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महोबा: न्यायमूर्ति के आश्वासन के बाद 22 दिन से चल रही अधिवक्ताओं की हड़ताल खत्म
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महोबा। परिवार न्यायालय को कचहरी से कलक्ट्रेट स्थानांतरित किए जाने के विरोध में अधिवक्ताओं द्वारा शुरू की गई हड़ताल और क्रमिक अनशन प्रशासनिक न्यायमूर्ति उच्च न्यायालय इलाहाबाद के आश्वासन के बाद गुरुवार को समाप्त हो गई। इसके साथ ही अधिवक्ताओं ने न्यायिक कामकाज शुरू कर दिया है।
गौरतलब है कि कचहरी परिसर में चल रहे परिवार न्यायालय को जनपद न्यायाधीश हरवीर सिंह ने कलक्ट्रेट कार्यालय में स्थानांतरित कर दिया था। कलक्ट्रेट मार्ग सुनसान होने के कारण महिला वादकारियों की समस्या को देखते हुए अधिवक्ताओं ने जनपद न्यायाधीश से परिवार न्यायालय को कचहरी परिसर में ही रहने का अनुरोध किया था, लेकिन उन्होंने अधिवक्ताओं की मांग नहीं मानी।
इस पर अधिवक्ता समिति के जिलाध्यक्ष केसर दास राजपूत व महामंत्री मुन्ना लाल धुरिया के नेेतृत्व में अधिवक्ताओं ने 29 अक्तूबर से क्रमिक अनशन और अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी थी। इससे न्यायिक कार्य प्रभावित होने लगा।
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अधिवक्ताओं के प्रतिनिधि मंडल ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद के प्रशासनिक न्यायमूर्ति से मुलाकात कर उन्हें समस्या से अवगत कराया। न्यायमूर्ति ने समस्या का समाधान कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद अधिवक्ताओं ने हड़ताल खत्म कर दी।
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गौरतलब है कि कचहरी परिसर में चल रहे परिवार न्यायालय को जनपद न्यायाधीश हरवीर सिंह ने कलक्ट्रेट कार्यालय में स्थानांतरित कर दिया था। कलक्ट्रेट मार्ग सुनसान होने के कारण महिला वादकारियों की समस्या को देखते हुए अधिवक्ताओं ने जनपद न्यायाधीश से परिवार न्यायालय को कचहरी परिसर में ही रहने का अनुरोध किया था, लेकिन उन्होंने अधिवक्ताओं की मांग नहीं मानी।
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इस पर अधिवक्ता समिति के जिलाध्यक्ष केसर दास राजपूत व महामंत्री मुन्ना लाल धुरिया के नेेतृत्व में अधिवक्ताओं ने 29 अक्तूबर से क्रमिक अनशन और अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी थी। इससे न्यायिक कार्य प्रभावित होने लगा।
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अधिवक्ताओं के प्रतिनिधि मंडल ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद के प्रशासनिक न्यायमूर्ति से मुलाकात कर उन्हें समस्या से अवगत कराया। न्यायमूर्ति ने समस्या का समाधान कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद अधिवक्ताओं ने हड़ताल खत्म कर दी।