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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   Two soldiers of the district Having killed the animal smuggler

जिले के दो सिपाहियों की जान ले चुके पशु तस्कर

Fri, 11 Sep 2015 12:04 AM IST
Pilibhit
Pilibhit Updated Fri, 11 Sep 2015 12:04 AM IST
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बरेली के फरीदपुर में दरोगा मनोज मिश्रा की गोली मारकर की गई हत्या से तीन साल पहले पशु तस्करों ने पीलीभीत शहर कोतवाली के दो जांबाज सिपाहियों की जान ले ली थी। पुलिस महकमा खाकी पर हमले होने के बाद भी पशु तस्करी पर अंकुश नहीं लगा पा रहा है। जिले से भारी पैमाने पर सफेदपोश नेताओं के इशारे पर पशुओं की तस्करी आज भी जारी है।
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बुधवार की रात पशु तस्करों ने बरेली के फरीदपुर थाने में तैनात दरोगा मनोज मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इससे पहले पशु तस्कर पीलीभीत में दो सिपाहियों की जान ले चुके हैं। 21 फरवरी 12 को शहर की सिविल लाइन पुलिस चौकी के दरोगा महेश शर्मा, सिपाही गजराज सिंह, प्रशिक्षु अंकित कुमार शिवाच और होमगार्ड धर्मपाल के साथ पुलिस जिप्सी से रात गश्त पर थे। जिप्सी सिपाही गजराज चला रहा था। इसी बीच मुखबिर ने ट्रक में प्रतिबंधित पशु आने की सूचना दी थी। सूचना पर टीम ने हरिद्वार नेशनल हाइवे पर जहॉनाबाद रेलवे क्रासिंग के पास जिप्सी खड़ी कर दी। दरोगा सड़क पर खड़े होकर ट्रक का इंतजार कर रहा था। जबकि दोनों सिपाही व एक होमगार्ड जिप्सी में बैठे थे। इसी बीच रिछा की तरफ जा रहे ट्रक ने जिप्सी में टक्कर मार दी थी। इससे ट्रक समेत जिप्सी खड्ड में जा गिरी। इस हादसे में थाना गुन्नौर के गांव रजवाना निवासी सिपाही गजराज, जिला भीमनगर थाना जानमठ के गांव सोनजनी निवासी रिक्रूट अंकित कुमार शिवाच की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि होमगार्ड धर्मपाल निवासी परतापुर थाना बरखेड़ा जिला पीलीभीत गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद कुछ दिनों के लिए पशु तस्करी पर अंकुश लग गया था, लेकिन मामला ठंडा पड़ते ही दोबारा पशु तस्करी जोरों पग शुरू हो गई। पशु तस्करों ने करीब साल भर पहले घेराबंदी करने पर तत्कालीन एसओ सत्येंद्र यादव की टीम पर गोली चलाई थी और भाग निकले थे।
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छह महीने पहले पीछा कर रही गजरौला पुलिस की जीप में टक्कर मार दी थी। हादसे में जीप पलटने से बाल-बाल बच गई थी। खाकी पर लगातार हो रहे हमलों के बाद भी महकमा गंभीर नहीं हुआ। जहॉनाबाद में भी पुलिस टीम पर तीन-चार बार हमले हो चुके हैं। पशु तस्करी रोकने के पुलिस की रणनीति भी सफेदपोश नेताओं और कुछ महकमे के सिपाहियों की तस्करों से मिलीभगत के आगे बौनी साबित हुई। फरीदपुर के दरोगा की हत्या के बाद पुलिसकर्मियों में रोष है। उनमें जांबाज साथी के दुनिया से विदा होने का गम भी है।
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