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कारगिल दिवस : जांबाजों ने दुश्मनों को दिया था मुंहतोड़ जवाब
Sat, 26 Jul 2025 12:58 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sat, 26 Jul 2025 12:58 AM IST
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फरेंदा। कारगिल युद्ध हो या देश के खिलाफ कोई भी लड़ाई, फरेंदा के सैनिक गांव के नेपाली टोला के जांबाज सैनिकों ने दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया है।
कारगिल युद्ध के दौरान ही सैनिक गांव के छह रणबाकुरों ने पाकिस्तानी सेना के नापाक इरादों को ध्वस्त करते हुए भारत की जमीन को पाक से मुक्त कराया था। ये रणबांकुरे आज भी देश की सेवा करते हुए सीमा की निगहबानी कर रहे हैं।
फरेंदा क्षेत्र के सैनिक गांव उदितपुर के सोनू गुरुंग, मोहित गुरुंग, सत्यम थापा, संदीप गुरुंग, कमल व आनंद गुरुंग ने अपने परिवार की परंपरा निभाते हुए 1998 में सेना में भर्ती हो गए। भर्ती होने के अगल साल ही कारगिल युद्ध की शुरुआत हो गई।
सैनिक गांव के इन जवानों की तैनाती भी कारगिल में ही थी और इन्होंने अदम्य साहस के साथ युद्ध किया। भारत की जीत दिलाने में इन जांबाज जवानों की भूमिका अहम रही। गांव के मुखिया सुबेदार मेजर एसबी गुरुंग ने बताया कि देश में जितने भी युद्ध हुए हैं, उनमें सैनिक गांव उदितपुर आगे रहा है। संवाद
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कारगिल युद्ध के दौरान ही सैनिक गांव के छह रणबाकुरों ने पाकिस्तानी सेना के नापाक इरादों को ध्वस्त करते हुए भारत की जमीन को पाक से मुक्त कराया था। ये रणबांकुरे आज भी देश की सेवा करते हुए सीमा की निगहबानी कर रहे हैं।
फरेंदा क्षेत्र के सैनिक गांव उदितपुर के सोनू गुरुंग, मोहित गुरुंग, सत्यम थापा, संदीप गुरुंग, कमल व आनंद गुरुंग ने अपने परिवार की परंपरा निभाते हुए 1998 में सेना में भर्ती हो गए। भर्ती होने के अगल साल ही कारगिल युद्ध की शुरुआत हो गई।
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सैनिक गांव के इन जवानों की तैनाती भी कारगिल में ही थी और इन्होंने अदम्य साहस के साथ युद्ध किया। भारत की जीत दिलाने में इन जांबाज जवानों की भूमिका अहम रही। गांव के मुखिया सुबेदार मेजर एसबी गुरुंग ने बताया कि देश में जितने भी युद्ध हुए हैं, उनमें सैनिक गांव उदितपुर आगे रहा है। संवाद
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