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धरोहर व संस्कृति को बचाने के लिए बने बुंदेलखंड राज्य

Mon, 19 Feb 2018 12:59 AM IST
Lalitpur
Lalitpur Updated Mon, 19 Feb 2018 12:59 AM IST
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bundelkhand culture and tradition
tradition - फोटो : demo
आल्हा सम्राट और यश भारती से सम्मानित वंश गोपाल यादव ने कहा कि बुंदेलखंड की धरोहर और संस्कृति को बचाने के लिए पृथक राज्य का निर्माण जरूरी है। जब बुंदेलखंड का व्यक्ति मुख्यमंत्री होगा तो उसका क्षेत्रवासियों के प्रति अपनापन भी रहेगा। भारत सरकार को इसके निर्माण की पहल करना चाहिए। इस संबंध में वह खुद प्रधानमंत्री को पत्र लिखेंगे। उन्होंने पत्रकारों से मुलाकात के दौरान यह बात कही। वे देवगढ़ महोत्सव में आल्हा गायन की प्रस्तुति देने आए थे।
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उन्होंने कहा कि वर्ष 1998 में केंद्र सरकार ने उन्हें आल्हा सम्राट की उपाधि दी। उन्हें 23 अगस्त वर्ष 2013 में संगीत नाटक अकादमी में मैंबर बनाया गया। नौ फरवरी को 2015 में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उन्हें यश भारती से सम्मानित किया था। आल्हा गायन में वीर रस है। इसे सुनकर लोगों में जोश आ जाता है। पहले बारिश के दिनों में इसे सुना जाता था, अब आल्हा हर सीजन में सुना जाने लगा। बुंदेलखंडी के अलावा इसे अवधि, भोजपुरी भाषा में गाया जाता है। लेकिन बुंदेलखंडी में गाए जाने वाले बड़ा जोशखरोश आता है। महिलाएं यदि सुनें तो उनके भी अंग फड़कने लगते हैं। बुंदेलखंड की संस्कृति को बचाने के जवाब में उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड का काफी गौरवशाली इतिहास है। छोटे राज्यों के निर्माण से विकास के द्वार खुलते हैं। पृथक बुंदेलखंड राज्य के लिए महोबा के लोग काफी समय से सक्रिय हैं। यदि यहां की संस्कृति व धरोहर को बचाना है तो राज्य का निर्माण करना होगा। इस मौके पर उनके साथ बुंदेलखंड रत्न आल्हा गायक प्रेमनारायण यादव, राम अवतार अनुरागी, द्वारका प्रसाद उपस्थित रहे।
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