पीलीभीत: बाघ के हमले में किसान की मौत पर शव रखकर किया प्रदर्शन, ग्रामीणों ने वन दरोगा की वर्दी फाड़ी
पीलीभीत के हजारा थाना क्षेत्र में शुक्रवार को बाघ के हमले में 60 वर्षीय किसान मुंशी प्रसाद की मौत हो गई। आक्रोशित ग्रामीणों ने शव रखकर गांव के तिराहे पर धरना प्रदर्शन किया। करीब 18 घंटे तक जारी इस धरने में शनिवार को वन विभाग के खिलाफ नारेबाजी हुई। गुस्साए ग्रामीणों ने वन दरोगा की वर्दी फाड़ दी।
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पीलीभीत के हजारा क्षेत्र के शांतिनगर गांव में बाघ के हमले में किसान मुंशी प्रसाद की मौत के बाद ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा। शुक्रवार रात से शनिवार दोपहर तक करीब 18 घंटे ग्रामीण शव को गांव के तिराहे पर रखकर जाम लगा दिया। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीण वन विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।
आक्रोशित ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि वनकर्मियों को मौके पर बुलाया जाए, खून का बदला खून से लिया जाएगा। माहौल तनावपूर्ण होने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को भी समझाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। शनिवार को एसडीओ (वन) और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में आक्रोशित लोगों ने वन दरोगा राजेश कुमार से अभद्रता और खींचतान कर उनकी वर्दी फाड़ दी। पुलिस ने किसी तरह वन दरोगा को भीड़ से बचाया। काफी मशक्कत के बाद ग्रामीण पीछे हट गए।
शांतिनगर निवासी किसान मुंशी प्रसाद पर शुक्रवार शाम गन्ने के खेत में छिपे बाघ ने हमला कर दिया। बाघ उन्हें खींचकर ईख में ले गया। शोर सुनकर पहुंचे ग्रामीणों ने किसी तरह उन्हें बाहर निकाला और उपचार के लिए ले गए, लेकिन रास्ते में उनकी मौत हो गई। घटना के बाद ग्रामीणों ने शव तिराहे पर रखकर जाम लगा दिया।
आधी रात एसडीएम मयंक गोस्वामी टीम के साथ धरना स्थल पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे संपूर्णानगर रेंजर और वनकर्मियों को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे। शनिवार को सीओ विधि भूषण मौर्य, पूरनपुर कोतवाल और निघासन के एसडीओ (वन) मनोज तिवारी टीम के साथ धरनास्थल पर पहुंचे। इसी दौरान वन दरोगा राजेश कुमार के साथ खींचतान और अभद्रता की घटना हुई।
10 लाख रुपये मुआवजा, बाघ पकड़ने समेत छह मांगों पर आश्वासन के बाद माने ग्रामीण
शनिवार सुबह से ही अधिकारी धरने पर बैठे ग्रामीणों को समझाने पहुंचे, लेकिन ग्रामीण किसी की मानने को तैयार नहीं हुए। वन विभाग के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश साफ दिखा। उनका कहना था कि वन विभाग की लापरवाही से किसान की जान गई। एसडीएम मयंक गोस्वामी ने ग्रामीणों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया। इसके बाद मृतक के पुत्र संजय कुमार ने संपूर्णानगर रेंजर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए तहरीर दी।
वहीं, 10 लाख रुपये मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को नौकरी, आवास, बाघ को पकड़ने और वन्यजीवों की आवाजाही रोकने के लिए शासन स्तर पर प्रस्ताव भेजने की मांग की। एसडीएम ने आवास स्वीकृत कराने और बाघ को पकड़वाने का आश्वासन दिया। वन विभाग के अधिकारियों ने पांच लाख रुपये की सहायता राशि दिलाने और परिवार के एक सदस्य को अस्थायी नौकरी दिलाने का भरोसा दिया। इसके बाद करीब 18 घंटे बाद ग्रामीणों ने धरना समाप्त किया। इसके बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा जा सका।
बाघ को पकड़ने के लिए घटनास्थल के समीप वन विभाग ने दो पिंजरे लगाए हैं। शनिवार को ड्रोन कैमरे से भी बाघ की तलाश कराई गई। संपूर्णानगर रेंजर ललित कुमार ने बताया कि घटनास्थल के आसपास कैमरे लगाए जाएंगे। ड्रोन से बाघ की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। बाघ को पकड़ने के लिए अनुमति मांगी गई है।
ग्रामीणों का आरोप- कई बार दी सूचना, फिर भी बाघ पकड़ने की नहीं हुई कोशिश
शांतिनगर में वृद्ध किसान मुंशी प्रसाद की बाघ के हमले में मौत के बाद ग्रामीणों का गुस्सा वन विभाग के खिलाफ फूट पड़ा। ग्रामीणों का आरोप है कि बाघ पिछले करीब तीन माह से इलाके में लगातार चहलकदमी कर रहा था। खेतों के आसपास ही नहीं, बल्कि आबादी के नजदीक भी उसकी मौजूदगी कई बार देखी गई। ग्रामीणों ने इसकी जानकारी वन विभाग को दी, लेकिन अधिकारियों ने खतरे को गंभीरता से नहीं लिया।
ग्रामीणों के मुताबिक, बाघ की मौजूदगी के चलते खेतों में जाने वाले लोगों में पहले से ही दहशत थी। बाघ कई बार मवेशियों और अन्य जानवरों को भी अपना शिकार बना चुका था। इसके बाद भी वन विभाग ने बाघ को पकड़ने के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं की। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते बाघ को पकड़ लिया जाता तो शुक्रवार को मुंशी प्रसाद की जान नहीं जाती।
एसडीएम मयंक गोस्वामी ने बताया कि पांच लाख रुपये का मुआवजा दिलाने, आवास नियमानुसार स्वीकृत कराने, परिवार के एक सदस्य को वन विभाग में अस्थायी नौकरी दिलाने, बाघ को पकड़वाने के आश्वासन पर प्रदर्शनकारी मान गए। वन विभाग के अफसरों से अनुमति लेकर बाघ को पकड़वाने को कहा गया है।
नार्थ खीरी वन प्रभाग के एसडीओ मनोज तिवारी ने बताया कि परिजन की मांगों को सुना गया। उन्हें नियमानुसार अन्य विभागों के माध्यम से पूरा कराया जाएगा। विभागीय स्तर पर मुआवजे की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी। बाघ को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।