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जाकिर हत्याकांड में चार को उम्रकैद
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
Updated Thu, 03 Sep 2015 12:54 AM IST
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मुजफ्फरनगर। साढ़े चार साल पहले महमूदनगर में हुई सभासद जाकिर की हत्या में बुधवार को कोर्ट का फैसला आ गया। एडीजे प्रथम राजवीर सिंह ने हत्याकांड में दोषी पाए गए चार लोगों को आजीवन कारावास और 15-15 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। साक्ष्य के अभाव में 12 लोगों को बरी कर दिया गया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार सिविल लाइन थाना क्षेत्र अंतर्गत मोहल्ला महमूदनगर में आठ अप्रैल 2011 को सभासद जाकिर की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। वारदात के समय सभासद जाकिर अपने भाइयों के साथ के घर से मदनी चौक की ओर जा रहा था।
सोफिया स्कूल से आगे उसकी हत्या कर दी गई थी। उनके भाइयों ने भाग कर जान बचाई थी। सभासद के भाई साबिर अली ने मोहल्ले के ही अकलीम, कलीम, कसीम, इकराम पुत्रगण सलीम, मुस्तफा, शमीम समेत 16 लोगों को खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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जिसमें दस लोगों को 120 बी का अभियुक्त बनाया गया था। हत्या का कारण दोनों पक्षों के बीच चल रही पुरानी रंजिश रहा, जिसमें दोनों ओर से कई हत्याएं हो चुकी हैं।
इस हत्या का मुकदमा एडीजे प्रथम राजवीर सिंह की कोर्ट में चला। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता जितेंद्र त्यागी ने कोर्ट में 12 गवाह पेश किए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद साक्ष्य और तर्कों के आधार पर कोर्ट ने चार हत्यारोपी अकलीम, कलीम, कसीम और इकराम को हत्या का दोषी पाया।
एडीजे प्रथम राजवीर सिंह ने बुधवार को इस मुकदमे में फैसला सुनाया। जिसमें उक्त चारों को आजीवन कारावास और 15-15 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। धारा 504 में भी चारों को छह माह के कारावास और एक-एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
बाकी 12 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी किया गया। कोर्ट ने अपने निर्णय में 30 हजार रुपये मृतक के उत्तराधिकारी को दिए जाने के आदेश दिए हैं। उम्र कैद की सजा पाने वाले चारों लोग अभी तक जेल में ही हैं।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार सिविल लाइन थाना क्षेत्र अंतर्गत मोहल्ला महमूदनगर में आठ अप्रैल 2011 को सभासद जाकिर की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। वारदात के समय सभासद जाकिर अपने भाइयों के साथ के घर से मदनी चौक की ओर जा रहा था।
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सोफिया स्कूल से आगे उसकी हत्या कर दी गई थी। उनके भाइयों ने भाग कर जान बचाई थी। सभासद के भाई साबिर अली ने मोहल्ले के ही अकलीम, कलीम, कसीम, इकराम पुत्रगण सलीम, मुस्तफा, शमीम समेत 16 लोगों को खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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जिसमें दस लोगों को 120 बी का अभियुक्त बनाया गया था। हत्या का कारण दोनों पक्षों के बीच चल रही पुरानी रंजिश रहा, जिसमें दोनों ओर से कई हत्याएं हो चुकी हैं।
इस हत्या का मुकदमा एडीजे प्रथम राजवीर सिंह की कोर्ट में चला। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता जितेंद्र त्यागी ने कोर्ट में 12 गवाह पेश किए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद साक्ष्य और तर्कों के आधार पर कोर्ट ने चार हत्यारोपी अकलीम, कलीम, कसीम और इकराम को हत्या का दोषी पाया।
एडीजे प्रथम राजवीर सिंह ने बुधवार को इस मुकदमे में फैसला सुनाया। जिसमें उक्त चारों को आजीवन कारावास और 15-15 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। धारा 504 में भी चारों को छह माह के कारावास और एक-एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
बाकी 12 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी किया गया। कोर्ट ने अपने निर्णय में 30 हजार रुपये मृतक के उत्तराधिकारी को दिए जाने के आदेश दिए हैं। उम्र कैद की सजा पाने वाले चारों लोग अभी तक जेल में ही हैं।