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शब-ए-बरात : कब्रिस्तानों में उमड़े लोग, मस्जिदों में की इबादत

Thu, 05 Feb 2026 12:09 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 05 Feb 2026 12:09 AM IST
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Shab-e-Barat: People thronged graveyards and offered prayers in mosques
देर रात तक कब्रिस्तानों में जारी रहा दुआओं का सिलसिला
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फूलों की चादर और खुशबुओं से महक उठीं कब्रें, नम आंखों से की ''ईसाले-सवाब'' की दुआ
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। शब-ए-बरात की मुकद्दस रात को मस्जिदों में इबादत की गूंज रही। वहीं, कब्रिस्तानों में एक अलग ही रुहानी मंजर देखने को मिला। लोगों ने स्थानीय कब्रिस्तानों का रुख किया। रात ढलने के साथ ही कब्रिस्तानों में लोगों की आमद बढ़ती गई।
अपने पूर्वजों और बिछड़ चुके अजीजों की कब्रों पर पहुंचकर लोगों ने कुरान की तिलावत कर फातिहा पढ़ी। हर कोई अपने-अपनों की मगफिरत (माफी) के लिए हाथ फैलाए नजर आया। लोगों ने अपने परिजनों की कब्रों की साफ-सफाई की, उन पर ताजे फूल चढ़ाए और इत्र छिड़का। कई जगह पर सामूहिक रूप से भी दुआएं मांगी गईं। इस दौरान मुल्क में अमन-चैन और इंसानियत की सलामती की अपील की गई।
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हजरत बाबा सदनशाह मस्जिद में एक विशेष दीनी मजलिस का आयोजन किया गया। इसमें मस्जिद के इमाम मुफ्ती नौशाद जमाली ने इस रात की फजीलत (महत्व) पर विस्तार से रोशनी डाली। मुफ्ती ने कहा कि शब-ए-बरात अल्लाह की रहमतों की बारिश की रात है। इस रात को ''नजात की रात'' भी कहा जाता है। मुफ्ती साहब ने ताकीद की कि बंदों को सच्चे दिल से अपने गुनाहों की माफी मांगनी चाहिए। भीड़ को देखते हुए प्रशासन और स्थानीय कमेटियों की ओर से रोशनी और पानी के विशेष इंतजाम किए गए थे। देर रात तक कब्रिस्तानों के बाहर रौनक बनी रही और लोगों ने गरीबों व जरूरतमंदों में खैरात और लंगर भी तक्सीम (वितरण) किया।
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