मेरठ में दिल्ली रोड पर बुधवार देर रात पांच लोगों की मौत को भले ही सड़क हादसा कहा जाए। लेकिन यह बेरहम व्यवस्था का कत्ल है। डेढ़ घंटे तक घायल गाड़ी के नीचे शहर के बीचोंबीच तड़पते रहे और सरकारी तंत्र गायब रहा। यदि यह आला अफसर तत्काल मौके पर पहुंच जाते तो दो लोगों की जान बच सकती थी।
जानें कैसे डेढ़ घंटे तक बिगड़ी व्यवस्था :-
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कंटेनर हादसा
- फोटो : अमर उजाला
गनीमत रही कि यह बेकाबू कंटेनर जिस समय दिल्ली रोड पर शॉप्रिक्स मॉल की तरफ से शहर में घुसा तो उस समय तक दिल्ली रोड की अधिकांश दुकानें बंद हो जाती हैं। दिल्ली रोड पर वाहनों का आवागमन भी कम हो जाता है। लोगों का कहना है कि शॉप्रिक्स चौराहे पर सीओ ब्रह्मपुरी ऑफिस के बाहर बैरियर लगाकर चेकिंग की जाती है। लेकिन रात के दस बजते ही शहर की सड़कों से पुलिस गायब हो गई। यदि चेकिंग हुई होती तो कंटेनर के चालक को पकड़ा जा सकता था। यही वजह रही कि पुलिस के शॉप्रिक्स चौराहे से गायब होने पर चालक ने कंटेनर शहर की तरफ दौड़ा दिया।
इरा मॉल पर दो की मौत
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कंटेनर हादसा
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इस कंटेनर ने दिल्ली चुंगी से करीब 150 मीटर पहले मीट की गाड़ी समेत कई वाहनों में टक्कर मारी। इससे पहले इरा मॉल के पास इसी कंटेनर ने दो लोगों को रौंद दिया। जिनकी मौके पर मौत हो गई। वहीं कई घायल हो गए तो फुटबॉल चौराहे पर कई रिक्शा चालक और लोग इस कंटेनर की चपेट में आ गए।
पुलिस के साथ हाथापाई
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कंटेनर हादसा
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हादसे के बाद सड़क पर सौ मीटर की दूरी में मांस के लोथड़े पड़े हुए थे। रात करीब 11:20 एसओ देहली गेट विजय गुप्ता मौके पर पहुंचे तो उस समय सैकड़ों लोगों की भीड़ सड़क पर उतर गई थी। पुलिस के साथ हाथापाई हुई। लेकिन भीड़ के आगे चंद पुलिसकर्मी तमाशबीन बने रहे।
व्यवस्था ही नहीं थी
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घायल मौके पर तड़पते रहे। लेकिन उन्हें कंटेनर के नीचे से निकालने की कोई व्यवस्था नहीं थी। जबकि घटनास्थल से करीब एक किलोमीटर के दायरे में टीपीनगर, ब्रह्मपुरी, रेलवे रोड और देहली गेट थाने के अलावा घंटाघर पर एसपी सिटी कार्यालय और नगर निगम का ऑफिस है। रात करीब 12:20 बजे जेसीबी बुलाई गई। मशक्कत के बाद जब तक घायलों का निकाला गया, दो लोगों की तड़पकर मौत हो चुकी थी। यदि शहर के बीचोंबीच किसी बड़े वाहन के नीचे फंसे घायलों को निकालने में डेढ़ घंटे से अधिक समय लग जाए तो साफ है कि सिस्टम पूरी तरह पटरी से उतर चुका है।