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Lalitpur News: किसानों को दो हजार, ठेकेदार ले गया दस हजार
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। कृषि विभाग के 98 लाख रुपये के बीज घोटाले की परतें खुलने लगीं हैं। घोटाले में धन के बंदरबांट का आलम यह है कि लाभार्थियों को अनुदान राशि भी नाम मात्र का ही दिया गया। उन्हें राशि के रूप में महज दो हजार रुपये ही मिले। जबकि ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधि और ठेकेदारों ने दस हजार रुपये वापस ले लिए। मामले के खुलने के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
बीज घोटाले में अब तक यही माना जा रहा था कि सिर्फ बीज वितरण में ही गोलमाल किया गया है। लेकिन, जांच रिपोर्ट के मुताबिक लाभार्थी किसानों को बीज लेने के बाद दी जाने वाली शत-प्रतिशत अनुदान राशि में भी हेरफेर कर दिया गया है। जांच के दौरान कारीटोरन निवासी रगवर पुत्र मोहन ने बताया कि अनुदान राशि के रूप में खाते में 12 हजार रुपये आए थे, इसमें से दो हजार रुपये मिले, शेष दस हजार रुपये गांव के प्रधान ले लिए।
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शुरू से ही नियमों की अनदेखी
कृषि विभाग ने शुरुआत से ही नियमों की अनदेखी की है। इसमें चयन प्रकिया में भी किसी अधिकारी से अनुमोदन नहीं लिया है। यही नहीं गांव बदलने तक के लिए उच्च अधिकारियों से अनुमति नहीं ली गई। इसके साथ ही अन्य मानकों की लगातार अनदेखी की गई है।
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ललितपुर। कृषि विभाग के 98 लाख रुपये के बीज घोटाले की परतें खुलने लगीं हैं। घोटाले में धन के बंदरबांट का आलम यह है कि लाभार्थियों को अनुदान राशि भी नाम मात्र का ही दिया गया। उन्हें राशि के रूप में महज दो हजार रुपये ही मिले। जबकि ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधि और ठेकेदारों ने दस हजार रुपये वापस ले लिए। मामले के खुलने के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
बीज घोटाले में अब तक यही माना जा रहा था कि सिर्फ बीज वितरण में ही गोलमाल किया गया है। लेकिन, जांच रिपोर्ट के मुताबिक लाभार्थी किसानों को बीज लेने के बाद दी जाने वाली शत-प्रतिशत अनुदान राशि में भी हेरफेर कर दिया गया है। जांच के दौरान कारीटोरन निवासी रगवर पुत्र मोहन ने बताया कि अनुदान राशि के रूप में खाते में 12 हजार रुपये आए थे, इसमें से दो हजार रुपये मिले, शेष दस हजार रुपये गांव के प्रधान ले लिए।
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शुरू से ही नियमों की अनदेखी
कृषि विभाग ने शुरुआत से ही नियमों की अनदेखी की है। इसमें चयन प्रकिया में भी किसी अधिकारी से अनुमोदन नहीं लिया है। यही नहीं गांव बदलने तक के लिए उच्च अधिकारियों से अनुमति नहीं ली गई। इसके साथ ही अन्य मानकों की लगातार अनदेखी की गई है।
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