{"_id":"697277fa19bc40195b0e4807","slug":"resorts-and-hotels-located-in-the-eco-sensitive-zone-of-ptr-will-be-inspected-pilibhit-news-c-121-1-pbt1009-152374-2026-01-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pilibhit News: पीटीआर के इको सेंसटिव जोन में बने रिजॉर्ट्स-होटलों की होगी जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pilibhit News: पीटीआर के इको सेंसटिव जोन में बने रिजॉर्ट्स-होटलों की होगी जांच
Fri, 23 Jan 2026 12:48 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Fri, 23 Jan 2026 12:48 AM IST
विज्ञापन
पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के इको सेंसटिव जोन में नियमों को ताक पर रखकर बनाए गए रिजॉर्ट्स और होटलों की अब जांच होगी। हाईकोर्ट के एक वरिष्ठ अधिवक्ता के आवेदन पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की डिवीजन बेंच ने इस मामले को गंभीर मानते हुए तीन सदस्यीय संयुक्त कमेटी का गठन किया है। इसे 10 सप्ताह के भीतर जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। पीटीआर से सटे इको सेंसटिव जोन में रिजॉर्ट-होटल को लेकर हाईकोर्ट के एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने एनजीटी के समक्ष एक मध्यस्थ आवेदन दाखिल कर अवैध निर्माणों पर सवाल उठाए थे।
आवेदन में कहा गया था कि इन रिजॉर्ट्स और होटलों के कारण न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है।
साथ ही सड़कों के निर्माण, बढ़ते प्रदूषण, पेड़ों के कटान और कंक्रीट संरचनाओं से टाइगर रिजर्व के प्राकृतिक संतुलन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। आरोप है कि इनमें से कई निर्माण प्रभावशाली उद्योगपतियों ने नियमों को दरकिनार कर इको सेंसटिव जोन में कराए गए हैं। एनजीटी के चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर डॉ. ए सेंथिल वेल की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच ने संयुक्त कमेटी में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण उत्तर प्रदेश वन विभाग के एक-एक प्रतिनिधि और डीएम पीलीभीत को शामिल किया है। डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि उन्हें अभी इस आदेश की जानकारी नहीं है। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
आवेदन में कहा गया था कि इन रिजॉर्ट्स और होटलों के कारण न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है।
विज्ञापन
साथ ही सड़कों के निर्माण, बढ़ते प्रदूषण, पेड़ों के कटान और कंक्रीट संरचनाओं से टाइगर रिजर्व के प्राकृतिक संतुलन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। आरोप है कि इनमें से कई निर्माण प्रभावशाली उद्योगपतियों ने नियमों को दरकिनार कर इको सेंसटिव जोन में कराए गए हैं। एनजीटी के चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर डॉ. ए सेंथिल वेल की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच ने संयुक्त कमेटी में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण उत्तर प्रदेश वन विभाग के एक-एक प्रतिनिधि और डीएम पीलीभीत को शामिल किया है। डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि उन्हें अभी इस आदेश की जानकारी नहीं है। संवाद
विज्ञापन