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किसान मतदाताओं की चुप्पी ने बढ़ाई उम्मीदवारों की बेचैनी
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महोबा। पंचायत चुनाव की सरगर्मी तेज हो गई है। मतदान में महज दस दिन बचे हैं, लेकिन मतदाताओं की चुप्पी ने उम्मीदवारों की बेचैनी बढ़ा दी है। प्रचार-प्रसार के लिए पहुंच रहे प्रत्याशियों को मतदाता कोई जवाब नहीं दे रहे हैं। किसान फसल की कटाई में व्यस्त है। किसानों का कहना है कि पहले फसल घर पहुंचे इसके बाद चुनाव देखेंगे।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर गांव की चौपालों से जिलास्तर तक प्रत्येक व्यक्ति की जुबां में चुनावी चर्चा है। ग्राम प्रधान के लिए एक-एक सीट पर दस-दस लोग भाग्य आजमा रहे हैं। मतदान में बेहद कम समय शेष होने के चलते प्रत्याशी दिनरात चुनाव प्रचार में जुटे हैं। गांव में अधिकांश मकानों में ताले लटक रहे हैं तो किसान पर फसल
की कटाई में व्यस्त हैं। खेतों में वोट मांगने के लिए पहुंचने वाले प्रत्याशियों को मतदाता कोई जवाब नहीं दे रहे हैं। खरेला के किसान रामप्रकाश, कुड़ार के देवीदीन, पसवारा के प्रमोद, अरविंद आदि का कहना है कि इस समय खेतों में फसल पकी खड़ी है। मौसम आए दिन बदल रहा है। वह दिनरात फसल की कटाई व मढ़ाई में व्यस्त हैैं। पहले फसल घर पहुंचे और सालभर के भरण पोषण की व्यवस्था हो। इसके बाद वह चुनाव में रुचि दिखाएंगे। उनका कहना है कि इस बार वह अपना वोट विकास का वादा करने वाले प्रत्याशी को ही देंगे।
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर गांव की चौपालों से जिलास्तर तक प्रत्येक व्यक्ति की जुबां में चुनावी चर्चा है। ग्राम प्रधान के लिए एक-एक सीट पर दस-दस लोग भाग्य आजमा रहे हैं। मतदान में बेहद कम समय शेष होने के चलते प्रत्याशी दिनरात चुनाव प्रचार में जुटे हैं। गांव में अधिकांश मकानों में ताले लटक रहे हैं तो किसान पर फसल
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की कटाई में व्यस्त हैं। खेतों में वोट मांगने के लिए पहुंचने वाले प्रत्याशियों को मतदाता कोई जवाब नहीं दे रहे हैं। खरेला के किसान रामप्रकाश, कुड़ार के देवीदीन, पसवारा के प्रमोद, अरविंद आदि का कहना है कि इस समय खेतों में फसल पकी खड़ी है। मौसम आए दिन बदल रहा है। वह दिनरात फसल की कटाई व मढ़ाई में व्यस्त हैैं। पहले फसल घर पहुंचे और सालभर के भरण पोषण की व्यवस्था हो। इसके बाद वह चुनाव में रुचि दिखाएंगे। उनका कहना है कि इस बार वह अपना वोट विकास का वादा करने वाले प्रत्याशी को ही देंगे।
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