जिस समझा अदिति, वो निकली संध्या: 20 हजार रुपये के लालच में बन गई डॉक्टर, फोटो से खुली पोल; दो गिरफ्तार
पीलीभीत में महिला समेत दो फर्जी डॉक्टर पकड़े गए हैं। महिला वाराणसी की रहने वाली है, जिसे बरेली के युवक ने डॉक्टर अदिति बनाकर सीएमओ कार्यालय में पेश किया था, लेकिन फोटो से उसकी पोल खुल गई।
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पीलीभीत में डायग्नोस्टिक सेंटर का पंजीकरण कराने पहुंची फर्जी महिला डॉक्टर समेत दो लोगों को सीएमओ ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। कोतवाली पुलिस ने दोनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
तहसील पूरनपुर के गांव किशनपुर निवासी सूरजपाल ने चरक डायग्नोस्टिक सेंटर का पीसीपीएनडीटी एक्ट के अंतर्गत पंजीकरण कराने के लिए 27 जून 2023 को स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल पर आवेदन किया था। आवेदन में डॉ. अदिति प्रकाश को रेडियोलॉजिस्ट दिखाया गया। चार जुलाई को डॉ. अदिति प्रकाश ने सीएमओ को डाक से भेजे पत्र में बताया कि चरक डायग्नोस्टिक सेंटर के लिए जो आवेदन किया गया है, उसमें उनकी डिग्री को फर्जी तरीके लगाया गया है। उन्होंने डायग्नोस्टिक सेंटर को अनुमति प्रदान न करने की बात कही।
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ऐसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा
सीएमओ डॉ. आलोक कुमार ने डॉ. अदिति की डिग्री में अंकित पते और पत्र के संबंध में स्थिति स्पष्ट करने के लिए डाक से पत्र भेजा, लेकिन दोनों ही पत्र लौट आए। इसके बाद सीएमओ की तरफ से चार अगस्त को सूरजपाल को पत्र भेज कर निर्देश दिया गया कि डॉ. अदिति प्रकाश अपने मूल प्रमाणपत्रों के साथ एक सप्ताह के अंदर कार्यालय में उपस्थित हों।
इस पर 11 अगस्त 2023 को बरेली के थाना इज्जतनगर के मोहल्ला छोटी बिहार के रहने वाले अंकित सिंह, वाराणसी के थाना चौबेपुर की संध्या देवी पत्नी विजय कुमार के साथ सीएमओ कार्यालय पहुंचे। सीएमओ ने चरक डायग्नोस्टिक सेंटर के पंजीकरण के आवेदन पर लगी फोटो से जब महिला की फोटो का मिलान किया तो पूरा मामला साफ हो गया।
पता चला कि डॉ. अदिति की डिग्री लगाकर दोनों पंजीकरण कराना चाह रहे हैं। सीएमओ ने कार्यालय के कर्मचारियों से दोनों को पकड़वा लिया। इसके बाद कोतवाली से पुलिस बुला ली। बताया जा रहा कि अंकित के साथ तीन-चार और लोग भी आए थे, जो भाग गए। सीएमओ कार्यालय के बाबू की तहरीर पर पुलिस ने मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
महिला को दिया था 20 हजार रुपये का लालच
इंस्पेक्टर कोतवाली नरेश त्यागी ने बताया कि अंकित ही महिला को वाराणसी से लेकर आया था। महिला को बताया था कि कुछ देर के लिए उसे डॉक्टर बनकर बातचीत करनी है। इसके लिए उसे 20 हजार रुपये दिए गए थे। अंकित के कई डॉक्टरों से संबंध हैं। वह इसी तरह से क्लीनिक और डायग्नोस्टिक सेंटर के रजिस्ट्रेशन के लिए फर्जी डॉक्टर व स्टाफ उपलब्ध कराता है।