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कादिर एनकाउंटर पर उठे सवाल, आखिर कैसे रखा गया 20 हजार का इनाम, दो इंस्पेक्टरों के खिलाफ बैठी जांच

Sat, 31 Aug 2019 11:31 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sat, 31 Aug 2019 11:31 AM IST
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CCSU Meerut Kadir Encounter Case: Police Asked from lucknow
प्रदर्शन करते छात्र - फोटो : अमर उजाला
मेरठ के चौधरी चरणसिंह विश्वविद्यालय में छात्र कादिर अली के साथ हुई मुठभेड़ मामले में मेडिकल थाना पुलिस ही नहीं, आला अधिकारी भी फंसते नजर आ रहे हैं। पूरा मामला जब खुलकर सामने आया और इसकी गूंज शासन तक पहुंची तो सभी खुद को बचाने की जुगत में लगे हैं। मुठभेड़ के बाद पुलिस अधिकारियाें की सांसे थमी हुई हैं और सभी की नजर पंचम तल पर है। वहीं मामले में दो इंस्पेक्टरों पर जांच बैठा दी गई है -


पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ परिजनों और धरने पर बैठे छात्रों का दावा है कि 28 अगस्त को विवि गेट पर गोली मारने की घटना में छात्र कादिर मौके पर नहीं था। इससे पहले भी उस पर तमंचा तानने का आरोप लगा था। कुछ छात्रों ने साजिशन एक वीडियो फुटेज तमंचे के साथ पुलिस को सौंपी, लेकिन उस फुटेज में कादिर नहीं कोई अन्य युवक है। कादिर पर उच्च अधिकारियों ने बीस हजार का इनाम कैसे घोषित कर दिया। इससे अफसरों की मंशा पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
CCSU Meerut Kadir Encounter Case: Police Asked from lucknow
मौके पर मौजूद पुलिस - फोटो : अमर उजाला
गुरुवार को परिजनों ने कादिर को सिविल लाइन पुलिस को सौंप दिया था। एसपी सिटी डॉ. अखिलेश नारायण सिंह को पूरे मामले से अवगत कराया था। एसएसपी ने कादिर पर 20 हजार का इनाम घोषित कर दिया, जबकि वह पुलिस हिरासत में था। 

यही नहीं उसे सिविल लाइन थाने से गिरफ्तार दिखाकर मेडिकल थाना पुलिस के हवाले कर दिया गया। यहां पुलिस ने नया खेल खेला। पूछताछ के बाद कादिर की निशानदेही पर पिस्टल बरामद कराने के लिए उसे जागृति विहार एक्सटेंशन ले जाया गया। मौके पर कादिर द्वारा दरोगा की सर्विस रिवाल्वर छीनकर भागने का प्रयास करने के बाद मुठभेड़ में उसके पैर में गोली मार दी गई।
CCSU Meerut Kadir Encounter Case: Police Asked from lucknow
मुठभेड़ में घायल छात्र कादिर - फोटो : अमर उजाला

इस पूरे मामले में मेडिकल थाना पुलिस ही नहीं, बल्कि आला अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। इस प्रकरण में तमाम सवाल ऐसे हैं, जिनका जवाब पुलिस के पास नहीं है। प्रकरण में पुलिस फंसती नजर आ रही है। अहम बात ये है कि भाजपा के नेता ही इस मामले को लेकर पुलिस अधिकारियों पर अंगुली उठा रहे हैं। अब वह शासन स्तर पर कार्रवाई के लिए दबाव भी बना रहे हैं। 

ये उठ रहे हैं सवाल
- कादिर पर पूर्व में दर्ज नहीं है एक भी मुकदमा तो इनाम इतनी जल्दी घोषित क्यों किया गया?
- आत्मसमर्पण करने के बाद कादिर पर इनाम क्यों घोषित हुआ?
- जब कादिर ने खुद ही थाने में समर्पण किया तो वह भागने का प्रयास क्यों करता?
- मान भी लें कि कादिर ने भागने का प्रयास किया, कहीं पुलिस के टॉर्चर के चलते तो उसने यह कदम नहीं उठाया?

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CCSU Meerut Kadir Encounter Case: Police Asked from lucknow
प्रदर्शन करते छात्र - फोटो : अमर उजाला

छात्र कादिर की मुठभेड़ का मामला शुक्रवार को गरमा गया। कलेक्ट्रेट में शुक्रवार सुबह सीसीएसयू कैंपस, मेरठ कॉलेज, एनएएस कॉलेज, डीएन कॉलेज के सैकड़ों छात्रों ने धरना देकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। छात्रों के उग्र रूप को देखते हुए कलक्ट्रेट को छावनी में तब्दील कर दिया गया। छात्र आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच और कार्रवाई की मांग कर रहे थे।

यह भी पढ़ें: सीसीएसयू कैंपस-कॉलेजों में आज प्रवेश का अंतिम दिन, ये डॉक्यूमेंट लेकर जाएं साथ

मानवाधिकार आयोग ले जाएंगे मामला
धरने पर विवि के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सचिन चौधरी, मेरठ कॉलेज के पूर्व छात्रसंघ महामंत्री पुष्पेंद्र कुमार, डीएन के पूव अध्यक्ष सम्राट मलिक ने फर्जी मुठभेड़ में दोषी पुलिसकर्मी व अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। गिरफ्तार छात्र को रिहा करने की मांग की। इस दौरान डीएम के नाम सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा। 24 घंटे में कार्रवाई नहीं होने पर मामला मानवाधिकार आयोग में ले जाया जाएगा। इंसाफ न मिलने पर कलेक्ट्रेट में छात्रों ने भूख हड़ताल पर बैठने की चेतावनी दी है।

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CCSU Meerut Kadir Encounter Case: Police Asked from lucknow
मौके पर मौजूद पुलिस - फोटो : अमर उजाला
ये था पूरा मामला
भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश मंत्री आयुष पंवार ने परिवहन मंत्री के स्वागत में सीसीएसयू के गेट पर बुधवार को कार्यक्रम रखा था। मंत्री के आने से पहले मनीष व शानू को पैर में गोली लगी थी। मामले में आशू काजला उर्फ आशीष, कादिर निवासी किठौर, सागर चौधरी, दीपक पंवार व आदित्य तोमर पर गोली मारने का आरोप लगाकर मेडिकल थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था।

गुरुवार सुबह सात बजे उप्र उर्दू अकादमी के सदस्य कुंवर बासित अली (भाजपा नेता) अन्य लोगों के साथ आरोपी कादिर को लेकर सिविल लाइन थाने पहुंचे। जहां उसे पुलिस की सुपुर्दगी में दिया। दोपहर को पुलिस ने कादिर के साथ मुठभेड़ दिखाकर पैर में गोली मार दी। पुलिस ने बचाव में कादिर पर दरोगा रणवीर से पिस्टल छीनने का आरोप लगाया।

शुक्रवार को कलेक्ट्रेट में धरना दे रहे छात्रों कहना है कि मामले में सीओ सिविल लाइन हरिमोहन सिंह, इंस्पेक्टर सिविल लाइन अब्दुर्रहमान सिद्दीकी और इंस्पेक्टर मेडिकल प्रशांत मिश्रा ने मुठभेड़ की साजिश रची है। जिनमें से दो इंस्पेक्टरों खिलाफ उच्चाधिकारियों ने जांच बैठा दी है। 
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