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लॉकडाउन में अब तक 40 प्रतिशत ही हो सकी गेहूं खरीद
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पीलीभीत। कोरोना वायरस और मौसम की मार का असर एक बार फिर किसानों पर पड़ा। सरकारी गेहूं खरीद में इसका पूरा फायदा बिचौलिये और माफिया ने उठाया। लॉकडाउन में माफिया ने किसानों से सस्ते रेट में ही अधिकतर गेहूं की खरीद कर डाली। इसके चलते 28 दिन बीतने के बाद भी आठ एजेंसियों के 127 क्रय केंद्रों पर अब तक मात्र 8493 किसानों का मात्र 70 हजार 494 मीट्रिक टन गेहूं ही खरीद पाया है। ऐसे में शासन से निर्धारित 1.79 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा हो पाना मुश्किल है।
शासन के निर्देशानुसार 15 अप्रैल से गेहूं खरीद शुरू हो सकी। हालांकि यह एक अप्रैल से शुरू होनी थी। 28 दिन बीतने के बाद भी गेहूं खरीद का काम तेजी से नहीं पकड़ सका है। इसकी एक वजह तो कोरोना का लॉकडाउन है और बेमौसम बारिश है। वहीं गेहूं की कमी खरीद की दूसरी वजह हर बार की तरह इस बार भी बिचौलियों का कम कीमत पर गेहूं खरीदना है। लॉकडाउन का फायदा उठाकर बिचौलियों और माफिया ने गेहूं की खरीद पहले ही कर डाली। खाद्य एवं विपणन विभाग के मुताबिक अब तक खाद्य विभाग, पीसीएफ, कर्मचारी कल्याण निगम, भारतीय खाद्य निगम समेत सभी एजेंसियों के 127 क्रय केंद्रों पर सोमवार तक 70494.1 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की जा चुकी है। ऐसे में सरकार द्वारा तय लक्ष्य 1.17 लाख मीट्रिक टन के सापेक्ष मात्र 40 प्रतिशत ही सरकारी गेहूं की खरीद हुई। हालांकि खाद्य विभाग के अफसर अब भी क्रय लक्ष्य पूरा होने के दावे कर रहे हैं। गत वर्ष इस समय तक 106021 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो गई थी। इस बार एजेंसियां अपने पुराने आंकड़े को भी नहीं छू पा रही हैं। धीमी गति से हो रही गेहूं खरीद के पीछे कोरोना और मौसम खराबी की वजह बताकर अधिकारी अपना पल्ला झाड़ रहे हैं, जबकि हकीकत सब जानते हैं। इस बार लॉकडाउन के चलते अधिकतर किसान अपने गेहूं की बिक्री के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन नहीं करा सके थे। इन सबका गेहूं बिचौलिये और दलालों ने कम रेट पर खरीदकर क्रय एजेंसियों को सप्लाई कर दिया। अब कुल मिलाकर गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा होने की संभावनाएं दिनों दिन क्षीण होती जा रही हैं।
127 क्रय केंद्रों पर खरीद हो रही है। लॉकडाउन के चलते किसानों के पंजीकरण नहीं हो सके। किसानों को बेमौसम बारिश की मार भी झेलनी पड़ी। फिलहाल क्रय केंद्र प्रभारियों को गेहूं खरीद तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
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डॉ. अविनाश कुमार झा, डिप्टी आरएमओ
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शासन के निर्देशानुसार 15 अप्रैल से गेहूं खरीद शुरू हो सकी। हालांकि यह एक अप्रैल से शुरू होनी थी। 28 दिन बीतने के बाद भी गेहूं खरीद का काम तेजी से नहीं पकड़ सका है। इसकी एक वजह तो कोरोना का लॉकडाउन है और बेमौसम बारिश है। वहीं गेहूं की कमी खरीद की दूसरी वजह हर बार की तरह इस बार भी बिचौलियों का कम कीमत पर गेहूं खरीदना है। लॉकडाउन का फायदा उठाकर बिचौलियों और माफिया ने गेहूं की खरीद पहले ही कर डाली। खाद्य एवं विपणन विभाग के मुताबिक अब तक खाद्य विभाग, पीसीएफ, कर्मचारी कल्याण निगम, भारतीय खाद्य निगम समेत सभी एजेंसियों के 127 क्रय केंद्रों पर सोमवार तक 70494.1 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की जा चुकी है। ऐसे में सरकार द्वारा तय लक्ष्य 1.17 लाख मीट्रिक टन के सापेक्ष मात्र 40 प्रतिशत ही सरकारी गेहूं की खरीद हुई। हालांकि खाद्य विभाग के अफसर अब भी क्रय लक्ष्य पूरा होने के दावे कर रहे हैं। गत वर्ष इस समय तक 106021 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो गई थी। इस बार एजेंसियां अपने पुराने आंकड़े को भी नहीं छू पा रही हैं। धीमी गति से हो रही गेहूं खरीद के पीछे कोरोना और मौसम खराबी की वजह बताकर अधिकारी अपना पल्ला झाड़ रहे हैं, जबकि हकीकत सब जानते हैं। इस बार लॉकडाउन के चलते अधिकतर किसान अपने गेहूं की बिक्री के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन नहीं करा सके थे। इन सबका गेहूं बिचौलिये और दलालों ने कम रेट पर खरीदकर क्रय एजेंसियों को सप्लाई कर दिया। अब कुल मिलाकर गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा होने की संभावनाएं दिनों दिन क्षीण होती जा रही हैं।
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127 क्रय केंद्रों पर खरीद हो रही है। लॉकडाउन के चलते किसानों के पंजीकरण नहीं हो सके। किसानों को बेमौसम बारिश की मार भी झेलनी पड़ी। फिलहाल क्रय केंद्र प्रभारियों को गेहूं खरीद तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
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डॉ. अविनाश कुमार झा, डिप्टी आरएमओ