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आसमान से बारिश के साथ गिरे ओले
Fri, 15 Feb 2019 01:56 AM IST
देवेंद्र कुमार
lalitpur
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Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Fri, 15 Feb 2019 01:56 AM IST
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hailstrom
- फोटो : amarujala
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बृहस्पतिवार की सुबह आसमान से बारिश के साथ ओले गिरने से किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। गनीमत रही कि ब्लॉक बार व बिरधा क्षेत्र के कई गांवों में ओलो की बारिश एक से दो मिनट की हुई, इससे दलहनी फसलों को नुकसान पहुंचा है।
बीती रात ही मौसम ने एक बार फिर करवट बदली। रात में करीब ग्यारह बजे के आसपास बूंदाबांदी शुरू हो गई थी जो सुबह ओलावृष्टि में बदल गई। ग्राम बिरधा, सतरवांस, कुमरोल, बछलापुर, जाखलौन, जामुनधाना, कुचदों एवं बार के कई गांवों में भी बेर के आकार के ओले गिरने की सूचना है। वहीं, बिरधा क्षेत्र के कुमरोल गांव में पानी के साथ चने बराबर ओले गिरे। वहीं, कुछ क्षेत्रों में चने से भी बड़ा ओला गिरा। शुक्र यह रहा कि ओलों की बारिश एक दो मिनट की रही, जिससे फसलों को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा। बारिश गेहूं की फसल की लिहाज से लाभदायक बताई जा रही है। मड़ावरा क्षेत्र में बारिश बूूंदाबांदी तक ही सीमित रही। यहां के किसान अच्छी बारिश होने की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। अब यहां के किसान फसलों की सिंचाई के लिए संसाधन जुटाने में लग गए हैं। भाकियू के नगर अध्यक्ष राजपाल सिंह यादव का कहना है कि गेहूं की फसल को ज्यादा नुकसान नहीं है।
सूर्य देवता का चलता रहा लुकाछिपी का खेल
सुबह से ही सूर्य देवता का लुकाछिपी का खेल चलता रहा। कभी आसमान पूरी तरह साफ हो गया तो कभी आसमान में काले बादल नजर आने लगे। मौसम में आए बदलाव ने लोगों को फिर ठंड का अहसास करा दिया। कई लोगों ने चाय की चुस्की के साथ तो किसी ने मगौड़ी या अन्य लजीज पकवान के साथ मौसम का आनंद उठाया।
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किसानों के अरमानों पर फिरा पानी
जाखलौन। मौसम में आए परिवर्तन और रुक रुक कर हो रही बारिश ने किसानों को बेचैन कर दिया है। इस वर्ष किसानों को बहुत अच्छी फसल होने की उम्मीद थी।
सुबह बृहस्पतिवार को कसबा जाखलौन में ओलावृष्टि हुई, जिससे किसानों की फसलें प्रमुख रूप से गेहूं की फसल प्रभावित हुई है। किसानों का मानना है कि यदि इसी तरह बरसात होती रही तो किसानों की खेतों में खड़ी बहुत अच्छी फसल अपेक्षित लाभ नहीं दे पाएगी। 2 दिन से बूंदाबांदी और मौसम के परिवर्तन ने किसानों को चिंतित कर दिया है। इस बार किसानों ने दलहनी से ज्यादा गेहूं की फसल बोने में दिलचस्पी दिखाई है। पूर्व के सालों की अपेक्षा किसानों की गेहूं की फसल बहुत अच्छी भी है। वहीं, जिन कृषकों ने दलहन की फसल बोई है, वह भी संतोषजनक है।
उम्मीद के हिसाब से नहीं हुई बारिश
सैदपुर। कस्बा सैदपुर एवं आस पास के क्षेत्र में बीती रात से मौसम में अचानक आए बदलाव से किसानों को अच्छी बारिश होने की उम्मीद जगी थी, लेकिन आसमान में छाये बदरा बूंदा बांदी तक ही सीमित रहे। जिससे अधिकांश किसानों के चेहरों पर खुशी की जगह मायूसी नजर आई। सैदपुर एवं आसपास के क्षेत्र जिनमें ग्राम सतवांसा, साढूमल, मडावरा, बम्हौरी, जलंधर एवं मदनपुर में बीती शाम से मौसम में अचानक बदलाव आ गया था। देखते ही देखते आसमान में बादल छा गये थे। आज सुबह थोड़ी बूंदा बांदी शुरू हो गई। इससे किसानों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। गेहूं की फसल अभी छोटी छोटी है, जिसमें एक बार और सिंचाई की आवश्यकता महसूस हो रही थी। जहां नहर से सिंचाई की सुविधा थी, वहां के किसान कुछ दिनों से नहर चलाए जाने की मांग भी कर रहे थे। लेकिन इस बीच मौसम ने अचानक करवट ले ली। किसानों का कहना है कि बारिश हल्की बूंदाबांदी तक ही सीमित रही। यदि ठीक ठाक बारिश हो जाती तो पूरे क्षेत्र के किसानों का करोड़ों रुपये का डीजल बच जाता।
टोड़ी में बेर के आकार के गिरे ओले
बार/ललितपुर। फरवरी माह में दूसरी बार मौसम में आए बदलाव से कस्बा एवं क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं-कहीं जोर की बारिश हुई तो कहीं ओले भी गिरे। बुधवार की रात 10 बजे अचानक मौसम बदल गया और तेज गड़गड़ाहट के साथ बादलों में बिजली चमकने लगी। थोड़ी देर बाद बूंदाबांदी शुरू हुई जो बृहस्पतिवार की सुबह से पूरे दिन जारी रही। ग्राम डुलावन में राधा कृष्ण मंदिर के पास इमली के पेड़ पर गाज गिरी। गाज से कोई जन धन की हानि नहीं हुई तो वहीं डुलावन, बरखिरिया, करमई, खजरा, चिगलौआ, कारीटोरन, इमिलिया, टोड़ी में बेर के आकार की ओले गिरे। किसानों का कहना है कि मौसम में आए बदलाव से नुकसान ज्यादा है क्योंकि चना, सरसों, मटर, मसूर आदि दलहनी एवं तिलहनी फसलों के कटाई का समय आ गया है। इस पानी से फसलों के सड़ने की आशंका जताई जा रही है। वहीं, गेहूं की फसल को नुकसान और फायदा बराबर है, क्योंकि गेहूं की फसल में इस समय बाल आ चुकी है। गेहूं की फसल का फूल इस बूंदाबांदी में झड़ जाता है। जिन लोगों ने गेहूं की फसल देर से हुई है उन्हें फायदा हो सकता है। गनीमत यह रही कि इन गांवों में ओलावृष्टि कम हुई है।
कम हुआ नुकसान
एक से डेढ़ मिनट तक गिरे ओले से चने की फसल को नुकसान पहुंचा है। वहीं, गेहूं के लिए बारिश लाभदायक रही है।
रंजीत सिंह यादव
जिलाध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन
दलहनी फसलों को नुकसान
तेज बारिश से दलहनी फसलों को नुकसान है। वहीं, ओले से दलहनी व गेहूं की फसलें प्रभावित हुई हैं।
केहर सिंह बुंदेला
प्रांत उपाध्यक्ष
भारतीय किसान संघ
न फायदा और न नुकसान
कुछ गांवों में एक से दो मिनट ओला गिरने की सूचना है। इससे फसलों को कोई नुकसान नहीं है। गेहूं की फसल को इस बारिश से लाभ पहुंचा है। कुल मिलाकर कहते हैं कि जिले के किसानों को न फायदा और न नुकसान है।
गौरव यादव
जिला कृषि अधिकारी
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बीती रात ही मौसम ने एक बार फिर करवट बदली। रात में करीब ग्यारह बजे के आसपास बूंदाबांदी शुरू हो गई थी जो सुबह ओलावृष्टि में बदल गई। ग्राम बिरधा, सतरवांस, कुमरोल, बछलापुर, जाखलौन, जामुनधाना, कुचदों एवं बार के कई गांवों में भी बेर के आकार के ओले गिरने की सूचना है। वहीं, बिरधा क्षेत्र के कुमरोल गांव में पानी के साथ चने बराबर ओले गिरे। वहीं, कुछ क्षेत्रों में चने से भी बड़ा ओला गिरा। शुक्र यह रहा कि ओलों की बारिश एक दो मिनट की रही, जिससे फसलों को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा। बारिश गेहूं की फसल की लिहाज से लाभदायक बताई जा रही है। मड़ावरा क्षेत्र में बारिश बूूंदाबांदी तक ही सीमित रही। यहां के किसान अच्छी बारिश होने की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। अब यहां के किसान फसलों की सिंचाई के लिए संसाधन जुटाने में लग गए हैं। भाकियू के नगर अध्यक्ष राजपाल सिंह यादव का कहना है कि गेहूं की फसल को ज्यादा नुकसान नहीं है।
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सूर्य देवता का चलता रहा लुकाछिपी का खेल
सुबह से ही सूर्य देवता का लुकाछिपी का खेल चलता रहा। कभी आसमान पूरी तरह साफ हो गया तो कभी आसमान में काले बादल नजर आने लगे। मौसम में आए बदलाव ने लोगों को फिर ठंड का अहसास करा दिया। कई लोगों ने चाय की चुस्की के साथ तो किसी ने मगौड़ी या अन्य लजीज पकवान के साथ मौसम का आनंद उठाया।
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किसानों के अरमानों पर फिरा पानी
जाखलौन। मौसम में आए परिवर्तन और रुक रुक कर हो रही बारिश ने किसानों को बेचैन कर दिया है। इस वर्ष किसानों को बहुत अच्छी फसल होने की उम्मीद थी।
सुबह बृहस्पतिवार को कसबा जाखलौन में ओलावृष्टि हुई, जिससे किसानों की फसलें प्रमुख रूप से गेहूं की फसल प्रभावित हुई है। किसानों का मानना है कि यदि इसी तरह बरसात होती रही तो किसानों की खेतों में खड़ी बहुत अच्छी फसल अपेक्षित लाभ नहीं दे पाएगी। 2 दिन से बूंदाबांदी और मौसम के परिवर्तन ने किसानों को चिंतित कर दिया है। इस बार किसानों ने दलहनी से ज्यादा गेहूं की फसल बोने में दिलचस्पी दिखाई है। पूर्व के सालों की अपेक्षा किसानों की गेहूं की फसल बहुत अच्छी भी है। वहीं, जिन कृषकों ने दलहन की फसल बोई है, वह भी संतोषजनक है।
उम्मीद के हिसाब से नहीं हुई बारिश
सैदपुर। कस्बा सैदपुर एवं आस पास के क्षेत्र में बीती रात से मौसम में अचानक आए बदलाव से किसानों को अच्छी बारिश होने की उम्मीद जगी थी, लेकिन आसमान में छाये बदरा बूंदा बांदी तक ही सीमित रहे। जिससे अधिकांश किसानों के चेहरों पर खुशी की जगह मायूसी नजर आई। सैदपुर एवं आसपास के क्षेत्र जिनमें ग्राम सतवांसा, साढूमल, मडावरा, बम्हौरी, जलंधर एवं मदनपुर में बीती शाम से मौसम में अचानक बदलाव आ गया था। देखते ही देखते आसमान में बादल छा गये थे। आज सुबह थोड़ी बूंदा बांदी शुरू हो गई। इससे किसानों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। गेहूं की फसल अभी छोटी छोटी है, जिसमें एक बार और सिंचाई की आवश्यकता महसूस हो रही थी। जहां नहर से सिंचाई की सुविधा थी, वहां के किसान कुछ दिनों से नहर चलाए जाने की मांग भी कर रहे थे। लेकिन इस बीच मौसम ने अचानक करवट ले ली। किसानों का कहना है कि बारिश हल्की बूंदाबांदी तक ही सीमित रही। यदि ठीक ठाक बारिश हो जाती तो पूरे क्षेत्र के किसानों का करोड़ों रुपये का डीजल बच जाता।
टोड़ी में बेर के आकार के गिरे ओले
बार/ललितपुर। फरवरी माह में दूसरी बार मौसम में आए बदलाव से कस्बा एवं क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं-कहीं जोर की बारिश हुई तो कहीं ओले भी गिरे। बुधवार की रात 10 बजे अचानक मौसम बदल गया और तेज गड़गड़ाहट के साथ बादलों में बिजली चमकने लगी। थोड़ी देर बाद बूंदाबांदी शुरू हुई जो बृहस्पतिवार की सुबह से पूरे दिन जारी रही। ग्राम डुलावन में राधा कृष्ण मंदिर के पास इमली के पेड़ पर गाज गिरी। गाज से कोई जन धन की हानि नहीं हुई तो वहीं डुलावन, बरखिरिया, करमई, खजरा, चिगलौआ, कारीटोरन, इमिलिया, टोड़ी में बेर के आकार की ओले गिरे। किसानों का कहना है कि मौसम में आए बदलाव से नुकसान ज्यादा है क्योंकि चना, सरसों, मटर, मसूर आदि दलहनी एवं तिलहनी फसलों के कटाई का समय आ गया है। इस पानी से फसलों के सड़ने की आशंका जताई जा रही है। वहीं, गेहूं की फसल को नुकसान और फायदा बराबर है, क्योंकि गेहूं की फसल में इस समय बाल आ चुकी है। गेहूं की फसल का फूल इस बूंदाबांदी में झड़ जाता है। जिन लोगों ने गेहूं की फसल देर से हुई है उन्हें फायदा हो सकता है। गनीमत यह रही कि इन गांवों में ओलावृष्टि कम हुई है।
कम हुआ नुकसान
एक से डेढ़ मिनट तक गिरे ओले से चने की फसल को नुकसान पहुंचा है। वहीं, गेहूं के लिए बारिश लाभदायक रही है।
रंजीत सिंह यादव
जिलाध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन
दलहनी फसलों को नुकसान
तेज बारिश से दलहनी फसलों को नुकसान है। वहीं, ओले से दलहनी व गेहूं की फसलें प्रभावित हुई हैं।
केहर सिंह बुंदेला
प्रांत उपाध्यक्ष
भारतीय किसान संघ
न फायदा और न नुकसान
कुछ गांवों में एक से दो मिनट ओला गिरने की सूचना है। इससे फसलों को कोई नुकसान नहीं है। गेहूं की फसल को इस बारिश से लाभ पहुंचा है। कुल मिलाकर कहते हैं कि जिले के किसानों को न फायदा और न नुकसान है।
गौरव यादव
जिला कृषि अधिकारी