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धान की तौल न होने से गुस्साए किसानों का मंडी में हंगामा
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नवीन मंडी समिति में धान की तौल का इंतजार करते किसान।
- फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। धान खरीद में हावी माफिया और बिचौलिया राज के सामने प्रशासन की सख्ती भी बेअसर साबित हुई। एक दिन पहले किसानों से धान न खरीदने पर डीएम ने डिप्टी आरएमओ की फटकार लगाकर कार्रवाई की चेतावनी दी थी मगर उसके बाद भी धान खरीद से जुड़े अधिकारियों की जमाखोरी पर मौन स्वीकृति से किसानों को राहत नहीं मिली। मंगलवार को भी क्रय केंद्रों पर नमी अधिक होने या पंजीकरण कराने का बहाना बनाकर किसानों को लौटाया जाता रहा। क्रय केंद्रों पर धान न बिकने से गुस्साए किसानों से हंगामा कर दिया। आढ़तिए, क्रय केंद्र प्रभारी और अफसरों की घंटे भर बहस चली। उसके बाद जैसे-तैसे मामला शांत हो सका। किसानों का धान जहां भी पड़ा था, वहां कर्मचारियों ने पहुंचकर उनका पंजीकरण कराया। अधिक नमी अधिक वाले धान की खरीद के लिए व्यापारी बुलाकर नीलामी की बोली लगवाई गई। मंडी में पूरे दिन हंगामा मचा रहा।
सरकारी क्रय केंद्रों पर धान खरीद एक अक्तूबर से शुरू हुई थी मगरा माफिया के हावी होने के चलते किसानों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। किसानों का धान नमी के नाम पर लौटाकर आढ़तों पर भेजा जा रहा है। किसान प्राइवेट आढ़तियों को 1150 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल अपना धान बेचने को मजबूर हैं। एक दिन पूर्व डीएम ने निरीक्षण कर गड़बड़ी मिलने पर चार सेंटर प्रभारियों को निलंबित कर दिया था मगर दूसरे दिन मंगलवार को मंडी समिति में धान पर उसका कुछ भी असर नहीं दिखा। धान लेकर मंडी आए किसान घंटों उसे बेचने के लिए परेशान हुए। पंजीकरण न होने की वजह से धान की तौल रुकी रही। वहीं, पंजीकरण वाले किसानों को धान में कमी बताकर लौटाया जाता रहा। किसानों का हंगामा बढने पर सिटी मजिस्ट्रेट अरुण कुमार सिंह, डिप्टी आरएमओ डॉ. अविनाश झा मंडी समिति पहुंचे मगर घंटों कोई नतीजा नहीं निकला।
किसानों ने आरोप लगाया कि वह तीन-चार दिन अपना धान लेकर मंडी में हैं। सरकारी सेंटरों पर धान बिक नहीं रहा, वह कहां जाएं। लंबी बहस के बाद अधिकारियों ने धान के ढेर के पास ही किसानों का पंजीकरण कराते हुए 17 प्रतिशत नमी के मानक वाला धान सरकारी केंद्रों पर खरीदवाने का भरोसा दिलाया। अधिक नमी वाले धान को निरस्त करने में पेंच फंस गया। फिर नमी वाले धान को भी बिकवाने का तरीका तलाशा गया। राइस मिलर्स बुलाकर मंडी में ही बोली लगवाने पर किसानों का हंगामा शांत हो सका।
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करोड़ों का खेल... अफसर जानबूझकर लापरवाह
सरकारी धान खरीद में अधिकांश क्रय केंद्र मिल मालिकों ने सोसायटी बनाकर ले रखे हैं। धान खरीद से जुड़े अफसरों की उनसे पूरी सांठगांठ है। इसलिए तहसीलों से लेकर धान खरीद से जुड़े अफसर निरीक्षण के नाम पर केवल खानापूरी करने में लगे हैं। धान खरीद से जुड़े एक अफसर अनुसार हर साल की सीजन में धान खरीद से लेकर उसकी तुलाई, उतराई, ढुलाई में करोड़ों रुपये का खेल है। उसमें सबका हिस्सा पहले से ही तय है। इसी का नतीजा है कि एक दिन पूर्व निरीक्षण के दौरान डीएम ने जिस धान के ढेरों को तौल कराने के निर्देश दिए थे, वह ढेर दूसरे दिन मंगलवार को भी लगे रहे।
भाकियू नेता से भिड़ गए किसान
धान की तौल न होने पर किसान आक्रोशित थे। भाकियू नेता भी अधिकारियों से मंडी सचिव दफ्तर में वार्ता कर रहे थे। भाकियू कार्यकर्ता से किसानों की तीखी बहस हो गई। दरअसल, भाकियू कार्यकर्ता अफसरों की तरफदारी करने लगे तो किसानों को गुस्सा आ गया। भाकियू कार्यकर्ता ने यहां तक कह दिया कि जिन्हें वोट देते हो, उन्हें बुलाओ।
किसानों की पुलिस से नोकझोंक
किसान गुस्साकर मंडी सचिव कार्यालय में पहुंच रहे थे। धान की तौल न होने पर जाम लगाकर प्रदर्शन करने की भी चेतावनी दी जा रही थी। पुलिस बल भी बुला लिया गया। इंस्पेक्टर सुनगढ़ी अतर सिंह महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों को लेकर मंडी सचिव कार्यालय के बवहर तैनात रहे। किसानों को रोकने पर पुलिस से भी नोकझोंक हुई।
आढ़ती बोले- हम तो सिर्फ कमीशन पर बिकवाते हैं
आढ़तों पर औने-पौने दामों में धान खरीदने की बात पर आढ़ती भी गुस्से में थे। मंडी सचिव विजिन कुमार ने यह शब्द किसानों को शांत कराते हुए कह दिए थे। इस पर आढ़तियों ने नाराजगी जताते कहा कि वह सिर्फ कमीशन एजेंट हैं। कमीशन लेकर धान बिकवाते हैं। सीधे धान की खरीद नहीं करते। डेढ़ प्रतिशत कमीशन पर काम होता है। उनकी कोशिश है कि किसान को बेहतर दाम मिले।
बोले किसान- ऐसे तो मंडी में ही सड़ जाएगा धान
96 क्विंटल धान लेकर दो दिन पहले मंडी आया था। अभी तक धान की तौल नहीं हुई। पंजीकरण नहीं होने की बात कही गई। धान का ढेर लगा है। जिस तरह से काम हो रहा है, उसमें तो धान यहीं सड़ जाएगा। साल भर की मेहनत दलाल और बिचौलिये खा जाएंगे। - पवन कुमार, किसान तिलहर
पहले पंजीकरण का बहाना था, अब बता दिया कि धान खराब है। रविवार की रात से मंडी में हूं। धान की तौल नहीं हुई। पहले पंजीकरण के नाम पर टरकाया। पंजीकरण होने के बाद धान नमी में फेल कर दिया। बोले- पंजीकरण निरस्त कर देंगे। कोई सुनने वाला नहीं है। - बबलू, किसान आराजी बौरख
90 क्विंटल धान लेकर सोमवार तड़के मंडी आ गया था। मानक में होने पर भी धान की तौल नहीं की गई। धान कंबाइन से काटकर लाया हूं। अगर दो चार दिन ऐसे ही रहा तो सड़ने में देर नहीं लगेगी। अफसर कहते हैं सबकी तौल होगी, मगर कब होगी, यह कोई नहीं बताता। - होरीलाल, किसान आराजी बौरख
दो दिन पहले 60 क्विंटल धान लेकर आया हूं। किसी ने कोई सुध नहीं ली। धान मंडी में ही काला पड़ने लगा है। अगर यही हाल रहा तो धान कम दामों में भी बिकने लायक नहीं रहेगा। कहीं कोई सुनवाई नहीं है। सब एक दूसरे से मिले हुए हैं। कम दाम पर बेचने को मजबूर कर रहे हैं। - मुख्तार हुसैन, किसान न्यूरिया हुसैनपुर
किसानों का पंजीकरण न होने की धान बेचने में दिक्कत आई। संज्ञान में आते ही किसानों से कागजात लेकर मंडी में ही पंजीकरण करने के निर्देश दिए गए। कुछ किसान पंजीकरण कराना ही नहीं चाहते थे। पंजीकरण के लिए अब किसान को तहसील जाने की भी जरूरत नहीं है। सेंटर पर ही पंजीकरण करा सकते हैं। केंद्र प्रभारियों को भी इस बारे में निर्देशित कर दिया गया है। - पुलकित खरे, डीएम
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सरकारी क्रय केंद्रों पर धान खरीद एक अक्तूबर से शुरू हुई थी मगरा माफिया के हावी होने के चलते किसानों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। किसानों का धान नमी के नाम पर लौटाकर आढ़तों पर भेजा जा रहा है। किसान प्राइवेट आढ़तियों को 1150 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल अपना धान बेचने को मजबूर हैं। एक दिन पूर्व डीएम ने निरीक्षण कर गड़बड़ी मिलने पर चार सेंटर प्रभारियों को निलंबित कर दिया था मगर दूसरे दिन मंगलवार को मंडी समिति में धान पर उसका कुछ भी असर नहीं दिखा। धान लेकर मंडी आए किसान घंटों उसे बेचने के लिए परेशान हुए। पंजीकरण न होने की वजह से धान की तौल रुकी रही। वहीं, पंजीकरण वाले किसानों को धान में कमी बताकर लौटाया जाता रहा। किसानों का हंगामा बढने पर सिटी मजिस्ट्रेट अरुण कुमार सिंह, डिप्टी आरएमओ डॉ. अविनाश झा मंडी समिति पहुंचे मगर घंटों कोई नतीजा नहीं निकला।
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किसानों ने आरोप लगाया कि वह तीन-चार दिन अपना धान लेकर मंडी में हैं। सरकारी सेंटरों पर धान बिक नहीं रहा, वह कहां जाएं। लंबी बहस के बाद अधिकारियों ने धान के ढेर के पास ही किसानों का पंजीकरण कराते हुए 17 प्रतिशत नमी के मानक वाला धान सरकारी केंद्रों पर खरीदवाने का भरोसा दिलाया। अधिक नमी वाले धान को निरस्त करने में पेंच फंस गया। फिर नमी वाले धान को भी बिकवाने का तरीका तलाशा गया। राइस मिलर्स बुलाकर मंडी में ही बोली लगवाने पर किसानों का हंगामा शांत हो सका।
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करोड़ों का खेल... अफसर जानबूझकर लापरवाह
सरकारी धान खरीद में अधिकांश क्रय केंद्र मिल मालिकों ने सोसायटी बनाकर ले रखे हैं। धान खरीद से जुड़े अफसरों की उनसे पूरी सांठगांठ है। इसलिए तहसीलों से लेकर धान खरीद से जुड़े अफसर निरीक्षण के नाम पर केवल खानापूरी करने में लगे हैं। धान खरीद से जुड़े एक अफसर अनुसार हर साल की सीजन में धान खरीद से लेकर उसकी तुलाई, उतराई, ढुलाई में करोड़ों रुपये का खेल है। उसमें सबका हिस्सा पहले से ही तय है। इसी का नतीजा है कि एक दिन पूर्व निरीक्षण के दौरान डीएम ने जिस धान के ढेरों को तौल कराने के निर्देश दिए थे, वह ढेर दूसरे दिन मंगलवार को भी लगे रहे।
भाकियू नेता से भिड़ गए किसान
धान की तौल न होने पर किसान आक्रोशित थे। भाकियू नेता भी अधिकारियों से मंडी सचिव दफ्तर में वार्ता कर रहे थे। भाकियू कार्यकर्ता से किसानों की तीखी बहस हो गई। दरअसल, भाकियू कार्यकर्ता अफसरों की तरफदारी करने लगे तो किसानों को गुस्सा आ गया। भाकियू कार्यकर्ता ने यहां तक कह दिया कि जिन्हें वोट देते हो, उन्हें बुलाओ।
किसानों की पुलिस से नोकझोंक
किसान गुस्साकर मंडी सचिव कार्यालय में पहुंच रहे थे। धान की तौल न होने पर जाम लगाकर प्रदर्शन करने की भी चेतावनी दी जा रही थी। पुलिस बल भी बुला लिया गया। इंस्पेक्टर सुनगढ़ी अतर सिंह महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों को लेकर मंडी सचिव कार्यालय के बवहर तैनात रहे। किसानों को रोकने पर पुलिस से भी नोकझोंक हुई।
आढ़ती बोले- हम तो सिर्फ कमीशन पर बिकवाते हैं
आढ़तों पर औने-पौने दामों में धान खरीदने की बात पर आढ़ती भी गुस्से में थे। मंडी सचिव विजिन कुमार ने यह शब्द किसानों को शांत कराते हुए कह दिए थे। इस पर आढ़तियों ने नाराजगी जताते कहा कि वह सिर्फ कमीशन एजेंट हैं। कमीशन लेकर धान बिकवाते हैं। सीधे धान की खरीद नहीं करते। डेढ़ प्रतिशत कमीशन पर काम होता है। उनकी कोशिश है कि किसान को बेहतर दाम मिले।
बोले किसान- ऐसे तो मंडी में ही सड़ जाएगा धान
96 क्विंटल धान लेकर दो दिन पहले मंडी आया था। अभी तक धान की तौल नहीं हुई। पंजीकरण नहीं होने की बात कही गई। धान का ढेर लगा है। जिस तरह से काम हो रहा है, उसमें तो धान यहीं सड़ जाएगा। साल भर की मेहनत दलाल और बिचौलिये खा जाएंगे। - पवन कुमार, किसान तिलहर
पहले पंजीकरण का बहाना था, अब बता दिया कि धान खराब है। रविवार की रात से मंडी में हूं। धान की तौल नहीं हुई। पहले पंजीकरण के नाम पर टरकाया। पंजीकरण होने के बाद धान नमी में फेल कर दिया। बोले- पंजीकरण निरस्त कर देंगे। कोई सुनने वाला नहीं है। - बबलू, किसान आराजी बौरख
90 क्विंटल धान लेकर सोमवार तड़के मंडी आ गया था। मानक में होने पर भी धान की तौल नहीं की गई। धान कंबाइन से काटकर लाया हूं। अगर दो चार दिन ऐसे ही रहा तो सड़ने में देर नहीं लगेगी। अफसर कहते हैं सबकी तौल होगी, मगर कब होगी, यह कोई नहीं बताता। - होरीलाल, किसान आराजी बौरख
दो दिन पहले 60 क्विंटल धान लेकर आया हूं। किसी ने कोई सुध नहीं ली। धान मंडी में ही काला पड़ने लगा है। अगर यही हाल रहा तो धान कम दामों में भी बिकने लायक नहीं रहेगा। कहीं कोई सुनवाई नहीं है। सब एक दूसरे से मिले हुए हैं। कम दाम पर बेचने को मजबूर कर रहे हैं। - मुख्तार हुसैन, किसान न्यूरिया हुसैनपुर
किसानों का पंजीकरण न होने की धान बेचने में दिक्कत आई। संज्ञान में आते ही किसानों से कागजात लेकर मंडी में ही पंजीकरण करने के निर्देश दिए गए। कुछ किसान पंजीकरण कराना ही नहीं चाहते थे। पंजीकरण के लिए अब किसान को तहसील जाने की भी जरूरत नहीं है। सेंटर पर ही पंजीकरण करा सकते हैं। केंद्र प्रभारियों को भी इस बारे में निर्देशित कर दिया गया है। - पुलकित खरे, डीएम

नवीन मंडी समिति में लगे धान के ढेर।- फोटो : PILIBHIT

मंडी सचिव कार्यालय के बाहर जमा किसानों की भीड़ और शांत कराने को खड़ी पुलिस।- फोटो : PILIBHIT

मंडी समिति कार्यालय में सिटी मजिस्ट्रेट को धान चेक कराता किसान।- फोटो : PILIBHIT