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UP: जिंदा हैं कल्पतरु ग्रुप के डायरेक्टर जय किशन सिंह राणा...ये बता रहा है पुलिस का रिकॉर्ड, अभी तलाश जारी है
Sat, 19 Apr 2025 10:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 19 Apr 2025 10:23 AM IST
सार
पुलिस ने कल्पतरु ग्रुप के डायरेक्टर और उसके सहयोगियों पर दर्ज हुए 46 मुकदमों में चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी है। कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में भी पुलिस ने जयकिशन सिंह राणा को जिंदा माना है और उसके खोजने की बात लिखी है।
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जयकृष्ण राणा का फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
मथुरा के गांव चुरमुरा के रहने वाले जयकिशन सिंह राणा ने 2009 में कल्पतरु ग्रुप नामक चिटफंट कंपनी बनाई। चिटफंट में एफडी आरडी के माध्यम से कम समय में धनराशि दोगुना करने के नाम पर सैकड़ों से करोड़ों रुपये की धनराशि जमा कराई। शुरूआत में तो उसने लोगों के रुपये तय समय में दोगुने करके दिए, लेकिन बाद में निवेशकों के पैसे लौटाना बंद कर दिया। चिट फंट से प्राप्त करोड़ रुपये की धनराशि से उसने जमीन खरीदी और उस पर विला, फ्लैट की बुकिंग के नाम पर करोड़ों रुपये एकत्रित किए।
रियल स्टेट का धंधा मंदा होने पर निवेशकों के रुपये लौटाना संभव नहीं हुआ तो वह अचानक गायब हो गया। ग्रुप के डायरेक्टर जयकिशन सिंह राणा समेत और उसके सहयोगियों के खिलाफ 2017 में सबसे पहला मुकदमा दर्ज हुआ। इसके बाद तो जैसे मुकदमों की कतार लग गई। पुलिस ने ग्रुप के डायरेक्टर जयकिशन सिंह राणा और उसके साथियों के खिलाफ कुल 46 केस दर्ज किए। इन 46 केसों में क्राइम ब्रांच को जांच करने में नौ साल लग गए।
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रियल स्टेट का धंधा मंदा होने पर निवेशकों के रुपये लौटाना संभव नहीं हुआ तो वह अचानक गायब हो गया। ग्रुप के डायरेक्टर जयकिशन सिंह राणा समेत और उसके सहयोगियों के खिलाफ 2017 में सबसे पहला मुकदमा दर्ज हुआ। इसके बाद तो जैसे मुकदमों की कतार लग गई। पुलिस ने ग्रुप के डायरेक्टर जयकिशन सिंह राणा और उसके साथियों के खिलाफ कुल 46 केस दर्ज किए। इन 46 केसों में क्राइम ब्रांच को जांच करने में नौ साल लग गए।
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2017 में उसके खिलाफ सबसे पहला मुकदमा फरह थाने में दर्ज हुआ। इसके बाद मथुरा के साथ प्रयागराज, आगरा, कानपुर, गाजियाबाद, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश आदि प्रदेशों में लगातार 46 मुकदमे दर्ज हुए। पहले तो मामले की विवेचना फरह थाने से होती रही, लेकिन बाद में क्राइम ब्रांच ने मामले को अपने हाथ में ले लिया।
क्राइम ब्रांच की टीम ने नौ साल तक मामले की जांच की। पिछले 20 दिन से क्राइम ब्रांच की टीम लगातार कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने में लगी है। मुकदमों की विवेचना में केस डायरी में सवा लाख पन्ने काटे गए। इसके बाद करीब एक हजार पन्ने की चार्जशीट बनकर तैयार हुई। फरह थाने और क्राइम ब्रांच के 18 पुलिस कर्मियों ने नौ साल में विवेचना पूरी की। विवेचना के दौरान आठ लोगों को जेल भेजा गया, जबकि चार पर इनाम घोषित किया गया।
क्राइम ब्रांच की टीम ने नौ साल तक मामले की जांच की। पिछले 20 दिन से क्राइम ब्रांच की टीम लगातार कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने में लगी है। मुकदमों की विवेचना में केस डायरी में सवा लाख पन्ने काटे गए। इसके बाद करीब एक हजार पन्ने की चार्जशीट बनकर तैयार हुई। फरह थाने और क्राइम ब्रांच के 18 पुलिस कर्मियों ने नौ साल में विवेचना पूरी की। विवेचना के दौरान आठ लोगों को जेल भेजा गया, जबकि चार पर इनाम घोषित किया गया।
जय किशन सिंह राणा की पुलिस को है तलाश
कोरोना काल में कल्पतरु ग्रुप ऑफ कंपनी के डायरेक्टर जयकिशन सिंह राणा की 17 अप्रैल 2021 में मौत की अफवाह जोर शोर से उड़ी। परिजन ने नयति हॉस्पिटल में उसकी मृत्यु का प्रमाण पत्र पुलिस को दिया, लेकिन पुलिस ने इसे स्वीकार नहीं किया है। एसपी क्राइम अवनीश कुमार मिश्रा ने बताया कि जिस हॉस्पिटल का मृत्यु प्रमाण पत्र दिखाया गया वह सरकारी अस्पताल नहीं है। कुछ समय बाद अस्पताल बंद भी हो गया। यदि जयकिशन सिंह राणा की मौत हुई तो परिजन ने पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी, गुपचुप तरीके से अंतिम संस्कार क्यों कर दिया। अभी तक परिजन ऐसा कोई साक्ष्य नहीं दे पाए हैं जिससे साबित हो कि जयकिशन सिंह राणा की मौत हो चुकी है। इसलिए उसकी तलाश जारी है। टीम लगातार उसकी तलाश में जुटी हुई है। इसके लिए परिजन और उसके सहयोगियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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कोरोना काल में कल्पतरु ग्रुप ऑफ कंपनी के डायरेक्टर जयकिशन सिंह राणा की 17 अप्रैल 2021 में मौत की अफवाह जोर शोर से उड़ी। परिजन ने नयति हॉस्पिटल में उसकी मृत्यु का प्रमाण पत्र पुलिस को दिया, लेकिन पुलिस ने इसे स्वीकार नहीं किया है। एसपी क्राइम अवनीश कुमार मिश्रा ने बताया कि जिस हॉस्पिटल का मृत्यु प्रमाण पत्र दिखाया गया वह सरकारी अस्पताल नहीं है। कुछ समय बाद अस्पताल बंद भी हो गया। यदि जयकिशन सिंह राणा की मौत हुई तो परिजन ने पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी, गुपचुप तरीके से अंतिम संस्कार क्यों कर दिया। अभी तक परिजन ऐसा कोई साक्ष्य नहीं दे पाए हैं जिससे साबित हो कि जयकिशन सिंह राणा की मौत हो चुकी है। इसलिए उसकी तलाश जारी है। टीम लगातार उसकी तलाश में जुटी हुई है। इसके लिए परिजन और उसके सहयोगियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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जय किशन और उसके सहयोगियों की करोड़ों की संपत्ति की कुर्क
एसपी क्राइम अवनीश कुमार ने बताया कि जयकिशन सिंह राणा के सहयोगी किरन सिंह और जितेंद्र बोरा के हाथ न लगने पर गैंगस्टर की कार्रवाई की गई। इसके साथ ही दोनों की संपत्ति को कुर्क किया गया। जयकिशन सिंह राणा की चुरमुरा में 62 करोड़ की संपत्ति कुर्क की जा चुकी है। आगरा में भी करोड़ों रुपये की संपत्ति कुर्क की है। पीएनबी बैंक उसके मकान को नीलाम कर चुकी है। अब कोर्ट में पैरोकारी कर आरोपियों को सजा दिलाई जाएगी।
एसपी क्राइम अवनीश कुमार ने बताया कि जयकिशन सिंह राणा के सहयोगी किरन सिंह और जितेंद्र बोरा के हाथ न लगने पर गैंगस्टर की कार्रवाई की गई। इसके साथ ही दोनों की संपत्ति को कुर्क किया गया। जयकिशन सिंह राणा की चुरमुरा में 62 करोड़ की संपत्ति कुर्क की जा चुकी है। आगरा में भी करोड़ों रुपये की संपत्ति कुर्क की है। पीएनबी बैंक उसके मकान को नीलाम कर चुकी है। अब कोर्ट में पैरोकारी कर आरोपियों को सजा दिलाई जाएगी।
अभी भी चल रही है ईडी और सेबी की जांच
क्राइम ब्रांच ने भले ही कोर्ट में सभी मामलों में चार्जशीट दाखिल कर दी हो, लेकिन ईडी और सेबी की जांच लगातार चल रही है। पिछले कुछ माह पहले मथुरा के जनरल गंज स्थित प्रिंटिंग प्रेस में ईडी ने छापा मारकर कार्रवाई की। इस दौरान टीम अपने साथ लैपटॉप, पेन ड्राइव समेत कागजात साथ ले गई। आगरा में भी ईडी ने कई स्थानों पर छापा मारकर कार्रवाई की है। भाजपा के विधायक पूरन प्रकाश से दिल्ली में ईडी घंटों पूछताछ कर चुकी है। ईडी और सेबी की कार्रवाई जल्द खत्म होने के आसार दिखाई नहीं दे रहे हैं।
क्राइम ब्रांच ने भले ही कोर्ट में सभी मामलों में चार्जशीट दाखिल कर दी हो, लेकिन ईडी और सेबी की जांच लगातार चल रही है। पिछले कुछ माह पहले मथुरा के जनरल गंज स्थित प्रिंटिंग प्रेस में ईडी ने छापा मारकर कार्रवाई की। इस दौरान टीम अपने साथ लैपटॉप, पेन ड्राइव समेत कागजात साथ ले गई। आगरा में भी ईडी ने कई स्थानों पर छापा मारकर कार्रवाई की है। भाजपा के विधायक पूरन प्रकाश से दिल्ली में ईडी घंटों पूछताछ कर चुकी है। ईडी और सेबी की कार्रवाई जल्द खत्म होने के आसार दिखाई नहीं दे रहे हैं।