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नीचे विद्या अर्जन, ऊपर नाचती मौत
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केस एक
स्कूल परिसर में ही लगा ट्रांसफार्मर
अमरिया ब्लाक के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिरसा के परिसर में ही बिजली ट्रांसफार्मर लगा हुआ है। इस विद्यालय में करीब 100 से अधिक बच्चे पढ़ते हैं। हेडमास्टर फरीद अहमद बताते हैं कि उनका अधिकतर समय बच्चों को ट्रांसफार्मर से दूर रखने में गुजर जाता है।
केस दो
यहां तो हाईटेंशन लाइन समेत तारों की जखीरा
पीलीभीत। यह तो तो सिर्फ बानगी भर है। यदि पूरे जिले में देखा जाए तो यहां 67 परिषदीय स्कूल ऐसे हैं जिनमें या तो बिजली के ट्रांसफार्मर रखे हुए हैं या फिर हाईटेंशन लाइन के अलावा अन्य बिजली लाइनें ऊपर से गुजरी रही हैं। प्रदेश सरकार ने विद्यालयों के आसपास से गुजरी विद्युत लाइनों को शिफ्ट करने का आदेश दिया था। बीते जुलाई में जारी किए गए निर्देशों के अनुपालन में विभागीय अधिकारियों ने क्षेत्र के ऐसे विद्यालयों का सर्वे करके रिपोर्ट पावर कॉरपोरेशन को भेज दी, लेकिन अब बजट के इंतजार में मामला अटका हुआ है।
जिले में 67 परिषदीय स्कूल हैं, जहां पर पढ़ने वाले नौनिहालों के ऊपर हर समय हाईवोल्टेज करंट का खतरा बना रहता है। दो दशकों पुरानी विद्युत तारें आपूर्ति के दौरान कब टूटकर जमीन पर आ गिरें, कोई भरोसा नहीं रहता है। स्कूली बच्चों को जोखिम के साथ पढ़ाई करनी होती है। हालांकि इन स्कूलों में अभी कोई बड़ा हादसा तो नहीं हुआ है, लेकिन आसपास क्षेत्र में करंट दौड़ने की बातें सामने आ चुकी हैं। अभिभावकों की शिकायत के बाद स्कूलों के शिक्षकों ने अपने विभागीय अफसरों को मामले की जानकारी दी, लेकिन अब तक विद्युत लाइनें हटाई नहीं गई हैं। हालांकि अब शासन के निर्देश पर स्कूलों के ऊपर से तारों को हटाने की कवायद शुरू हुई है। विभाग द्वारा सर्वे कर इसकी सूची पावर कॉरपोरेशन के अधिकारियों को दे दी गई, लेकिन एस्टीमेट के बाद बजट न मिलने के चलते मामला अधर में लटका हुआ है। फिलहाल अब तक यह कवायद सिर्फ कागजों तक ही सीमित है।
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शासन के निर्देेश पर ऐसे परिषदीय स्कूलों का सर्वे कराया गया था। सर्वे में 67 विद्यालय चिहिन्त किए गए हैं। शासन के निर्देशानुसार इसकी सूची पावर कॉरपोरेशन को सौंप दी गई है।
-देवेंद्र स्वरूप, बीएसए
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स्कूल परिसर में ही लगा ट्रांसफार्मर
अमरिया ब्लाक के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिरसा के परिसर में ही बिजली ट्रांसफार्मर लगा हुआ है। इस विद्यालय में करीब 100 से अधिक बच्चे पढ़ते हैं। हेडमास्टर फरीद अहमद बताते हैं कि उनका अधिकतर समय बच्चों को ट्रांसफार्मर से दूर रखने में गुजर जाता है।
केस दो
यहां तो हाईटेंशन लाइन समेत तारों की जखीरा
पीलीभीत। यह तो तो सिर्फ बानगी भर है। यदि पूरे जिले में देखा जाए तो यहां 67 परिषदीय स्कूल ऐसे हैं जिनमें या तो बिजली के ट्रांसफार्मर रखे हुए हैं या फिर हाईटेंशन लाइन के अलावा अन्य बिजली लाइनें ऊपर से गुजरी रही हैं। प्रदेश सरकार ने विद्यालयों के आसपास से गुजरी विद्युत लाइनों को शिफ्ट करने का आदेश दिया था। बीते जुलाई में जारी किए गए निर्देशों के अनुपालन में विभागीय अधिकारियों ने क्षेत्र के ऐसे विद्यालयों का सर्वे करके रिपोर्ट पावर कॉरपोरेशन को भेज दी, लेकिन अब बजट के इंतजार में मामला अटका हुआ है।
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जिले में 67 परिषदीय स्कूल हैं, जहां पर पढ़ने वाले नौनिहालों के ऊपर हर समय हाईवोल्टेज करंट का खतरा बना रहता है। दो दशकों पुरानी विद्युत तारें आपूर्ति के दौरान कब टूटकर जमीन पर आ गिरें, कोई भरोसा नहीं रहता है। स्कूली बच्चों को जोखिम के साथ पढ़ाई करनी होती है। हालांकि इन स्कूलों में अभी कोई बड़ा हादसा तो नहीं हुआ है, लेकिन आसपास क्षेत्र में करंट दौड़ने की बातें सामने आ चुकी हैं। अभिभावकों की शिकायत के बाद स्कूलों के शिक्षकों ने अपने विभागीय अफसरों को मामले की जानकारी दी, लेकिन अब तक विद्युत लाइनें हटाई नहीं गई हैं। हालांकि अब शासन के निर्देश पर स्कूलों के ऊपर से तारों को हटाने की कवायद शुरू हुई है। विभाग द्वारा सर्वे कर इसकी सूची पावर कॉरपोरेशन के अधिकारियों को दे दी गई, लेकिन एस्टीमेट के बाद बजट न मिलने के चलते मामला अधर में लटका हुआ है। फिलहाल अब तक यह कवायद सिर्फ कागजों तक ही सीमित है।
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शासन के निर्देेश पर ऐसे परिषदीय स्कूलों का सर्वे कराया गया था। सर्वे में 67 विद्यालय चिहिन्त किए गए हैं। शासन के निर्देशानुसार इसकी सूची पावर कॉरपोरेशन को सौंप दी गई है।
-देवेंद्र स्वरूप, बीएसए