 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकार्ड किया गया। जिले में 19 मिमी बारिश हुई।
मंगलवार को देर रात आसमान में बादलों ने डेरा जमा लिया था। बुधवार भोर में बरसात शुरू हुई। गांवों में दिनभर रुक-रुक कर झमाझम बरसात होती रही। जबकि शहर में रिमझिम बारिश हुई। इससे गर्मी से लोगों को राहत मिल गई। बारिश से शहरियों को जलभराव की समस्या उठाना पड़ा। जगह-जगह जलभराव व किचकिच से लोग परेशान रहे।
शहर के दहिलामऊ, विवेकनगर, शिवपुरी, करनपुर, देवकली, बेगमवार्ड, अचलपुर सहित दर्जनों मोहल्लों में नाली चोक होने के कारण जगह-जगह जलभराव से आवागमन में दिक्कत हुई। लोगों को पैदल चलने में भी दिक्कत हुई। सुबह 11 बजे से 12 बजे तक शहर में बारिश थोड़ी देर के लिए रूकी, मगर इसके बाद बादलों ने बरसात शुरू कर दी।
स्कूली बच्चे छाते के सहारे घर रूख करते दिखे। दिनभर आसमान में बादलों ने डेरा जमाए रखा। मौसम विभाग के वैज्ञानिक देशराज मीना ने बताया कि 19.5 मिमी बारिश रिकार्ड की गई है। अधिकतम तापमान 27.5 व न्यूनतम 25.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
बारिश से जगह-जगह जमींदोज हुए कच्चे मकान
गांवों में झमाझम बारिश से जगह- जगह रिहायशी मकान जमींदोज हो गए। गनीमत थी कि कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। लोगों की गृहस्थी दबकर नष्ट हो गई। मांधाता के कुल्हीपुर में दो दिन तक लगातार बारिश के चलते नघई पुत्र प्यारेलाल का मकान गिर गया। मलबे में दबकर घर की गृहस्थी नष्ट हो गई।
विश्वनाथगंज के कोहला गांव निवासी मकसूद अहमद का कच्चा मकान गुरूवार को बारिश से जमींदोज हो गया। घर की गृहस्थी मलबे में दबकर नष्ट हो गई। कोहड़ौर इलाके के पूरे बसई निवासी मंगल पुत्र हीरालाल का कच्चा मकान मंगलवार की रात जमींदोज हो गया। घर की पूरी गृहस्थी मलबे में दबकर नष्ट हो गई।
गांवों में झमाझम बरसात से खिल उठे किसानों के चेहरे
बुधवार को गांवों में झमाझम बारिश हुई। आसमान में डेरा जमाए बादलों ने दिनभर रुक-रुक कर बरसात करते रहे। इससे किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। यह बरसात धान की फसल के लिए संजीवनी है। कृषि विभाग के अनुसार पैदावार में भी वृद्धि होगी। जुलाई माह मेें रोपाई के बाद अच्छी बारिश नहीं हई। अगस्त माह में मौसम ने बिल्कुल साथ नहीं दिया।
महज सप्ताह भर बारिश हुई। किसानों को सिंचाई के लिए नहरों व पंपिंगसेटों का सहारा लेना पड़ा। धान की फसलों की सिंचाई की दरकार थी। भोर में हुई झमाझम बारिश से किसानों के चेहरे खिल उठे। जिला कृषि अधिकारी अश्वनी सिंह ने बताया कि फसलों के लिए यह बारिश बहुत ही महत्वपूर्ण है। इससे पैदावार अच्छी होगी।
.बुधवार को दिनभर हुई रिमझिम बारिश से राजापाल चौराहे पर दुकानों के सामने भरा पानी।
.बुधवार को दिनभर हुई रिमझिम बारिश से राजापाल चौराहे पर दुकानों के सामने भरा पानी।- फोटो : PRATAPGARH
बुधवार को दिनभर हुई रिमझिम बारिश से चौक घंटाघर के करीबलहाईवे के गड्ढों में भरा पानी।
बुधवार को दिनभर हुई रिमझिम बारिश से चौक घंटाघर के करीबलहाईवे के गड्ढों में भरा पानी।- फोटो : PRATAPGARH
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सदर उपचुनाव का बजा डंका, एक्शन में प्रशासन

शनिवार को सदर विधानसभा के उपचुनाव का डंका बजते ही जिला प्रशासन एक्शन में आ गया। अधिसूचना जारी होने की जानकारी होते ही जिला प्रशासन और नगर पालिका ने शहर में नेताओं की लगी होर्डिंग और बैनर को उतारने का अभियान चलाया। जगह-जगह बैनर और होर्डिंग उतरवाए गए।
सदर विधायक रहे संगमलाल गुप्ता के सांसद चुने जाने से खाली हुई सदर विधानसभा के लिए 21 अक्तूबर को मतदान और 24 अक्तूबर को मतगणना होगी। शनिवार को सदर विधानसभा उपचुनाव की घोषणा की घोषणा होते ही जिला प्रशासन एक्शन में आ गया। शहर और सदर विधानसभा के अंतर्गत आने वाले टाउन एरिया में होर्डिंग और बैनर हटाने का अभियान चला।
शहर के अंबेडकर चौराहा, ट्रेजरी चौराहा, राजापाल चौराहा, चौक, भगवाचुंगी पर नेताओं की लगी बड़ी-बड़ी होर्डिंग उतारी जाने लगी। नगरपालिका कर्मियों के इस अभियान में एसडीएम सदर और तहसीलदार ने भी सहयोग किया।
इधर उपचुनाव की घोषणा होते ही चुनाव लड़ने की तैयारी करने वाले नेताओं की भाग-दौड़ बढ़ गई है। अभी तक होर्डिंग और बैनर से लड़ने वाले भावी प्रत्याशी समर्थकों के साथ मठाधीशों से संपर्क करने में जुट गए हैं।
आदर्श आचार संहिता की घोषणा के बाद कांग्रेस कार्यालय पर लगी होर्डिग्स को हटवाने पहुंचे पालिका कर?
आदर्श आचार संहिता की घोषणा के बाद कांग्रेस कार्यालय पर लगी होर्डिग्स को हटवाने पहुंचे पालिका कर?- फोटो : PRATAPGARH
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आदर्श आचार संहिता की घोषणा के बाद अम्बेडकर चौराहे पर लगी होर्डिग्स हटाते पालिका कर्मी। आदर्श आचार संहिता की घोषणा के बाद अम्बेडकर चौराहे पर लगी होर्डिग्स हटाते पालिका कर्मी।

15 मिनट के चक्रवात से मची अफरातफरी, गिरे पेड़

शनिवार कीे शाम आए चक्रवाती तूफान से पट्टी, रखहा व अंतू क्षेत्र में अफरातफरी मच गई। जगह-जगह पेड़ गिर गए। कई घर भी इसकी चपेट में आ गए। लोगों की गृहस्थी नष्ट हो गई। करीब 15 मिनट तक क्षेत्र में अफरातफरी मची रही।
शाम करीब 4 बजे अंतू क्षेत्र में चक्रवाती तूफान ने दस्तक दी। इससे इलाके में अफरातफरी मच गई। कई पेड़ जमीन पर आ गए। बाजारों में टीनशेड, छप्पर आदि उड़ गए। लोगों ने दौडक़र घरों में शरण ली। हालांकि यहां किसी तरह की अप्रिय घटना नहीं हुई।
कंधई थाना क्षेत्र के नरसिंहपुर मनैतापुर परसनी गांव में सडक़ पर पेड़ गिरने से आवागमन पूरी तरह से बाधित हो गया। मनेतापुर गांव के पास राजाराम की दुकान पेड़ गिरने से क्षतिग्रस्त हो गई।
साइकिल से घर जा रहे पूरे घना गांव का एक युवक पेड़ के नीचे आने से बाल-बाल बचा। उसकी साइकिल क्षतिग्रस्त हो गई। सूचना वन विभाग के कर्मचारियों को दी गई। दो घंटे की मेहनत के बाद वनकर्मियों ने किसी तरह सडक़ से पेड़ हटाया।
शनिवार को दोपहर बाद बारिश के दौरान चली तेज हवा में अंतू थाने के बाबूगंज में दुकान पर गिरा नीम का पे
शनिवार को दोपहर बाद बारिश के दौरान चली तेज हवा में अंतू थाने के बाबूगंज में दुकान पर गिरा नीम का पे- फोटो : PRATAPGARH
शनिवार को दोपहर बाद बारिश के साथ अंतू थाना क्षेत्र में चली तेज हवा से लोहिया नगर में सड़क पर गिरे प
शनिवार को दोपहर बाद बारिश के साथ अंतू थाना क्षेत्र में चली तेज हवा से लोहिया नगर में सड़क पर गिरे प- फोटो : PRATAPGARH
चिलबिला पट्टी रोड पर मनैतापुर में गिरा पेड़।
चिलबिला पट्टी रोड पर मनैतापुर में गिरा पेड़।- फोटो : PRATAPGARH
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डेंगू के सात मरीज मिलने से हड़कंप

जिले में दो माह के भीतर डेंगू के सात मरीज मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। गांव के लोग दहशत में हैं, लेकिन स्वास्थ्य महकमा कुंभकर्णी नींद में सो रहा है। किसी भी गांव में दवाओं का छिड़काव और फागिंग नहीं कराई गई।
जागरूकता अभियान का कहीं कोई नामोनिशान नहीं है। अस्पताल में डेंगू के लिए अलग वार्ड जरूर बना है, लेकिन उसमें एक भी मरीज भर्ती नहीं किए गए। अलबत्ता, स्वास्थ्य महकमे ने शासन को यह रिपोर्ट भेजकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया कि ज्यादातर लोग जिले से बाहर डेंगू की चपेट में आए।
जिले में डेंगू के मरीज मिलने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की ओर से बचाव के लिए कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। शासन के आदेश पर सीएचसी में पांच तो जिला अस्पताल में दस बेड का अतिरिक्त डेंगू वार्ड का निर्माण तीन साल पहले कराया गया था। मगर आज तक डेंगू वार्ड में एक भी मरीज भर्ती नहीं किए गए हैं।
जिला अस्पताल में डेंगू की जांच की व्यवस्था है, मगर चिकित्सक से लेकर स्वास्थ्य विभाग के अफसर उस रिपोर्ट को संदिगध मानते हैं। इसके चलते मरीजों को भर्ती भी नहीं किया जाता है। संदिग्ध मरीजों को तत्काल प्रयागराज रेफर कर दिया जाता है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में दो माह के भीतर डेंगू के सात मामले सामने आए हैं।
रानीगंज के दूबे पट्टी निवासी सरिता दूबे पत्नी अमित सिंह, सांगीपुर के शुकुलपुर निवासी मोहम्मद आलम पुत्र मोहम्मद हसन, ढिंगौसी निवासी महेंद्र प्रसाद पुत्र आद्या प्रसाद, सराय महिमा निवासी गयासुद्दीन पुत्र मोदनुद्दीन, सोनपुर ढकवा निवासी शनि कुमार पुत्र अरविंद उपाध्याय व रामपुर बाउली निवासी इकरा पत्नी फिरोज अहमद और कुंडा के मोती का पुरवा निवासी हामिद को डेंगू की पुष्टि एसआरएन प्रयागराज और पीजीआई लखनऊ में हुई। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग नींद में है। जांच में पुष्टि के बाद रिपोर्ट सीएमओ के पास आई है।
इसमें अफसरों से सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है, लेकिन विभाग कागज पर रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज दे रहा है। शासन को भेजी गई रिपोर्ट में स्वास्थ्य विभाग ने अवगत कराया है कि ज्यादातर मरीज दूसरे शहर में रहते थे। डेंगू होने के बाद वे घर आए थे। गंभीर हालत में परिजन खुद ही मेडिकल कॉलेज लेकर चले गए।
जब भर्ती ही नहीं करना था तो क्यों बनाया डेंगू वार्ड
सपा शासनकाल में जिला अस्पताल में दस बेड तो सीएचसी में पांच-पांच बेड के डेंगू वार्ड तैयार किए गए थे। मरीजों के लिए अलग से मच्छरदानी की भी व्यवस्था की गई थी। तीन साल बीत गए, मगर जिले के एक भी सरकारी अस्पताल के डेंगू वार्ड में मरीजों को भर्ती कर इलाज नहीं किया गया है।
डेंगू के मरीजों को जांच और इलाज कराने के लिए प्रयागराज या फिर लखनऊ का चक्कर काटना पड़ता है। वार्ड में 24 घंटे ताला लटकता रहता है। वार्ड के आसपास गंदगी का अंबार लगा हुआ है।
डेंगू की जांच का दावा, अपनी ही रिपोर्ट पर भरोसा नहीं
स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पताल में डेंगू की जांच होने का दावा किया था, लेकिन हैरत वाली बात यह है कि जिला अस्पताल की पैथालॉजी रिपोर्ट पर डॉक्टरों के साथ सीएमएस और सीएमओ को भी भरोसा नहीं है। इस रिपोर्ट पर संदेह जताते हैं। दरअसल, जिला अस्पताल के पैथालॉजी में किट से डेंगू की जांच की जाती है।
जबकि प्रयागराज के एसआरएन और लखनऊ के पीजीआई में हायर सेंटर बना हुआ है। यहां आधुनिक मशीनों से डेंगू की जांच की जाती है। इससे जिला अस्पताल के पैथालॉजी में डेंगू की जांच कराने से मरीजों को किसी भी प्रकार का लाभ नहीं मिलता है।
जिला अस्पताल पैथालॉजी के सूत्रों की मानी जाए तो जुलाई से लेकर अब तक 210 मरीजों की जांच की गई। जिसमें दर्जन भर से अधिक लोगों को डेंगू की पुष्टि हुई। मरीजों को तत्काल चिकित्सकों ने प्रयागराज के लिए रेफर कर दिया।
डेंगू की चपेट में आने वाले लोगों की जो सूची मेरे पास आई है उनके घर दवा का छिड़काव करा दिया गया है। आसपास के कुछ लोगों का ब्लड लेकर जांच के लिए भेजा गया है। जिला अस्पताल में जो जांच हो रही है वह गलत नहीं है, पर किट से हुई जांच पर बहुत भरोसा करने लायक नहीं होता है, इसलिए मरीजों को एसआरएन भेजा जाता है। डॉक्टर एके श्रीवास्तव, सीएमओ।
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अपराजिता : दांत चमकाएं, बीमारियां दूर भगाएं

दांत हमारे शरीर के आभूषण हैं। इन्हेें नियमित साफ करना चाहिए। यदि इसमें लापरवाही बरती गई तो शरीर में तरह-तरह के रोग पैदा होने लगते हैं। रोगों से बचना है तो नियमित ब्रश करना होगा। यह बातें शनिवार को अमर उजाला के अभियान अपराजिता : 100 मिलियन स्माइल के तहत चिलबिला स्थित अवध विद्या एक डमी में आयेाजित स्वास्थ्य शिविर में डा. अवंतिका पंाडेय ने कहीं।
उन्होंने कहा कि दांत साफ रहेंगे तो मुंह से दुर्गंध नहीं आएगी। साथ ही पेट की बीमारियों से भी बचा जा सकेगा। हम सभी को सुबह-शाम नियमित दांतों की सफाई करनी चाहिए। दांत में दर्द हो, कीड़े आदि पड़ गए हों तो झोलाछाप डाक्टर की सलाह पर दवा आदि न लें, बल्कि कुशल चिकित्सक से संपर्क करें।
इस दौरान मंतसा, श्रद्धा, जान्हवी, आस्था, निकिता, भूमि सहित दर्जनों छात्राओं ने दांत का परीक्षण कराया। प्रधानाचार्या अरुणा द्विवेदी ने अमर उजाला के अभियान की सराहना की। इस अवसर पर जदीश सोनी, वंदना पंाडेय, मीना निशा आदि मौजूद रहीं।
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आयुष्मान भारत योजना : गंभीर रोगों के इलाज के लिए नहीं है व्यवस्था

अपराजिता के बैनर तले अवध विद्या एकेडमी में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में बच्चों का इलाज करती डा0 अवं
जनपद के सरकारी अस्पतालों में आयुष्मान भारत के मरीजों को भर्ती कर इलाज करने का भले ही स्वास्थ्य विभाग दावा कर रहा है, मगर हकीकत में विभाग के पास न तो विशेषज्ञ डॉक्टर हैं और न ही उपकरण। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में आने वाले गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। सर्दी, जुुकाम और बुखार के साथ डायरिया अथवा प्रसव पीड़िताओं को भर्ती कर इलाज किया जाता है।
वर्ष 2011 में हुई आर्थिक जनगणना के आधार पर जनपद के 1 लाख 77 हजार 721 परिवारों को पात्रता सूची में शामिल किया गया। इस योजना के तहत परिवार के सभी सदस्यों के नाम गोल्डेन कार्ड जारी करने का आदेश था। एक साल बीतने के बाद भी अभी तक मात्र 88 हजार लोगों को ही गोल्डेन कार्ड जारी हो सके हैं।
दावा किया जा रहा है कि सालभर के अंदर 1996 लोगों का सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में योजना के तहत इलाज किया गया। जनपद के जिला व महिला अस्पताल के साथ ही सीएचसी बेलखरनाथ, संडवाचंद्रिका, कुंडा, अमरगढ़, बाबागंज, कोहड़ौर, लक्षमणपुर, लालगंज, पट्टी, संग्रामगढ़, गौरा, सांगीपुर, रानीगंज, बाघराय के साथ रूमा नर्सिंगहोम, शांतनु नर्सिंगहोम, संजीवनी नर्सिंगहोम, रामविलास मेमोरियल हास्पिटल कुंडा, उषा नर्सिंगहोम और रानीगंज के नारायण स्वरूप हास्पिटल में आयुष्मान भारत के तहत मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
हकीकत में देखा जाए तो जिला अस्पताल में ही हर्ट के डॉक्टर नहीं है। सीनियर फिजीशियन के भरोसे काम चलाया जा रहा है। आईसीयू तो बना है मगर चिकित्सक के अभाव में कभी मरीजों को भर्ती नहीं किया जाता है। पट्टी, लालगंज, रानीगंज और कुंडा को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर सीएचसी में सर्जन, फिजीशियन और बालरोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं की गई है।
शासन की ओर से जिन नर्सिंगहोम को आयुष्मान के मरीजों को भर्ती कर इलाज करने की जिम्मेदारी मिली है, उनमे एक दो को छोड़ दिया जाए तो वहां भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। इससे मरीजों को भर्ती कर इलाज के बजाए जिले से रेफर किया जाता है। जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में ऑपरेशन की व्यवस्था है।
लेकिन हादसे में किसी को गंभीर चोटें आ गई हैं और उसे सीटी स्कैन कराना है तो आयुष्मान भारत योजना का कार्ड उस समय काम नहीं आएगा। उसे शुल्क देकर ही जांच करानी होगी। पैर फैक्चर हो गया तो इलाज की व्यवस्था नहीं है। दरअसल राड से लेकर प्लेट तक मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ेगी।
आयुष्मान के मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। जरुरत पड़ने पर डॉक्टरों की टीम बुलवा ली जाती है। गंभीर रोगियों को जिले या फिर प्रयागराज के किसी प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करवाया जाता है। मरीज की हालत गंभीर देखकर ही रेफर किया जाता है।
डॉक्टर अरविंद कुमार श्रीवास्तव, सीएमओ।
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23 सचिवों के वेतन से 4.36 लाख रुपये की हुई रिकवरी

जिले के 312 अपात्रों को प्रधानमंत्री आवास बांटने वाले वीडीओ के वेतन से शुक्रवार को पहली किस्त के रूप में 4.36 लाख रुपये की कटौती की गई है। शासन के फरमान पर पहली बार हुई कार्रवाई में 17 विकास खंडों के 23 सचिवों पर यह गाज गिरी है।
जिले के 17 विकास खंडों में 312 अपात्रों का प्रधानमंत्री आवास (ग्रामीण) के तहत चयन किया गया था। इन लाभार्थियों को दो-दो किस्त का भुगतान होने पर जब अफसरों ने जांच शुरू की तो यह अपात्र मिले थे। अफसरों ने वीडीओ को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके वेतन से कटौती करने को कहा था।
जिले के 17 ग्राम पंचायत अधिकारी और छह ग्राम विकास अधिकारियों के चिह्नित होने पर डीएम ने भुगतान की गई राशि को किस्तों में वेतन से काटने को कहा था। शुक्रवार को जिले के 23 सचिवों के वेतन से पहली किस्त के रूप में 4.36 लाख रुपये की कटौती की गई।
सीडीओ धीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि लाभार्थियों के रुपये नहीं लौटाने पर वीडीओ के वेतन से यह कटौती की गई है। उन्होंने बताया कि अगर सचिव लाभार्थी से यह धनराशि जमा कराते हैं तो उनके वेतन से कटौती बंद कर दी जाएगी।
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लापरवाही पर बेसिक शिक्षा के 30 हेडमास्टरों पर गरिी गाज

बेसिक शिक्षा विभाग के हेडमास्टरों की लापरवाही पर 30 शिक्षकों पर गाज गिरी है। सीएमओ के जांच में खुलासा हुआ कि 15 सितंबर को बूथ डे पर 16 स्कूलों में ताला ही नहीं खुला, जबकि 14 स्कूलों में एमडीएम नहीं बनने पर यह कार्रवाई हुई है। बीएसए ने दस ब्लाकों के खंड शिक्षा अधिकारियों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया है।
जिले में 15 सितंबर रविवार को जिले भर में बूथडे मनाया गया। स्वास्थ्य विभाग और बेसिक शिक्षा के सहयोग से आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम की जानकारी हेडमास्टरों को पहले से दी गई थी। मगर स्वास्थ्य विभाग के डब्लूएचओ के 78 स्कूलों के निरीक्षण में 16 स्कूलों में ताला लटकता मिला और 14 स्कूलों में खुलने के बाद भी एमडीएम नहीं बना।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि स्कूलों में एमडीएम नहीं बनने से बच्चों की उपस्थिति शून्य रही। सीएमओ की रिपोर्ट पर डीएम ने बीएसए को पत्र भेजकर लापरवाह हेडमास्टरों का एक दिन का वेतन रोकने का निर्देश दिया था।
बीएसए अशोक कुमार सिंह ने बताया कि स्कूल बंद कर गायब रहने और स्कूल खुलने के बाद भी एमडीएम नहीं बनाने वाले हेडमास्टरों की सूची जारी कर एक दिन के वेतन भुगतान पर रोक लगा दी गई है। उन्होंने बताया कि दस विकास खंडों के बीईओ को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया गया है।
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कस्तूरबा विद्यालय में पानी की समस्या पर छात्राओं का हंगामा

कस्तूरबा विद्यालय में पानी की समस्या से परेशान दर्जनभर छात्राएं गुरुवार को घर जाने लगीं। हालांकि वार्डन के समझाने के बाद वह लौटने के लिए तैयार हो गईं। इस पर विद्यालय प्रशासन ने राहत की सांस ली। जांच के दौरान यहां वार्डन व शिक्षिका में तनातनी के चलते छात्राओं को उकसा कर विद्यालय छोडने की बात सामने आई है।
लालगंज के सराय जानमती स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में गुरुवार को नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला। करीब दर्जनभर छात्राएं विद्यालय परिसर की छत पर रखी टंकी में पानी नहीं होने की बात कहते हुए अपना बैग लेकर परिसर से निकल पड़ीं। छात्राओं के अचानक विद्यालय छोड़क़र जाने की जानकारी पर स्कूल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। वार्डन समेत कर्मचारियों ने छात्राओं को बुलाया, लेकिन वह लौटने को तैयार नहीं हुईं। बाद में किसी तरह समझाबुझाकर आधे घंटे बाद उन्हें वापस परिसर में लाया गया।
बीएसए के निर्देश पर शुक्रवार की सुबह खंड शिक्षाधिकारी मो. रिजवान मामले की जांच के लिए कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय पहुंच गए। वार्डन प्रतिभा कुशवाहा ने उन्हें बताया कि बिजली खराब होने से पानी की टंकी भरी नहीं जा सकी। लेकिन परिसर में इंडिया मार्का हैंडपंप की व्यवस्था भी है, जिसके बाद भी अचानक कुछ छात्राएं जाने लगी। बीईओ ने घर जाने के लिए निकली छात्राओं से पूछताछ की तो वह कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं हुईं।
अधिकतर छात्राओं ने विद्यालय परिसर में मिलने वाली सुविधाओं पर संतोष जताया। जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि वार्डन व शिक्षिका के बीच तालमेल न होने से आए दिन इस विद्यालय में कुछ न कुछ होता रहता है। बीईओ मो. रिजवान ने पानी की समस्या से निजात के लिए पानी की टंकी की क्षमता बढ़ाने के साथ ही जनरेटर की व्यवस्था शीघ्र करने की बात छात्राओं से कही है।
पानी की किल्लत के चलते छात्राएं घर जाना चाहती थीं। इसके लिए जनरेटर की व्यवस्था के साथ ही पानी की टंकी की क्षमता बढ़ाई जाएगी। स्टाफ में तालमेल का अभाव दिख रहा है। इस मामले की जांच भी की जा रही है।
मो. रिजवान, बीईओ, लालगंज
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छप्पर में सो रहे दंपति पर गिरा कच्चा घर, पत्नी की मौत

छप्पर में सो रहे दंपति पर पड़ोसी का कच्चा मकान भरभराकर ढह गया। इससे दोनों मलबे के नीचे दब गए। शोरशराबा सुनकर पहुंचे लोगों ने मलबा हटाया और उन्हें अस्पताल ले गए, जहां डाक्टरों ने पत्नी को मृत घोषित कर दिया। पति की हालत गंभीर देख उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया।
बाघराय थाना क्षेत्र के नारंगपुर गांव निवासी कृपाशंकर यादव (53) पत्नी कलावती देवी (46) के साथ बुधवार रात अपने घर के सामने छप्पर में सो रहे थे। रात करीब 11 बजे पड़ोसी राजपति यादव का कच्चा मकान भरभराकर ढह गया। छप्पर में सो रहे दंपति मलबे के भीतर दब गए। किसी को इसकी जानकारी नहीं हुई। काफी देर बाद कृपाशंकर का बेटा रामराज उधर गया तो नजारा देख सन्न रह गया। उसने शोर मचाया तो भारी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ मौके पर जुट गई। सूचना पर पुलिस भी आ गई।
मलबा हटाकर लोगों ने किसी तरह दंपति को बाहर निकाला। इसके बाद दोनों को बाघराय सीएचसी ले जाया गया। अस्पताल में चिकित्सकों ने कलावती को मृत घोषित कर दिया। कृपाशंकर यादव का प्राथमिक उपचार करके उन्हें जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया।
बाघराय पुलिस ने कलावती के शव को सुबह पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। घटना के बाद से उसके घर में चीखपुकार मची हुई है। प्रधान अमरनाथ यादव, लेखपाल कृष्ण कुमार पांडेय ने पहुंचकर परिजनों को धैर्य बंधाया। लेखपाल ने अपनी रिपोर्ट एसडीएम को देने की बात कही।
बाघराय के नारंगपुर में घर गिरने के बाद मलबा हटने का प्रयास करते लोग।
बाघराय के नारंगपुर में घर गिरने के बाद मलबा हटने का प्रयास करते लोग।- फोटो : PRATAPGARH
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अफसरों के खिलाफ आंदोलनरत अधिवक्ताओं का हंगामा

एसडीएम व नायब तहसीलदार के खिलाफ लगभग दस दिनों से आंदोलनरत अधिवक्ताओं ने गुरुवार को जमकर हंगामा किया। बाद में अफसरों व अधिवक्ताओं के प्रतिनिधि मंडल के बीच वार्ता में तीन दिनों के भीतर मांगों को पूरा किए जाने पर सहमति बनी है। लालगंज तहसील में एसडीएम विनीत उपाध्याय व नायब तहसीलदार बृजमोहन शुक्ल की कार्यप्रणाली से आहत अधिवक्ताओं ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
अधिवक्ताओं ने अफसरों को हटाए जाने समेत नौ सूत्रीय मांगों को लेकर कार्य बहिष्कार व प्रदर्शन जारी रखा है। एसडीएम व एनटी के विरोध में उतरे अधिवक्ता गुरुवार को संयुक्त अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष विकास मिश्र की अगुवाई में तहसील परिसर में एकजुट हो गए। सैकड़ों की संख्या में जुटे अधिवक्ता अध्यक्ष विकास मिश्र के साथ नारेबाजी करते हुए एसडीएम कोर्ट समेत विभिन्न कार्यालयों के समक्ष जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
तहसील परिसर में हंगामे के चलते अफरा तफरी का माहौल बन गया। अधिवक्ताओं के हंगामें के चलते कुछ देर बाद एसडीएम विनीत उपाध्याय, तहसीलदार पद्मेश श्रीवास्तव व नायब बृजमोहन तहसील के सामने पीडब्लूडी के गेस्ट हाउस में चले गए। बाद में तहसीलदार पद्मेश श्रीवास्तव के प्रस्ताव पर अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल व अफसरों के बीच गेस्ट हाउस में काफी देर तक वार्ता हुई। वार्ता के दौरान एसडीएम ने प्रतिनिधिमंडल को तीन दिन के भीतर अधिकतर समस्याओं के निस्तारण करने का आश्वासन दिया।
जिस पर अधिवक्ताओं ने भी सहमति जताई। इसके बाद भी समस्याओं का निस्तारण नही किया गया तो अधिवक्ताओं ने आंदोलन और तेज करने की चेतावनी दी है। इस मौके पर महामंत्री आशीष तिवारी, उपाध्यक्ष राजेश सरोज, अखिलेश श्रीवास्तव, टीपी यादव, राव वीरेंद्र सिंह, ज्ञान प्रकाश शुक्ल, सुशील शुक्ल, देवी प्रसाद मिश्रा, दिनेश मिश्रा, संदीप सिंह, अजय शुक्ल, राम अभिलाख यादव, संतोष पांडेय, धीरेंद्र शुक्ल, केबी सिंह, शेष तिवारी, संजय सिंह, आदि मौजूद रहे।
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