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Pilibhit News: हर घर जल जीवन मिशन की परियोजना के कई कार्यों पर लगा ग्रहण

Sun, 20 Sep 2026 01:24 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 20 Sep 2026 01:24 AM IST
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Several works under the 'Har Ghar Jal' (Jal Jeevan Mission) project have hit a roadblock.
तीन साल पहले स्वीकृत हुईं परियोजनाएं, कई गांवों टपक नहीं पाई एक भी बूंद, कहीं बाघ का खतरा, कहीं खुद वन विभाग के फाइलों में दबी परियोजना की अनुमति
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पीलीभीत। सरकार ने भले ही जल जीवन मिशन पर करोड़ों खर्च कर गांव-गांव, घर-घर शुद्ध पेयजल देने का संकल्प लिया हो, लेकिन स्थानीय स्तर पर ग्रामीण क्षेत्र की कुछ परियोजनाओं पर वन विभाग का ग्रहण लगा हुआ है। जिस ग्रामीण इलाके में टंकी निर्माण, पाइप लाइन बिछना व अन्य कार्य होना है। वह भूमि कहीं जंगल से सटी या खुद वन विभाग की भूमि के अंतर्गत है। ऐसी स्थिति में कहीं बाघ का खतरा व वन विभाग की भूमि पर परियोजना की दबी अनुमति आड़े आई हुई है।
जिला पीलीभीत में जल जीवन मिशन के तहत जिले के सभी ग्राम पंचायतों में 484 परियोजनाएं शामिल हैं। इसके लिए 800 करोड़ से ज्यादा की धनराशि स्वीकृत है। इसमें ग्राम पंचायत स्तर पर ओवर हेड टैंक बनाने के साथ उसका परिसर व ग्रामीण इलाकों में लोगों के घरों तक भूमिगत पाइप लाइन बिछाई जानी हैं।
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इसमें तमाम स्वीकृत परियोजनाएं ऐसी भी हैं, जो वन विभाग की भूमि पर है। वन विभाग व वाइल्डलाइफ की अनुमति नहीं मिलने के कारण परियोजनाएं अटकी हैं। ऐसे में हर घर जल दावे के बीच वन विभाग रोड़ा बना हुआ है। भले ही गांव में परियोजना मिले तीन साल गुजर गए हो, लेकिन अमृत पेयजल की बूंदे इन जंगल से लगे गांवों में कहीं नहीं टपकी। आज भी इन गांवों में सरकारी नल, घरों के पुराने नल व पुराने तालाब पानी के स्रोत हैं। हालांकि विभाग समय-समय पर अगले महीने परियोजना शुरू होने का दावा करता रहता है। संवाद
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तीन साल से अटका सैजन- सैजनिया का ओवरहेड टैंक
ब्लॉक मरौरी में ग्राम पंचायत सैजन- सैजनिया में तीन साल पहले परियोजना मंजूरी के बाद शुरुआत की गई। उस समय शुरू में शुद्ध पेयजल के लिए ओवरहेड टैंक व परिसर बनाया जाना था, लेकिन लोग बताते हैं कि जहां परियोजना शामिल है। वहां से जंगल बॉर्डर की दीवार 20 मीटर की ही दूरी पर है। इससे हमेशा ही जानवर व बाघ यहां पर आते रहते हैं। इसके डर से मजदूर यहां काम करने से इन्कार कर देते हैं। इस वजह से यहां तीन साल में सिर्फ ओवरहेड टैंक की नींव ही रखी जा सकी।
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टाटरगंज गांव ही पूरा वन भूमि पर, अटकी परियोजना की अनुमति
पूरनपुर ब्लॉक के शारदा पार स्थित गांव सिंघाड़ा टाटरगंज पूरा वन भूमि पर ही बसा हुआ है। यहां तीन साल पहले परियोजना के लिए भूमि भी चयनित हो गई, अनुमति के लिए विभाग ने परिवेश पोर्टल पर भी भूमि अनुमति की मांग की। पिछले तीन सालों से बताते हैं कि केंद्र में वाइल्डलाइफ व स्थानीय स्तर वन विभाग की अनुमति नहीं मिली है। इसके चलते यहां स्वीकृत परियोजना तीन साल से अटकी है।
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सेलहा में वन विभाग से नहीं मिली अनुमति
पूरनपुर ब्लॉक में शारदा सागर से लगे गांव सेलहा में परियोजना शामिल हुए तो तीन साल हो चुके हैं व कुछ स्थानों पर पाइप लाइन भी बिछाई गईं, लेकिन अभी वन विभाग की अनुमति नहीं मिलने के चलते ओवरहेड का निर्माण शुरू नहीं किया गया। इससे अभी तक परियोजना ही नहीं शुरू हो पाई।

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15 गांव में नहीं पहुंचा अमृत पेयजल
अमृत पेयजल योजना के तहत ब्रेक लगी हुई परियोजना से लगभग तीन ग्राम पंचायत के साथ 15 छोटे-मोटे गांव शामिल हैं। इसकी लगभग 10 हजार आबादी अभी भी अमृत पेयजल योजना के लाभ से वंचित है। हालांकि जिले में अन्य कई गांवों में पाइप लाइन डालने का कार्य किया जा रहा है, जिसमें जल्द ही पेयजल मिलेगा।
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जो भी परियोजनाएं वन क्षेत्र में रुकी हुई हैं, उन सभी की अनुमति मांगी गई है। अनुमति मिलते ही ये परियोजनाएं भी पूरी कर ली जाएंगी।
- योगेश कुमार, अधिशासी अभियंता, जल निगम
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