टूटा गमों का पहाड़ : सैन्य हवलदार की मौत से मचा कोहराम, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल, ऐसे हुआ था हादसा
सैन्य हवलदार की मौत से घर पर मातम पसरा हुआ है। वहीं सैन्य हवलदार का शव घर पहुंचा तो कोहराम मच गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।
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मध्य प्रदेश के सागर से छुट्टी पर घर लौट रहे सैन्य हवलदार जागृति विहार निवासी संजय सिंह की सड़क हादसे में मौत हो गई। एक डंपर की साइड लगने के बाद उनकी कार नाले में जा गिरी थी। रविवार देर रात एक बजे उनका शव घर पहुंचा। सोमवार सुबह सूरजकुंड पर गमगीन माहौल में उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान सांसद राजेंद्र अग्रवाल, विधायक अमित अग्रवाल सहित अन्य भाजपा नेता और सैन्य अधिकारी मौजूद रहे।
जानी थाना क्षेत्र के गांव टिमकिया निवासी भूले सिंह सिंचाई विभाग से सेवानिवृृत्त हैं। वह पिछले 40 साल से जागृति विहार में परिवार के साथ रहते हैं। उनके बेटे संजय सिंह 2004 में सेना में भर्ती हो गए थे और उनकी बहन विजयालक्ष्मी सीआईएसएफ अमृतसर में हैं। संजय सागर में सेवारत थे। उनकी पत्नी कनिका यहां खरखौदा में प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका है। उनकी बेटी ख्याति सिंह (9) और बेटा अदम्य (5) हैं। ख्याति कक्षा चार में पढ़ती है और अदम्य प्री नर्सरी में है।
संजय के बहनोई रोहित ने बताया कि शुक्रवार रात 11 बजे संजय छ्ट्टी लेकर अपनी कार से घर के लिए निकले थे। जब वह करीब आठ किलोमीटर दूर गांव मालकौन के पास पहुंचे तो पीछे से आए तेज रफ्तार डंपर ने कार को साइड मार दी। इससे उनकी कार नाले की पुल की दीवार तोड़कर नीचे जा गिरी। डंपर चालक फरार हो गया। शनिवार सुबह ग्रामीण खेतों के लिए निकले तो उन्हें नाले में कार पड़ी मिली। इसके बाद उन्होंने स्थानीय पुलिस को मामले की जानकारी दी। पुलिस ने कार को नाले से बाहर निकलवाया तो उसमें संजय का शव मिला। पुलिस ने उनकी आईडी से पहचान कर सैन्य अधिकारियों को जानकारी दी। अधिकारियों ने इसकी जानकारी परिजनों को दी। संजय की मौत की सूचना मिलते ही परिजन मध्य प्रदेश पहुंचे और रविवार रात एक बजे शव लेकर जागृति विहार आए।
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एक साल पहले हुई थी संजय की मां की मौत
रोहित ने बताया कि एक साल पहले संजय की मां ओमवती की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। मां की मौत होने के बाद से ही संजय ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्त का मन बना लिया था। इसके लिए उन्होंने प्रार्थना पत्र दे दिया था। वह जल्द घर आना चाहते थे।
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पति के शव को देख बेसुध हुई कनिका
रोहित ने बताया कि वर्ष 2009 में संजय की शादी कनिका से हुई थी। शनिवार सुबह पति की मौत का पता चला तो वह बेसुध हो गई और उन्हें बार-बार याद कर बदहवास हो गई। रविवार रात में जब शव घर पहुंचा तो पत्नी, पिता और बहन का रोकर बुरा हाल हो गया। सैन्य अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को संभाला। वहीं, दिनभर पीड़ित परिवार को सांत्वना देने के लिए लोगों का तांता लगा रहा।