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Pilibhit News: वायरसों की आहट से बेचैनी, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर
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स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय पीलीभीत।
पीलीभीत। बदलते मौसम, बढ़ती वैश्विक आवाजाही और पर्यावरणीय असंतुलन के बीच वायरल एवं संक्रामक रोगों का खतरा फिर बढ़ने लगा है। डेंगू, निपाह वायरस, इबोला, हंटावायरस और बर्ड फ्लू जैसे संक्रमणों को लेकर स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी लापरवाही गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है। इसलिए समय रहते सावधानी और जागरूकता बेहद जरूरी है। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के अनुसार, वर्तमान समय में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई संक्रामक रोगों की लगातार निगरानी की जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ती जनसंख्या घनत्व और अंतरराष्ट्रीय यात्रा के कारण संक्रमण फैलने का खतरा तेजी से बढ़ा है। यही वजह है कि स्वास्थ्य एजेंसियां अब पहले से अधिक सतर्क नजर आ रही हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि डेंगू ज्वर अब केवल बारिश के मौसम तक सीमित बीमारी नहीं रह गया, बल्कि वर्षभर संभावित खतरे के रूप में उभर रहा है। मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनने से कई राज्यों में डेंगू के मामलों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
लोगों को घर और आसपास पानी जमा न होने देने की सलाह दी गई है, क्योंकि यही डेंगू फैलाने वाले मच्छरों के पनपने की सबसे बड़ी वजह बनता है। कम्युनिटी मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. अरुण सिंह ने बताया कि मध्य अफ्रीका में इबोला संक्रमण के मामलों को देखते हुए भारत में भी सतर्कता और सर्विलांस बढ़ा दिया गया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हंटावायरस संक्रमण को लेकर भी निगरानी जारी है। निपाह वायरस अपनी अधिक मृत्यु दर के कारण स्वास्थ्य एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता बना हुआ है। इसके अलावा कुछ क्षेत्रों में पक्षियों और पोल्ट्री में बर्ड फ्लू (एच5एन1) संक्रमण मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन विभाग संयुक्त रूप से निगरानी कर रहे हैं। संवाद
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लोगों को घर और आसपास पानी जमा न होने देने की सलाह दी गई है, क्योंकि यही डेंगू फैलाने वाले मच्छरों के पनपने की सबसे बड़ी वजह बनता है। कम्युनिटी मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. अरुण सिंह ने बताया कि मध्य अफ्रीका में इबोला संक्रमण के मामलों को देखते हुए भारत में भी सतर्कता और सर्विलांस बढ़ा दिया गया है।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हंटावायरस संक्रमण को लेकर भी निगरानी जारी है। निपाह वायरस अपनी अधिक मृत्यु दर के कारण स्वास्थ्य एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता बना हुआ है। इसके अलावा कुछ क्षेत्रों में पक्षियों और पोल्ट्री में बर्ड फ्लू (एच5एन1) संक्रमण मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन विभाग संयुक्त रूप से निगरानी कर रहे हैं। संवाद

स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय पीलीभीत।
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