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पति का शव लेकर नौ घंटे चक्कर लगाती रही फरहद
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 16 Dec 2017 01:06 AM IST
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- फोटो : demo
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शुक्रवार को पति के मृत्यु प्रमाण के लिए रोती-बिलखती आंध्र प्रदेश की फरहद बेगम नौ घंटे तक स्टेशन से मेडिकल कालेज के बीच चक्कर लगाती रही। खासी जद्दोजहद के बाद उसे मृत्यु प्रमाणपत्र मिला और तब वह पति का शव लेकर सड़क मार्ग से आंध्र प्रदेश के लिए रवाना हो सकी।
आंध्र प्रदेश के ओल्ड गुंटूर क्षेत्र के जाकिर हुसैननगर थर्ड लाइन नंद वैलगू रोड निवासी शेख इयासी (42) पत्नी शेख फरहद बेगम के साथ केरला एक्सप्रेस के एस-3 कोच में दिल्ली के लिए यात्रा कर रहे थे। वे सऊदी अरब के बीजा के लिए इंटरव्यू देने जा रहे थे। शुक्रवार की सुबह लगभग 9 बजे ट्रेन जब ललितपुर और झांसी के बीच दौड़ रही थी, तभी शेख इयासी को हार्ट अटैक आ गया। इसकी सूचना टीटीई ने रेलवे झांसी कंट्रोल को दी। ट्रेन जैसे ही झांसी आई. रेलवे के डॉक्टर, डिप्टी एसएस वाणिज्य, जीआरपी और आरपीएफ पहुंच गई। डाक्टर डॉ. जितेंद्र ने परीक्षण के बाद बताया कि इयासी की मृत्यु हो गई है। लेकिन उन्होंने मृत्यु प्रमाणपत्र देने से यह कहकर इनकार कर दिया कि इसका अधिकार उन्हें नहीं है। साथ ही सुझाव दिया कि शव मेडिकल कालेज ले जाएं और वहीं के डाक्टर प्रमाणपत्र जारी करेंगे।
फरहद बेगम ने डाक्टर और वहां मौजूद रेलवे अधिकारियों की मिन्नतें कीं, पर वे मृत्यु प्रमाणपत्र देने को तैयार नहीं हुए। रोती बिलखती फरहद बेगम को एंबुलेंस में पति का शव लेकर मेडिकल कालेज पहुंची। साथ में जीआरपी और आरपीएफ के सिपाही भी थे। मेडिकल कालेज में डॉक्टरों ने कहा कि पोस्टमार्टम के बाद ही मृत्यु प्रमाणपत्र दे सकते हैं। फरहद बिना पोस्टमार्टम के शव ले जाना चाहती थी, पर डाक्टरों ने इनकार कर दिया।
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इस बीच फरहद ने झांसी में संपर्क निकाला और उनसे जरिए झांसी के डॉ. इकबाल को पूरी बात बताई। डा. इकबाल वहां पहुंच गए। उन्होंने भी कोशिश की, लेकिन मृत्यु प्रमाणपत्र नहीं मिला। तब वे शव को लेकर जीआरपी थाने आ गए। जीआरपी के उपनिरीक्षक विनय साहू ने रेल अधिकारियों को पूरे हालात से अवगत करवाया और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने का निवेदन किया। तब डा.जितेंद्र कुमार फिर वहां आए और इयासी को मृत घोषित किया और प्रमाणपत्र जारी किया। इसी के साथ डिप्टी एसएस (वाणिज्य) ने मृत्यु का मेमो जारी कर उसे जीआरपी भिजवाया। जीआरपी ने पंचनामा भरा और इसके बाद फरहद पति का शव लेकर शाम 6 बजे आंध्र प्रदेश के लिए रवाना हो सकीं।
डॉक्टर तुरंत दे सकते हैं प्रमाण
नियमानुसार किसी ट्रेन या प्लेटफार्म पर किसी यात्री की मौत हो जाती हैं तो रेलवे डॉक्टर परीक्षण करने के बाद मृत्यु होने का प्रमाणपत्र जारी कर सकते हैं। इसके बाद डिप्टी एसएस (वाणिज्य) की मदद से जीआरपी को मेमो भेज दिया जाता है। अगर स्वाभाविक मौत है तो सहमति पर जीआरपी पंचनामा भरकर बिना पोस्टमार्टम के ही शव परिजनों को सौंप सकती है। अगर मौत स्वाभाविक नहीं है तो पंचनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया जाता है और तब प्रमाणपत्र मिलता है। इस मामले में भी रेलवे के डाक्टर परीक्षण के बाद इयासी को मृत घोषित कर तत्काल प्रमाण जारी कर सकते थे। तब फरहद बेगम को नौ घंटे तक अपने पति के शव को लेकर भटकना नहीं पड़ता।
ढाढस बंधाते रहे मददगार
अंजान शहर में पति शेख इयासी के शव के साथ नौ घंटे मृत्यु प्रमाण के लिए जद्दोजहद करना फरहद बेगम के लिए किसी जंग लड़ने से कम नहीं था। वह रोती बिलखती रही। इस बीच जीआरपी, आरपीएफ के सिपाही और डा.इकबाल उन्हें ढाढस बंधाते रहे। तब तक उसके साथ रहे, जब तक उसे मृत्यु प्रमाणपत्र नहीं मिला और वह आंध्र प्रदेश के लिए रवाना नहीं हो गई।
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आंध्र प्रदेश के ओल्ड गुंटूर क्षेत्र के जाकिर हुसैननगर थर्ड लाइन नंद वैलगू रोड निवासी शेख इयासी (42) पत्नी शेख फरहद बेगम के साथ केरला एक्सप्रेस के एस-3 कोच में दिल्ली के लिए यात्रा कर रहे थे। वे सऊदी अरब के बीजा के लिए इंटरव्यू देने जा रहे थे। शुक्रवार की सुबह लगभग 9 बजे ट्रेन जब ललितपुर और झांसी के बीच दौड़ रही थी, तभी शेख इयासी को हार्ट अटैक आ गया। इसकी सूचना टीटीई ने रेलवे झांसी कंट्रोल को दी। ट्रेन जैसे ही झांसी आई. रेलवे के डॉक्टर, डिप्टी एसएस वाणिज्य, जीआरपी और आरपीएफ पहुंच गई। डाक्टर डॉ. जितेंद्र ने परीक्षण के बाद बताया कि इयासी की मृत्यु हो गई है। लेकिन उन्होंने मृत्यु प्रमाणपत्र देने से यह कहकर इनकार कर दिया कि इसका अधिकार उन्हें नहीं है। साथ ही सुझाव दिया कि शव मेडिकल कालेज ले जाएं और वहीं के डाक्टर प्रमाणपत्र जारी करेंगे।
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फरहद बेगम ने डाक्टर और वहां मौजूद रेलवे अधिकारियों की मिन्नतें कीं, पर वे मृत्यु प्रमाणपत्र देने को तैयार नहीं हुए। रोती बिलखती फरहद बेगम को एंबुलेंस में पति का शव लेकर मेडिकल कालेज पहुंची। साथ में जीआरपी और आरपीएफ के सिपाही भी थे। मेडिकल कालेज में डॉक्टरों ने कहा कि पोस्टमार्टम के बाद ही मृत्यु प्रमाणपत्र दे सकते हैं। फरहद बिना पोस्टमार्टम के शव ले जाना चाहती थी, पर डाक्टरों ने इनकार कर दिया।
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इस बीच फरहद ने झांसी में संपर्क निकाला और उनसे जरिए झांसी के डॉ. इकबाल को पूरी बात बताई। डा. इकबाल वहां पहुंच गए। उन्होंने भी कोशिश की, लेकिन मृत्यु प्रमाणपत्र नहीं मिला। तब वे शव को लेकर जीआरपी थाने आ गए। जीआरपी के उपनिरीक्षक विनय साहू ने रेल अधिकारियों को पूरे हालात से अवगत करवाया और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने का निवेदन किया। तब डा.जितेंद्र कुमार फिर वहां आए और इयासी को मृत घोषित किया और प्रमाणपत्र जारी किया। इसी के साथ डिप्टी एसएस (वाणिज्य) ने मृत्यु का मेमो जारी कर उसे जीआरपी भिजवाया। जीआरपी ने पंचनामा भरा और इसके बाद फरहद पति का शव लेकर शाम 6 बजे आंध्र प्रदेश के लिए रवाना हो सकीं।
डॉक्टर तुरंत दे सकते हैं प्रमाण
नियमानुसार किसी ट्रेन या प्लेटफार्म पर किसी यात्री की मौत हो जाती हैं तो रेलवे डॉक्टर परीक्षण करने के बाद मृत्यु होने का प्रमाणपत्र जारी कर सकते हैं। इसके बाद डिप्टी एसएस (वाणिज्य) की मदद से जीआरपी को मेमो भेज दिया जाता है। अगर स्वाभाविक मौत है तो सहमति पर जीआरपी पंचनामा भरकर बिना पोस्टमार्टम के ही शव परिजनों को सौंप सकती है। अगर मौत स्वाभाविक नहीं है तो पंचनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया जाता है और तब प्रमाणपत्र मिलता है। इस मामले में भी रेलवे के डाक्टर परीक्षण के बाद इयासी को मृत घोषित कर तत्काल प्रमाण जारी कर सकते थे। तब फरहद बेगम को नौ घंटे तक अपने पति के शव को लेकर भटकना नहीं पड़ता।
ढाढस बंधाते रहे मददगार
अंजान शहर में पति शेख इयासी के शव के साथ नौ घंटे मृत्यु प्रमाण के लिए जद्दोजहद करना फरहद बेगम के लिए किसी जंग लड़ने से कम नहीं था। वह रोती बिलखती रही। इस बीच जीआरपी, आरपीएफ के सिपाही और डा.इकबाल उन्हें ढाढस बंधाते रहे। तब तक उसके साथ रहे, जब तक उसे मृत्यु प्रमाणपत्र नहीं मिला और वह आंध्र प्रदेश के लिए रवाना नहीं हो गई।