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बहुत खूब: जिले में एक ही पंजीकृत नर्सिग होम
Updated Fri, 11 May 2018 12:57 AM IST
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जिले में एक ही पंजीकृत नर्सिंग होम
बिना रजिस्ट्रेशन वाले नर्सिंग होम कहीं अधिक
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
जिले में 14 लाख की आबादी पर एक ही नर्सिंग होम संचालित हो रहा है, जबकि इससे कहीं अधिक संख्या में गैर पंजीकृत नर्सिंग होम हैं। कई तो क्लीनिक की आड़ में गलियों में धड़ल्ले से मुनाफा कमा रहे हैं। विभागीय अधिकारी जानकर भी अनजान बने हुए हैं। इसका खामियाजा आम लोगों को परेशान होकर भुगतना करना पड़ रहा है।
तमाम कोशिशों के बाद भी जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार नहीं हो सका है। आज भी स्थानीय लोग सरकारी अस्पतालों के उपचार पर निर्भर हैं। जो नर्सिग होम खुले हुए हैं, उन्होंने अपना पंजीयन भी स्वास्थ्य विभाग में नहीं कराया है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि विभाग के दस्तावेजों में एक नर्सिंग होम व आठ अस्पताल ही दर्ज हैं, जबकि इससे ज्यादा संख्या में नर्सिंग होम व अस्पताल धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। मुख्यालय पर ही एक दर्जन से ज्यादा गैर पंजीकृत नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं। जिनमें मरीजों को बेहतर सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। यहां उपचार के नाम पर मरीजों के साथ शोषण किया जा रहा है। इतना ही नहीं, मरीजों को हल्की कंपनी की दवाएं देकर छला जा रहा है। इसके अलावा नर्सिंग होमों में मरीजों की जांचें भी अकुशल स्टाफ द्वारा की जा रहीं है। शहर में कई ऐसे पंजीकृत क्लीनिक हैं जो इसकी आड़ में नर्सिंग होम बने हुए हैं। इसमें मरीजों को भर्ती कराकर उनका उपचार झोलाछाप चिकित्सकों से कराया जा रहा है। वहीं, कई नर्सिंग होम में गैर पंजीकृत तरीके से मेडिकल भी चलाई जा रही हैं। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इनके निरीक्षण के लिए समय भी नहीं निकाल पा रहे हैं। इससे उनकी हकीकत सामने नहीं आ पा रही है। विभागीय अधिकारी अवैध नर्सिंग होम की जांच अभियान चलाने का दावा तो करते हैं लेकिन वह भी कागजों तक ही सीमित होकर रह जाता है। इसका खामियाजा जनपद के भोलेभाले व असहाय गरीब लोगों को परेशान होकर भुगतना पड़ रहा है।
करते हैं खानापूरी
जब किसी नर्सिंग होम या अस्पताल में घटना घटित हो जाती है तो विभागीय अधिकारियों के द्वारा टीम गठित कर छापेमारी करने के आदेश दे दिए जाते हैं और कमेटी बनाकर जांच बिठा दी जाती है। एक दो सप्ताह बीतने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।
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की जाएगी छापेमार कार्रवाई
जिले में संचालित नर्सिंग होम एवं अस्पतालों से विभागीय नियमों का पालन कराया जाएगा। जिन नर्सिंग होम एवं अस्पतालों में छापेमारी के दौरान कमियां पाई जाएगी, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. प्रताप सिंह, सीएमओ
क्या हैं नियम
स्त्री-पुरुष के लिए अलग-अलग प्रशाधन
संक्रमण मरीजों के लिए अलग कमरा
अग्निशमन उपकरण
पुरुष महिला के लिए अलग-अलग वार्ड
बिस्तरों के बगल में ऑक्सीजन की सप्लाई सुविधा
बिस्तरों के बीच पर्दा विभाजन
प्रत्येक बिस्तर के बगल में शेक्शन मशीन
नवजात की देखभाल के लिए क्षेत्र
सुपर स्पेशलिटी हास्पिटल 24 घंटे संचालित होने चाहिए
गंभीर बीमारियों की सूचना स्वास्थ्य विभाग को 24 घंटे के भीतर दी जाएगी
प्रशिक्षित नर्स और सहायक स्टाफ
पानी और बिजली आपूर्ति की पर्याप्त व्यवस्था
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बिना रजिस्ट्रेशन वाले नर्सिंग होम कहीं अधिक
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
जिले में 14 लाख की आबादी पर एक ही नर्सिंग होम संचालित हो रहा है, जबकि इससे कहीं अधिक संख्या में गैर पंजीकृत नर्सिंग होम हैं। कई तो क्लीनिक की आड़ में गलियों में धड़ल्ले से मुनाफा कमा रहे हैं। विभागीय अधिकारी जानकर भी अनजान बने हुए हैं। इसका खामियाजा आम लोगों को परेशान होकर भुगतना करना पड़ रहा है।
तमाम कोशिशों के बाद भी जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार नहीं हो सका है। आज भी स्थानीय लोग सरकारी अस्पतालों के उपचार पर निर्भर हैं। जो नर्सिग होम खुले हुए हैं, उन्होंने अपना पंजीयन भी स्वास्थ्य विभाग में नहीं कराया है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि विभाग के दस्तावेजों में एक नर्सिंग होम व आठ अस्पताल ही दर्ज हैं, जबकि इससे ज्यादा संख्या में नर्सिंग होम व अस्पताल धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। मुख्यालय पर ही एक दर्जन से ज्यादा गैर पंजीकृत नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं। जिनमें मरीजों को बेहतर सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। यहां उपचार के नाम पर मरीजों के साथ शोषण किया जा रहा है। इतना ही नहीं, मरीजों को हल्की कंपनी की दवाएं देकर छला जा रहा है। इसके अलावा नर्सिंग होमों में मरीजों की जांचें भी अकुशल स्टाफ द्वारा की जा रहीं है। शहर में कई ऐसे पंजीकृत क्लीनिक हैं जो इसकी आड़ में नर्सिंग होम बने हुए हैं। इसमें मरीजों को भर्ती कराकर उनका उपचार झोलाछाप चिकित्सकों से कराया जा रहा है। वहीं, कई नर्सिंग होम में गैर पंजीकृत तरीके से मेडिकल भी चलाई जा रही हैं। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इनके निरीक्षण के लिए समय भी नहीं निकाल पा रहे हैं। इससे उनकी हकीकत सामने नहीं आ पा रही है। विभागीय अधिकारी अवैध नर्सिंग होम की जांच अभियान चलाने का दावा तो करते हैं लेकिन वह भी कागजों तक ही सीमित होकर रह जाता है। इसका खामियाजा जनपद के भोलेभाले व असहाय गरीब लोगों को परेशान होकर भुगतना पड़ रहा है।
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करते हैं खानापूरी
जब किसी नर्सिंग होम या अस्पताल में घटना घटित हो जाती है तो विभागीय अधिकारियों के द्वारा टीम गठित कर छापेमारी करने के आदेश दे दिए जाते हैं और कमेटी बनाकर जांच बिठा दी जाती है। एक दो सप्ताह बीतने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।
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की जाएगी छापेमार कार्रवाई
जिले में संचालित नर्सिंग होम एवं अस्पतालों से विभागीय नियमों का पालन कराया जाएगा। जिन नर्सिंग होम एवं अस्पतालों में छापेमारी के दौरान कमियां पाई जाएगी, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. प्रताप सिंह, सीएमओ
क्या हैं नियम
स्त्री-पुरुष के लिए अलग-अलग प्रशाधन
संक्रमण मरीजों के लिए अलग कमरा
अग्निशमन उपकरण
पुरुष महिला के लिए अलग-अलग वार्ड
बिस्तरों के बगल में ऑक्सीजन की सप्लाई सुविधा
बिस्तरों के बीच पर्दा विभाजन
प्रत्येक बिस्तर के बगल में शेक्शन मशीन
नवजात की देखभाल के लिए क्षेत्र
सुपर स्पेशलिटी हास्पिटल 24 घंटे संचालित होने चाहिए
गंभीर बीमारियों की सूचना स्वास्थ्य विभाग को 24 घंटे के भीतर दी जाएगी
प्रशिक्षित नर्स और सहायक स्टाफ
पानी और बिजली आपूर्ति की पर्याप्त व्यवस्था