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दो सीएमएस की खींचतान में पिस रहे मरीज
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डॉ. बीएस यादव
- फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। जिला अस्पताल और महिला अस्पताल की सीएमएस की आपसी खींचतान मरीजों पर भारी पड़ रही है। एनेस्थेटिस्ट (बेहोशी देने वाला डॉक्टर) न होने की वजह से जिला अस्पताल में एक अगस्त से ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। जिला अस्पताल से औसतन चार मरीजों को रोज लौटाया जा रहा है। इसी तरह महिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ न होने की वजह से नवजात का इलाज करने वाली एसएनसी यूनिट बंद हो गई है। दोनों सीएमएस अगर एक-एक डॉक्टर एक दूसरे को उपलब्ध करा दें तो सेवाएं सुचारु हो सकती हैं।
महिला अस्पताल में तीन-तीन एनेस्थेटिस्ट हैं लेकिन पुरुष अस्पताल में एक भी नहीं। सीएमओ डॉ. आलोक कुमार ने महिला अस्पताल के एनेस्थेटिस्ट को पुरुष अस्पताल में जरूरत के समय उपलब्ध रहने के आदेश किए थे पर आदेश का पालन नहीं हुआ। इसी तरह से महिला अस्पताल में बीमार नवजात शिशुओं की देखभाल और इलाज के लिए संचालित एसएनसीयू बाल रोग विशेषज्ञ के अभाव में नहीं चल पा रही है। यह स्थिति तब है जब पुरुष अस्पताल में तीन बाल रोग विशेषज्ञ तैनात हैं। महिला अस्पताल की डॉ. अनीता चौरसिया ने सीएमएस डॉ. बीएस यादव से कहा था कि अगर एसएनसीयू संचालित करने के लिए वह बाल रोग विशेषज्ञ उन्हें उपलब्ध करा देते हैं तो वह एनेस्थेटिस्ट को भेज देंगी। दोनों सीएमएस ने एक-दूसरे की बात नहीं मान रहे। जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
‘मुझे मिलाकर जिला अस्पताल में तीन बाल रोग विशेषज्ञ हैं। मेरे सीएमएस बनने के बाद अब दो ही बाल रोग विशेषज्ञ हैं। एक को ओपीडी और दूसरे को इमरजेंसी ड्यूटी पर लगाना पड़ता है क्योंकि इमरजेंसी मेडिकल अफसर के चार पद खाली हैं। इमरजेंसी हर हाल में संचालित करनी है। ऐसे में बाल रोग विशेषज्ञ को कैसे भेजा जाता।’
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- डॉ. बीएस यादव, कार्यवाहक सीएमएस जिला अस्पताल
‘पांच महिला डॉक्टरों के तबादले हुए। तैनाती सिर्फ दो पुरुष डॉक्टरों की गई। बाल रोग विशेषज्ञ न होने से एसएनसीयू बंद हो गई। तीन डॉक्टर कम होने से ओपीडी प्रभावित होने लगी है। एनेस्थीसिया स्पेशलिस्ट को ऑपरेशन ड्यूटी के साथ ओपीडी में बैठना पड़ रहा है। ऐसे में उन्हें कैसे भेजा जा सकता है। अगर वे हमें एक बाल रोग विशेषज्ञ उपलब्ध करा देते हैं तो हम एनेस्थीसिया स्पेशलिस्ट भेज देंगे।’
- डॉ. अनीता चौरसिया, सीएमएस, महिला अस्पताल
ऑपरेशन टेबल से लौटाया गया मरीज
बात 11 अगस्त की है। रामवती नाम की महिला की हड्डी टूट गई थी और आपरेशन होना था। रामवती जिला अस्पताल की ऑपरेशन टेबल पर थी और आर्थोपेडिक सर्जन ने आपरेशन की तैयारी कर ली थी। आर्थोपेडिक के व्यक्तिगत आग्रह पर महिला अस्पताल के एक एनेस्थीसिया स्पेशलिस्ट ने आने का समय दिया था लेकिन वह नहीं आए। इस पर रामवती को वापस किया गया। रामवती ने इसके बाद भी तीन दिन तक इंतजार किया पर आपरेशन नहीं हुआ।
अगस्त में 100 से अधिक मरीज हुए निराश
जिला अस्पताल में जून में 158 और जुलाई में 109 ऑपरेशन हुए। महिला अस्पताल में प्रति माह 25 ऑपरेशन का औसत है। जिला अस्पताल से अगस्त में 100 से अधिक मरीज लौटाए गए। अस्पताल में कोई प्रतीक्षा सूची नहीं बनाई गई है। मरीज निजी अस्पताल जाने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
‘मैंने 17 अगस्त को जारी अपने आदेश में जिला अस्पताल के सीएमएस से कहा था कि एनेस्थीसिया स्पेशलिस्ट न होने से ऑपरेशन बाधित हैं। इसलिए महिला अस्पताल की सीएमएस से समन्वय स्थापित कर डॉक्टर को वहां से बुला लें और मरीजों के आपरेशन शुरू कराएं, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अब अपर निदेशक और संयुक्त निदेशक को अवगत कराएंगे।’
- डॉ. आलोक कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी
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महिला अस्पताल में तीन-तीन एनेस्थेटिस्ट हैं लेकिन पुरुष अस्पताल में एक भी नहीं। सीएमओ डॉ. आलोक कुमार ने महिला अस्पताल के एनेस्थेटिस्ट को पुरुष अस्पताल में जरूरत के समय उपलब्ध रहने के आदेश किए थे पर आदेश का पालन नहीं हुआ। इसी तरह से महिला अस्पताल में बीमार नवजात शिशुओं की देखभाल और इलाज के लिए संचालित एसएनसीयू बाल रोग विशेषज्ञ के अभाव में नहीं चल पा रही है। यह स्थिति तब है जब पुरुष अस्पताल में तीन बाल रोग विशेषज्ञ तैनात हैं। महिला अस्पताल की डॉ. अनीता चौरसिया ने सीएमएस डॉ. बीएस यादव से कहा था कि अगर एसएनसीयू संचालित करने के लिए वह बाल रोग विशेषज्ञ उन्हें उपलब्ध करा देते हैं तो वह एनेस्थेटिस्ट को भेज देंगी। दोनों सीएमएस ने एक-दूसरे की बात नहीं मान रहे। जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
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‘मुझे मिलाकर जिला अस्पताल में तीन बाल रोग विशेषज्ञ हैं। मेरे सीएमएस बनने के बाद अब दो ही बाल रोग विशेषज्ञ हैं। एक को ओपीडी और दूसरे को इमरजेंसी ड्यूटी पर लगाना पड़ता है क्योंकि इमरजेंसी मेडिकल अफसर के चार पद खाली हैं। इमरजेंसी हर हाल में संचालित करनी है। ऐसे में बाल रोग विशेषज्ञ को कैसे भेजा जाता।’
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- डॉ. बीएस यादव, कार्यवाहक सीएमएस जिला अस्पताल
‘पांच महिला डॉक्टरों के तबादले हुए। तैनाती सिर्फ दो पुरुष डॉक्टरों की गई। बाल रोग विशेषज्ञ न होने से एसएनसीयू बंद हो गई। तीन डॉक्टर कम होने से ओपीडी प्रभावित होने लगी है। एनेस्थीसिया स्पेशलिस्ट को ऑपरेशन ड्यूटी के साथ ओपीडी में बैठना पड़ रहा है। ऐसे में उन्हें कैसे भेजा जा सकता है। अगर वे हमें एक बाल रोग विशेषज्ञ उपलब्ध करा देते हैं तो हम एनेस्थीसिया स्पेशलिस्ट भेज देंगे।’
- डॉ. अनीता चौरसिया, सीएमएस, महिला अस्पताल
ऑपरेशन टेबल से लौटाया गया मरीज
बात 11 अगस्त की है। रामवती नाम की महिला की हड्डी टूट गई थी और आपरेशन होना था। रामवती जिला अस्पताल की ऑपरेशन टेबल पर थी और आर्थोपेडिक सर्जन ने आपरेशन की तैयारी कर ली थी। आर्थोपेडिक के व्यक्तिगत आग्रह पर महिला अस्पताल के एक एनेस्थीसिया स्पेशलिस्ट ने आने का समय दिया था लेकिन वह नहीं आए। इस पर रामवती को वापस किया गया। रामवती ने इसके बाद भी तीन दिन तक इंतजार किया पर आपरेशन नहीं हुआ।
अगस्त में 100 से अधिक मरीज हुए निराश
जिला अस्पताल में जून में 158 और जुलाई में 109 ऑपरेशन हुए। महिला अस्पताल में प्रति माह 25 ऑपरेशन का औसत है। जिला अस्पताल से अगस्त में 100 से अधिक मरीज लौटाए गए। अस्पताल में कोई प्रतीक्षा सूची नहीं बनाई गई है। मरीज निजी अस्पताल जाने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
‘मैंने 17 अगस्त को जारी अपने आदेश में जिला अस्पताल के सीएमएस से कहा था कि एनेस्थीसिया स्पेशलिस्ट न होने से ऑपरेशन बाधित हैं। इसलिए महिला अस्पताल की सीएमएस से समन्वय स्थापित कर डॉक्टर को वहां से बुला लें और मरीजों के आपरेशन शुरू कराएं, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अब अपर निदेशक और संयुक्त निदेशक को अवगत कराएंगे।’
- डॉ. आलोक कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी

ॉ. अनीता चौरसिया- फोटो : PILIBHIT