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सजायाफ्ता किशोर जिला चिकित्सालय, पोस्टमार्टम हाउस में लगाएगा झाडू
Updated Fri, 05 Oct 2018 11:57 PM IST
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जिला अस्पताल, पोस्टमार्टम हाउस में झाड़ू लगाने की मिली सजा
हत्या के 38 साल पुराने मामले में किशोर न्याय बोर्ड का फैसला, घटना के वक्त किशोरवय था आरोपी
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। किशोर न्याय बोर्ड ने हत्या के 38 साल पुराने मामले में आरोपी किशोर को दोषी ठहराया है। घटना के समय नाबालिग होने के कारण उसे जेल की सजा नहीं सुनाई गई है। किशोर न्याय बोर्ड ने अपराधी ठहराए गए किशोर को आदेश दिया है कि वह तीन साल तक जिला संयुक्त चिकित्सालय परिसर और पोस्टमार्टम हाउस में निशुल्क सफाई करेगा।
थाना कोतवाली में 11 दिसंबर 1980 को हत्या का एक मामला दर्ज हुआ। इस मामले में हाजी अब्दुल रहमान के साथ एक किशोर को भी अभियुक्त बनाया गया था। किशोर के पास से हत्या में प्रयुक्त शस्त्र भी पुलिस ने बरामद कर लिया। पांच जनवरी 1981 को विधि विवादित किशोर के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया गया। स्पेशल जज ने दस दिसंबर 1982 को हाजी अब्दुल रहमान व साथ के दूसरे आरोपी किशोर को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके विरुद्ध उच्च न्यायालय इलाहाबाद में फौजदारी अपील संख्या 3175/1982 दाखिल की गई। इसमें एक अभियुक्त को घटना के समय किशोर बताया गया। इस दौरान हाजी अब्दुल रहमान की मौत हो गई। इसलिए उनके विरुद्ध कार्रवाई समाप्त की गई। हाईकोर्ट में दाखिल इस अपील पर चार दिसंबर 2012 को फैसला सुनाया। उच्च न्यायालय के फैसले के बाद स्पेशल जज ने इस आदेश के साथ पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड को प्रेषित की कि घटना के समय किशोर अपचारी होने के कारण दंड के बिंदु पर सुने जाने के लिए मामला किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश हो। किशोर न्याय बोर्ड में प्रधान मजिस्ट्रेट/न्यायिक मजिस्ट्रेट सुदेश कुमारी और सदस्यों ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद अपना फैसला सुनाया। किशोर इस मामले में पांच महीना 15 दिन जेल में रह चुका था। फैसले में कहा गया कि किशोर को तीन साल की सजा दी जाती है। किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के तहत वह तीन साल तक सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार को सुबह दस बजे से लेकर शाम पांच बजे तक पोस्टमार्टम हाउस की निशुल्क सफाई करेगा। शुक्रवार, शनिवार और रविवार को सुबह दस से शाम पांच बजे तक जिला संयुक्त चिकित्सालय में निशुल्क सफाई कार्य करेगा। सीएमओ को निर्देश दिया गया है कि वह किशोर की आचरण प्रणाली पर ध्यान केंद्रित करते हुए उपस्थिति हेतु पंजिका का रखरखाव करेंगे। प्रोवेशन अधिकारी भी उसकी आख्या भेजेेंगे। किशोर न्याय बोर्ड का यह आदेश शुक्रवार से प्रभावी हो गया है।
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हत्या के 38 साल पुराने मामले में किशोर न्याय बोर्ड का फैसला, घटना के वक्त किशोरवय था आरोपी
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। किशोर न्याय बोर्ड ने हत्या के 38 साल पुराने मामले में आरोपी किशोर को दोषी ठहराया है। घटना के समय नाबालिग होने के कारण उसे जेल की सजा नहीं सुनाई गई है। किशोर न्याय बोर्ड ने अपराधी ठहराए गए किशोर को आदेश दिया है कि वह तीन साल तक जिला संयुक्त चिकित्सालय परिसर और पोस्टमार्टम हाउस में निशुल्क सफाई करेगा।
थाना कोतवाली में 11 दिसंबर 1980 को हत्या का एक मामला दर्ज हुआ। इस मामले में हाजी अब्दुल रहमान के साथ एक किशोर को भी अभियुक्त बनाया गया था। किशोर के पास से हत्या में प्रयुक्त शस्त्र भी पुलिस ने बरामद कर लिया। पांच जनवरी 1981 को विधि विवादित किशोर के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया गया। स्पेशल जज ने दस दिसंबर 1982 को हाजी अब्दुल रहमान व साथ के दूसरे आरोपी किशोर को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके विरुद्ध उच्च न्यायालय इलाहाबाद में फौजदारी अपील संख्या 3175/1982 दाखिल की गई। इसमें एक अभियुक्त को घटना के समय किशोर बताया गया। इस दौरान हाजी अब्दुल रहमान की मौत हो गई। इसलिए उनके विरुद्ध कार्रवाई समाप्त की गई। हाईकोर्ट में दाखिल इस अपील पर चार दिसंबर 2012 को फैसला सुनाया। उच्च न्यायालय के फैसले के बाद स्पेशल जज ने इस आदेश के साथ पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड को प्रेषित की कि घटना के समय किशोर अपचारी होने के कारण दंड के बिंदु पर सुने जाने के लिए मामला किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश हो। किशोर न्याय बोर्ड में प्रधान मजिस्ट्रेट/न्यायिक मजिस्ट्रेट सुदेश कुमारी और सदस्यों ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद अपना फैसला सुनाया। किशोर इस मामले में पांच महीना 15 दिन जेल में रह चुका था। फैसले में कहा गया कि किशोर को तीन साल की सजा दी जाती है। किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के तहत वह तीन साल तक सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार को सुबह दस बजे से लेकर शाम पांच बजे तक पोस्टमार्टम हाउस की निशुल्क सफाई करेगा। शुक्रवार, शनिवार और रविवार को सुबह दस से शाम पांच बजे तक जिला संयुक्त चिकित्सालय में निशुल्क सफाई कार्य करेगा। सीएमओ को निर्देश दिया गया है कि वह किशोर की आचरण प्रणाली पर ध्यान केंद्रित करते हुए उपस्थिति हेतु पंजिका का रखरखाव करेंगे। प्रोवेशन अधिकारी भी उसकी आख्या भेजेेंगे। किशोर न्याय बोर्ड का यह आदेश शुक्रवार से प्रभावी हो गया है।
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