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Lalitpur News: मेडिकल कॉलेज में स्ट्रेचर व व्हीलचेयर खींच रहे तीमारदार
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ललितपुर। मेडिकल कॉलेज में स्ट्रेचर व व्हीलचेयर के सहारे इलाज कराने जा रहे हैं तो ध्यान रहे अपने साथ दो से तीन तीमारदार साथ लाएं। कारण यहां पर इधर-उधर जाने की स्थिति में बिना तीमारदार के स्ट्रेचर व व्हीलचेयर से मदद नहीं मिलेगी। मेडिकल कॉलेज में पर्याप्त कर्मी होने के बाद भी तीमारदार स्ट्रेचर व व्हीलचेयर खींच रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज में बीते माह तक आउटसोर्सिंग के माध्यम से लगभग एक सैकड़ा से अधिक कर्मचारी नियुक्त हो चुके हैं। इससे वर्तमान में कर्मचारियों का टोटा भी दूर हो गया है। कर्मियों की नियुक्ति होने पर उम्मीद थी कि अब व्यवस्थाओं में सुधार होगा, मरीजों को समुचित मात्रा में सुविधाएं मिल सकेंगी लेकिन ऐसा नहीं हो सका। यहां पर उपचार की उम्मीद लेकर आ रहे मरीजों को झटका उस समय लग रहा है, जब व्हील चेयर व स्ट्रेचर नसीब नहीं हो पाता। आधार कार्ड जमा करने के बाद किसी तरह से स्ट्रेचर व व्हील चेयर मिल भी जाए तो खींचने के लिए दो से तीन तीमारदार भी साथ में लाना आवश्यक है। अन्यथा में स्ट्रेचर व व्हीलचेयर चल नहीं सकेंगे, क्योंकि किसी कर्मचारी की मदद आपको मुहैया नहीं होगी। कई मरीज महिलाओं के साथ उपचार को आ रहे हैं। ऐसे में स्ट्रेचर पर जाना मुश्किल होता है। कुछ मरीजों के साथ आईं महिलाएं स्वयं ही स्ट्रेचर खींचने को मजबूर हैं। वहीं कइयों को स्ट्रेचर न मिलने पर महिलाओं के कंधों का सहारा लेकर उपचार कराने को मजबूर हैं।
वर्जन
स्टाफ की कमी है। स्ट्रेचर मरीज के तीमारदारों को न खींचना पड़े इसके लिए कर्मचारियों को तैनात करने की तैयारी चल रही है। जल्द ही कर्मचारी नियुक्त किए जाएंगे। -डॉ. मयंक कुमार शुक्ल, प्रधानाचार्य मेडिकल कॉलेज
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मेडिकल कॉलेज में बीते माह तक आउटसोर्सिंग के माध्यम से लगभग एक सैकड़ा से अधिक कर्मचारी नियुक्त हो चुके हैं। इससे वर्तमान में कर्मचारियों का टोटा भी दूर हो गया है। कर्मियों की नियुक्ति होने पर उम्मीद थी कि अब व्यवस्थाओं में सुधार होगा, मरीजों को समुचित मात्रा में सुविधाएं मिल सकेंगी लेकिन ऐसा नहीं हो सका। यहां पर उपचार की उम्मीद लेकर आ रहे मरीजों को झटका उस समय लग रहा है, जब व्हील चेयर व स्ट्रेचर नसीब नहीं हो पाता। आधार कार्ड जमा करने के बाद किसी तरह से स्ट्रेचर व व्हील चेयर मिल भी जाए तो खींचने के लिए दो से तीन तीमारदार भी साथ में लाना आवश्यक है। अन्यथा में स्ट्रेचर व व्हीलचेयर चल नहीं सकेंगे, क्योंकि किसी कर्मचारी की मदद आपको मुहैया नहीं होगी। कई मरीज महिलाओं के साथ उपचार को आ रहे हैं। ऐसे में स्ट्रेचर पर जाना मुश्किल होता है। कुछ मरीजों के साथ आईं महिलाएं स्वयं ही स्ट्रेचर खींचने को मजबूर हैं। वहीं कइयों को स्ट्रेचर न मिलने पर महिलाओं के कंधों का सहारा लेकर उपचार कराने को मजबूर हैं।
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वर्जन
स्टाफ की कमी है। स्ट्रेचर मरीज के तीमारदारों को न खींचना पड़े इसके लिए कर्मचारियों को तैनात करने की तैयारी चल रही है। जल्द ही कर्मचारी नियुक्त किए जाएंगे। -डॉ. मयंक कुमार शुक्ल, प्रधानाचार्य मेडिकल कॉलेज
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