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तीन ग्राम पंचायत सचिवों की याचिका खारिज
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मुरादाबाद। हाईकोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान एफआईआर को निरस्त करने से इनकार करते हुए तीन सचिवों की याचिका खारिज कर दी। तीनों सचिवों के खिलाफ प्रशासकों के कार्यकाल के दौरान गबन करने के आरोप हैं।
प्रशासकों के कार्यकाल में ग्राम पंचायतों में नियमों को ताक पर रखकर करीब 38 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि खर्च की गई थी। इसकी शासन स्तर से जांच कराई गई। अनियमितता बरतने के आरोप में शासन ने नौ ग्राम पंचायत सचिवों, दो सहायक विकास अधिकारी पंचायत और तत्कालीन जिला पंचायत राज अधिकारी को निलंबित किया था। प्रशासकों के कार्यकाल में विकास खंड भगतपुर टांडा की ग्राम पंचायत देवापुर मुस्तकम, चांदपुर और बहेड़ी के तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव विनय आशीष, ग्राम पंचायत लालूवाला के तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव पुष्पेंद्र और ग्राम पंचायत बुढ़नपुर की तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव तरन्नुम आरा और इनके साथ बतौर प्रशासक रहे तत्कालीन सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) चंद्रपाल सिंह के खिलाफ जिला पंचायत राज अधिकारी आलोक कुमार प्रियदर्शी ने थाना भोजपुर में एफ आईआर दर्ज कराई थी।
आरोप था कि तीनों ने शासकीय धन का गबन किया है। ग्राम सचिव विनय आशीष, पुष्पेंद्र और तरन्नुम आरा ने इस मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की और एफआईआर को विधि विरुद्ध बताते हुए चुनौती दी थी। हाईकोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ ने बृहस्पतिवार को सुनवाई के बाद एफआईआर को निरस्त करने से इनकार कर दिया और याचिका खारिज कर दी। अदालत के इस निर्णय की जानकारी डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी को मिल गई है।
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पहले भी याचिकाएं हुई थी खारिज
ब्लॉक कुंदरकी के थाना मैनाठेर और कुंदरकी में भी तत्कालीन प्रशासकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। प्रशासकों ने एफआईआर को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती दी, लेकिन उस समय भी दोनों याचिकाएं खारिज कर दी गई।
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प्रशासकों के कार्यकाल में ग्राम पंचायतों में नियमों को ताक पर रखकर करीब 38 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि खर्च की गई थी। इसकी शासन स्तर से जांच कराई गई। अनियमितता बरतने के आरोप में शासन ने नौ ग्राम पंचायत सचिवों, दो सहायक विकास अधिकारी पंचायत और तत्कालीन जिला पंचायत राज अधिकारी को निलंबित किया था। प्रशासकों के कार्यकाल में विकास खंड भगतपुर टांडा की ग्राम पंचायत देवापुर मुस्तकम, चांदपुर और बहेड़ी के तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव विनय आशीष, ग्राम पंचायत लालूवाला के तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव पुष्पेंद्र और ग्राम पंचायत बुढ़नपुर की तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव तरन्नुम आरा और इनके साथ बतौर प्रशासक रहे तत्कालीन सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) चंद्रपाल सिंह के खिलाफ जिला पंचायत राज अधिकारी आलोक कुमार प्रियदर्शी ने थाना भोजपुर में एफ आईआर दर्ज कराई थी।
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आरोप था कि तीनों ने शासकीय धन का गबन किया है। ग्राम सचिव विनय आशीष, पुष्पेंद्र और तरन्नुम आरा ने इस मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की और एफआईआर को विधि विरुद्ध बताते हुए चुनौती दी थी। हाईकोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ ने बृहस्पतिवार को सुनवाई के बाद एफआईआर को निरस्त करने से इनकार कर दिया और याचिका खारिज कर दी। अदालत के इस निर्णय की जानकारी डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी को मिल गई है।
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पहले भी याचिकाएं हुई थी खारिज
ब्लॉक कुंदरकी के थाना मैनाठेर और कुंदरकी में भी तत्कालीन प्रशासकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। प्रशासकों ने एफआईआर को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती दी, लेकिन उस समय भी दोनों याचिकाएं खारिज कर दी गई।