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Pilibhit News: अब सीमाओं में नहीं बंधेंगे बाघ-तेंदुए... नेपाल से उत्तराखंड तक बेरोकटोक घूमेंगे

Fri, 08 Sep 2023 11:50 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Updated Fri, 08 Sep 2023 11:50 PM IST
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Now tigers and leopards will not be bound in borders, will roam freely from Nepal to Uttarakhand
जंगल में भ्रमण करता बाघ ।
पीलीभीत। वन्यजीवों की बढ़ती संख्या के बाद आए दिन टाइगर रिजर्व से बाघ और तेंदुए खेत और आबादी क्षेत्र में आ रहे हैं। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में इजाफा हो रहा है। जंगल का दायरा कम पड़ने से वन्यजीवों को जंगल में ही रोकने के लिए टाइगर रिजर्व ने सुरक्षित कॉरिडोर बनाने की रणनीति तय की है। इसमें पास के दुधवा, नेपाल की शुक्ला फांटा सेंक्चुरी और खटीमा की सुरई रेंज को जोड़ा जाएगा। जल्द ही इसे लेकर अन्य प्रभागों के साथ बैठक की जाएगी। कॉरिडोर बनने के बाद बाघों और तेंदुओं का नेपाल से उत्तराखंड तक के जंगल में बेरोकटोक आना-जाना शुरू हो जाएगा।
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व में अभी हाल में हुई गणना के अनुसार बाघों की संख्या में खासी वृद्धि हुई है। यहां पर करीब सौ बाघ मौजूद हैं। बाघों के साथ ही तेंदुआ और अन्य शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या भी बढ़ी है। जानवरों के बढ़ने से टाइगर रिजर्व का जंगल उनके लिए छोटा पड़ने लगा है। ऐसा अधिकारी भी मानते हैं। नए ठौर की तलाश में बाघ और तेंदुए जंगल से निकलकर आबादी और खेतों में आ रहे हैं। ऐसे में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। वन्यजीवों को जंगल में ही रोकना बड़ी चुनौती बन गया है।
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बाघों को जंगल में ही रोकने के लिए वनाधिकारियों ने अब उनके एक प्रभाग से दूसरे प्रभाग के जंगल में भ्रमण की सहूलियत देने की रूपरेखा तय की है। इसके लिए कॉरीडोर तैयार करने की योजना है। कॉरिडोर पास के ही दुधवा की किशनपुर, नेपाल के लग्गाभग्गा क्षेत्र और खटीमा की सुरई रेंज को जोड़कर बनाया जाएगा। इससे बाघों और अन्य वन्यजीवों को जंगल का विस्तृत दायरा भ्रमण के लिए मिल जाएगा। जल्द ही इसके लिए सभी प्रभागों के अलावा अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की जाएगी।
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टाइगर रिजर्व से जुड़ी हैं ये सीमाएं
पीलीभीत टाइगर रिजर्व से सुरही रेंज- तराई पूर्वी डिवीजन उत्तराखंड, लग्गा-बग्गा - शुक्ला फांटा राष्ट्रीय उद्यान (नेपाल) और किशनपुर वन्यजीव अभयारण्य, दुधवा टाइगर रिजर्व की सीमा जुड़ी है। इन्हीं को जोड़कर कॉरिडोर बनाने पर विचार चल रहा है।

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वर्जन
बाघों के साथ ही अन्य वन्यजीवों की संख्या में वृद्धि से दायरा भी कम पड़ने लगा है। ऐसे में आपस में ही एक प्रभाग से दूसरे प्रभाग में भ्रमण के लिए कॉरिडोर बनाने की योजना तय की गई है। इसके लिए उच्चाधिकारियों से भी मंथन चल रहा है। ऐसे में बाघ जंगल से बाहर नहीं निकल सकेंगे।- नवीन खंडेलवाल, डीडी, टाइगर रिजर्व
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