बड़े गिरोह का खुलासा: फर्जी तरीके से फाइनेंस कराते थे कार, बेचकर करते थे चोरी, फिर सोतीगंज में कराते थे कटान
मेरठ में एक बड़े गिरोह का खुलासा हुआ है: इस गिरोह के सदस्य फर्जी तरीके से कार फाइनेंस कराते थे। फिर उसी कार को चोरी कर सोतीगंज में कटान करा देते थे।
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मेरठ जनपद में ब्रह्मपुरी और एसओजी की संयुक्त टीम ने फाइनेंस कंपनी और बैंक से गरीब लोगों के नाम पर अवैध तरीके से लोन कराकर 10 प्रतिशत डाउन पेमेंट जमा करके कार खरीदने वाले गिरोह का खुलासा किया है। यह गिरोह कार बेचने के बाद दूसरी चाबी से कार चोरी कर लेते और फिर सोतीगंज में कटान करा देते। पुलिस ने गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जबकि चार आरोपी फरार हैं। पुलिस ने दो आरसी और चार कार भी बरामद की हैं।
एएसपी कैंट विवेक यादव ने बताया कि सिविल लाइन साकेत गोल मार्केट निवासी दिलीप कुमार और देवरिया के कंठभ पट्टी बघौचघाट निवासी गौरव मल्ल उर्फ अनुज मल्ल को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से दो अर्टिगा, एक स्विफ्ट और एक अर्बन कार के अलावा दो आरसी बरामद की गई हैं। इनके साथी कुशीनगर के रामकोला निवासी सचिन यादव, गाजियाबाद कविनगर निवासी सचिन चौधरी सोतीगंज निवासी ताहिर और शाहिद उर्फ सईद फरार चल रहे हैं। इनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वह गाड़ियों की दस प्रतिशत रकम फाइनेंस वालों को जमा कराकर गरीब लोगों के नाम पर गाड़ियां खरीदते थे। नई गाड़ियां ग्राहक को तीन से चार लाख में बेच देते थे। फाइनेंस व एनओसी के कागजात संदीप चौधरी तैयार कराता है। कार खरीदने वालों को कार की एक ही चाबी दी जाती। दूसरी चाबी से कार को चोरी कर लेते। इसके बाद आरोपी सोतीगंज के कबाड़ी ताहिर और शाहिद को कार दे देते। कबाड़ी वाहन को कटान कर देते या फर्जी कागजात तैयार कर दिल्ली और हरियाणा में बेच देते।
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किराए का मकान दिखाते हैं आरोपी
एएसपी कैंट ने बताया कि गरीब लोगों के कागजात बहाने से लेकर किराए का मकान दिखाते हैं, ताकि बैंक जांच करे तो किराए के मकान पर आकर देख सकते हैं। जिनकी आईडी लगाते हैं उन्हें मूलरूप से बाहर के रहने वाले दिखाते हैं। डाउन पेमेंट आरोपी खुद जमा कर देते थे और बैंक से लोन स्वीकृत करा लेते हैं।
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...तो क्या सोतीगंज में हो रहा कटान
पुलिस के खुलासे से यह तो स्पष्ट हो गया कि सोतीगंज में अब भी चोरी छिपे वाहनों का कटान किया जा रहा है। ताहिर और शाहिद इन वाहनों का कटान करते थे। माना जा रहा है कि सोतीगंज में ही वाहनों का कटान किया जाता था। इतना ही नहीं, जिस कार की डिमांड ज्यादा होती थी तो उन वाहनों को फर्जी कागजात बनाकर नोएडा, दिल्ली, गुडगांव, हिमाचल और उत्तराखंड में बेच दिया करते थे।