महोबा। पर्युषण पर्व के छठवें दिन सोमवार को शहर के पुरानी सब्जी मंडी स्थित जैन मंदिर में उत्तम संयम धर्म की आराधना की गई। आत्मसाधक ब्रह्मचारी ज्ञाननंद महाराज ने उत्तम संयम धर्म का महत्व समझाया। कहा कि यह धर्म आत्म कल्याण और शांति प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि पांचों इंद्रियों व मन को वश में करने से उत्तम संयम धर्म प्रकट होता है। यह जीवन में शक्ति और स्थिरता लाता है। बताया कि अपने ऊपर नियंत्रण ही सच्चे धर्म की पहचान है। संयम की आराधना से आत्म संयम, शांति व अहिंसा के भाव जागृत होते हैं। उन्होंने संयम को रत्न और असंयम को मल बताया। प्रवचन के बाद ढोलक व मंजीरों की धुन पर भजन गाए गए। इसके बाद प्रसाद बांटा गया। रात्रिकालीन कार्यक्रम में धार्मिक भजनों पर आधारित अंताक्षरी प्रतियोगिता हुई। इस प्रतियोगिता का संचालन संध्या जैन ने किया। इस मौके पर दिलीप जैन, सुनील, राजेश, दीपक, रितिक, रिदम, पीहू, परी, तनिष्क समेत बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे।