लोकसभा चुनाव 2019: जिगर के शहर में शायर उम्मीदवार, प्रचार में चलेंगे शायराना तीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उनका जो काम है वो अहले सियासत जाने, मेरा पैगाम मोहब्बत है जहां तक पहुंचे। अली सिकंदर उर्फ जिगर मुरादाबाद का ये शेर यूं तो सियासत को हमेशा आईना दिखाता रहा है। लेकिन इस बार सियासत के मैदान में जिगर की जमीन पर एक ऐसा शायर अपनी सियासी किस्मत आजमाने उतरा है जो अपनी कटीली शायरी से विवादों में रहा है। कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर के स्थान पर अब इमरान प्रतापगढ़ी को मुरादाबाद से मैदान में उतारा है।
इमरान ने शुरुआत तो मोहब्बत की शायरी से की थी, लेकिन धीरे-धीरे वह शायरी से विवादों में भी आए। उर्दू मंचों पर कभी बडे़ शायरों का खूब प्यार पाने वाले इस शायर ने जब विवादित शायरी करना शुरू किया तो कई शायरों ने उनसे किनारा करना शुरू कर दिया। इमरान को सुनने वाला एक बड़ा वर्ग है, लेकिन संजीदा शायरी को चाहने वाले और कहने वाले लोग इमरान से अब कतराने लगे हैं।
इमरान प्रतापगढ़ी को टिकट मिलने पर शहर के कलमकारों ने कहा कि एक शायर अपना राजनीतिक सफर शुरू कर रहा है इसकी खुशी है, लेकिन उनकी शायरी पर वह कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। शायरी जोड़ने की बात करती है। यदि किसी खेमे में बंटकर शायरी की जा रही है तो वह शायरी नहीं है।
फेसबुक से किया आगाज
मुरादाबाद से टिकट मिलने की मुहर खुद इमरान ने भी लगाई। अपने फोटो के साथ एक शेर पोस्ट किया। उन्होंने अपनी फेसबुक वॉल पर लिखा - सियासत जंग है इस दौर में जम्हूरियत वालों, मुरादाबाद से इस जंग का आगाज करते हैं।
इमरान के कुछ शेर
जुल्म-ए-माजी आइंदा जहन में रहे
एक शिकारी परिंदा जहन में रहे
वोट देने को घर से निकलिएगा जब
तब वो खूनी दरिंदा जहन में रहे
हमने उसके जिस्म को फूलों की वादी कह दिया
इस जरा सी बात पर हमको फसादी कह दिया
हमने अकबर बनकर जोधा से मोहब्बत की
मगर सिरफिरे लोगों ने हमको लव जिहादी कह दिया
हम अम्न चाहते हैं मगर जुल्म के खिलाफ
गर जंग लाजमी है तो फिर जंग ही सही
खुद को सच्चाई का ठेकेदार लिखने लग गए
बौखलाहट में सरे बाजार लिखने लग गए
एक नारे से हुकूमत इस कदर घबरा गई
चोर साहब खुद को चौकीदार लिखने लग गए