तेल का खेल पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फैला है। यह बात अलग है कि इस अवैध कारोबार के सूत्रधार मेरठ के ही हैं। अभी तक की पड़ताल और हालात में यह बात सामने आ चुकी है कि तेल का खेल करने वालों का सिंडिकेट काफी बड़ा और प्रभावशाली है। मेरठ में डीपी पेट्रोकेम में बरामद हुए संदिग्ध काले तेल के तार अब शामली जनपद से जुड़ रहे हैं। जहां पर इस काले तेल को रिफाइन कर डीजल आदि तैयार होता है।
आगे जानें आखिर कैसे इस तेल के काले खेल में सने हैं तेल माफियाओं के हाथ-
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पेट्रोल पंप के गोदाम पर छापेमारी
- फोटो : अमर उजाला
एडीएम सिटी अजय तिवारी और एसपी सिटी अखिलेश नारायण सिंह ने 13 सितंबर को टीपी नगर थाना क्षेत्र के जगन्नाथपुरी में स्थित तेल कारोबारी धनेंद्र जैन के पुत्र विशाल जैन की फर्म डीपी पेट्रोकेम पर छापा मारा था। यहां से भूमिगत टैंक के साथ ही बाहर खड़े टैंकर में भरा 45752 लीटर काला तेल बरामद हुआ था।
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पेट्रोल पंप के गोदाम पर छापेमारी
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आपूर्ति विभाग ने फर्म सील कर पुलिस बल तैनात कर दिया था। जब इस फर्म पर छापा मारा गया तो विशाल जैन वहां मौजूद नहीं थे। तभी से धनेंद्र जैन और विशाल जैन दोनाें ही फरार बताए जा रहे है। इसके अलावा इस तेल से संबंधित अभिलेख भी आज तक फर्म मालिक पुलिस-प्रशासन को नहीं दिखा पाया है।
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पेट्रोल पंप के गोदाम पर छापेमारी
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इस प्रकरण की जांच के दौरान एक गोपनीय पत्र ने इस काले तेल के तार शामली और बड़ौत से जोड़ दिए हैं। पत्र में कहा गया है कि डीपी पेट्रोकेम से जो टैंकर बरामद हुआ था, वह बड़ौत निवासी कारोबारी का है। इसके साथ ही यह काला तेल शामली की एक केमिकल फैक्ट्री में जाता है।
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नकली ऑयल
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यह केमिकल फैक्टरी धनेंद्र जैन के के रिश्तेदार की है और यहां पर ही इस काले तेल को रिफाइन कर उससे मिलावटी डीजल तैयार किया जाता है। पत्र में यह भी कहा गया है कि यह फैक्टरी रात में चलती है, क्याेंकि इस तेल को रिफाइन करने में बहुत प्रदूषण होता है। इस काले तेल से जुड़े विशाल जैन और शामली निवासी केमिकल फैक्टरी के मालिक को 20 करोड़ सालाना की कमाई होने का भी दावा किया गया है।