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एक सरकारी विद्यालय ऐसा भी.............
Updated Fri, 06 Apr 2018 01:48 AM IST
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यहां बच्चे पीते हैं आरओ का शीतल पानी
ललितपुर।
परिषदीय विद्यालयों की दुर्दशा व बदहाली किसी से छिपी नहीं है। इसके लिए बजट और अव्यवस्थाओं का रोना रोया जाता है। वहीं, इससे इतर एक विद्यालय ऐसा भी है जहां बिना सरकारी मदद के विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं। इस बात को जिला मुख्यालय की सीमा से सटे हुए ग्राम मसौरा कलां के प्राथमिक विद्यालय नई बस्ती देहरे बाबा के प्रधानाध्यापक व स्टाफ ने साबित करके भी दिखाया है।
ग्राम मसौरा कलां के मजरा नईबस्ती देहरे बाबा में बना प्राथमिक विद्यालय यह ऐसा सरकारी विद्यालय है, जहां पर दिन की शुरुआत सामूहिक प्रार्थना व राष्ट्रगान से की जाती है। जहां पर बच्चे कुर्सी व मेज पर बैठकर पढ़ते हैं। यहां पर अंग्रेजी माध्यम के निजी विद्यालय की तरह प्ले सेंटर रूम भी बना हुआ है। वहीं, जनपद के परिषदीय विद्यालय तो दूर की बात, बल्कि जिला बेसिक शिक्षा विभाग के कार्यालय में भी आरओ और वाटर कूलर की सुविधा नहीं है, लेकिन इस विद्यालय के बच्चे हर रोज आरओ का शुद्ध पानी पीते हैं और भीषण गर्मी में बच्चों की सुविधा के लिए नया वाटर कूलर उपलब्ध करा दिया गया है। धुआं वाले लकड़ी के चूल्हों की जगह कर रोज गैस-चूल्हे पर मध्याह्न भोजन पकाया जाता है। इसके साथ ही बच्चों की सुविधा के लिए यहां पर पानी की टंकी भी भरी हुई, जिससे बच्चों को हाथ घुलने की भी पर्याप्त व्यवस्था और शौचालयों में भी नलों के कनेक्शन होने से शौचालय हमेशा स्वच्छ बने रहते हैं। इसके साथ ही इस विद्यालय की किसी भी दीवार से सिमेंट या चूना गिरता हुआ नहीं दिखाई देता है, विद्यालय की सभी दीवारों पर पुटीन व इमल्शन पेंट पुता हुआ है, जो विद्यालय को सुंदर बनाते हैं। अन्य परिषदीय विद्यालय से हटकर मौजूद इस विद्यालय में इन सभी सुविधाओं के लिए सरकारी धन का कोई सहयोग नहीं लिया गया है। वहीं विद्यालय में चारदीवारी भी नहीं है इसके बावजूद विद्यालय में दो सैंकड़ा से अधिक हरे-भरे पेड़-पौधे का सुरक्षित बगीचा बना हुआ है। इसमें तरह-तरह के फूलों के साथ फलों में आम, अमरुद के साथ अंगूर के भी बेल लगी हुई हैं। यह सब यहां के प्रधानाध्यापक अनंत तिवारी व उनके स्टाफ ने सामुदायिक भागीदारी से करके दिखाया है।
शिक्षा की भी है उचित व्यवस्था
विद्यालय के स्वच्छ परिवेश व बेहतर सुविधाओं के साथ-साथ यहां पर बच्चों की शिक्षा पर भी विशेष बल दिया जाता है। विद्यालय में व्यवस्थित पुस्तकालय है और पूरी पढ़ाई को चित्र दर्पण के आधार पर कराई जाती है। प्रधानाध्यापक अंत तिवारी ने बताया कि बच्चों को चित्र देखकर जल्दी व आसानी से समझ आता है। सभी विषयों की पढ़ाई के लिए अलग-अलग चित्र दर्पण की व्यवस्था है। इसके साथ ही बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए कक्षा वार सभी बच्चों का मूल्यांकन किया जाता है, अव्वल बच्चों को पुरस्कृत कर प्रोत्साहित किया जाता है। वहीं, उन्होंने बताया कि शुरुआत में विद्यालय की स्थिति काफी बहत्तर थी, बच्चों के लिए खेल का मैदान भी नहीं था। सामुदायिक भागीदारी से विद्यालय को इस काबिल बनाया है। इससे और अधिक बेहतर बनाने के लिए प्रयास भी जारी रहेगा। लोगों के घरों में फालतू पड़ी बच्चों की किताबों व खेल-खिलौनों को एकत्रित करके प्ले सेंटर रूम स्थापित किया है।
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सभी शिक्षकों में होना चाहिए कुछ कर दिखाने का जज्बा
मसौरा कलां के प्राथमिक विद्यालय नई बस्ती देहरे बाबा के प्रधानाध्यापक व स्टाफ की तरह सभी विद्यालयों के शिक्षकों में भी अपने विद्यालय व विद्यालय के बच्चों के लिए कुछ बेहतर कर दिखाने का जज्बा होना चाहिए। अन्य शिक्षकों के लिए इससे सीख लेनी चाहिए व प्रेरित होना चाहिए।
- अंबरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, ललितपुर।
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ललितपुर।
परिषदीय विद्यालयों की दुर्दशा व बदहाली किसी से छिपी नहीं है। इसके लिए बजट और अव्यवस्थाओं का रोना रोया जाता है। वहीं, इससे इतर एक विद्यालय ऐसा भी है जहां बिना सरकारी मदद के विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं। इस बात को जिला मुख्यालय की सीमा से सटे हुए ग्राम मसौरा कलां के प्राथमिक विद्यालय नई बस्ती देहरे बाबा के प्रधानाध्यापक व स्टाफ ने साबित करके भी दिखाया है।
ग्राम मसौरा कलां के मजरा नईबस्ती देहरे बाबा में बना प्राथमिक विद्यालय यह ऐसा सरकारी विद्यालय है, जहां पर दिन की शुरुआत सामूहिक प्रार्थना व राष्ट्रगान से की जाती है। जहां पर बच्चे कुर्सी व मेज पर बैठकर पढ़ते हैं। यहां पर अंग्रेजी माध्यम के निजी विद्यालय की तरह प्ले सेंटर रूम भी बना हुआ है। वहीं, जनपद के परिषदीय विद्यालय तो दूर की बात, बल्कि जिला बेसिक शिक्षा विभाग के कार्यालय में भी आरओ और वाटर कूलर की सुविधा नहीं है, लेकिन इस विद्यालय के बच्चे हर रोज आरओ का शुद्ध पानी पीते हैं और भीषण गर्मी में बच्चों की सुविधा के लिए नया वाटर कूलर उपलब्ध करा दिया गया है। धुआं वाले लकड़ी के चूल्हों की जगह कर रोज गैस-चूल्हे पर मध्याह्न भोजन पकाया जाता है। इसके साथ ही बच्चों की सुविधा के लिए यहां पर पानी की टंकी भी भरी हुई, जिससे बच्चों को हाथ घुलने की भी पर्याप्त व्यवस्था और शौचालयों में भी नलों के कनेक्शन होने से शौचालय हमेशा स्वच्छ बने रहते हैं। इसके साथ ही इस विद्यालय की किसी भी दीवार से सिमेंट या चूना गिरता हुआ नहीं दिखाई देता है, विद्यालय की सभी दीवारों पर पुटीन व इमल्शन पेंट पुता हुआ है, जो विद्यालय को सुंदर बनाते हैं। अन्य परिषदीय विद्यालय से हटकर मौजूद इस विद्यालय में इन सभी सुविधाओं के लिए सरकारी धन का कोई सहयोग नहीं लिया गया है। वहीं विद्यालय में चारदीवारी भी नहीं है इसके बावजूद विद्यालय में दो सैंकड़ा से अधिक हरे-भरे पेड़-पौधे का सुरक्षित बगीचा बना हुआ है। इसमें तरह-तरह के फूलों के साथ फलों में आम, अमरुद के साथ अंगूर के भी बेल लगी हुई हैं। यह सब यहां के प्रधानाध्यापक अनंत तिवारी व उनके स्टाफ ने सामुदायिक भागीदारी से करके दिखाया है।
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शिक्षा की भी है उचित व्यवस्था
विद्यालय के स्वच्छ परिवेश व बेहतर सुविधाओं के साथ-साथ यहां पर बच्चों की शिक्षा पर भी विशेष बल दिया जाता है। विद्यालय में व्यवस्थित पुस्तकालय है और पूरी पढ़ाई को चित्र दर्पण के आधार पर कराई जाती है। प्रधानाध्यापक अंत तिवारी ने बताया कि बच्चों को चित्र देखकर जल्दी व आसानी से समझ आता है। सभी विषयों की पढ़ाई के लिए अलग-अलग चित्र दर्पण की व्यवस्था है। इसके साथ ही बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए कक्षा वार सभी बच्चों का मूल्यांकन किया जाता है, अव्वल बच्चों को पुरस्कृत कर प्रोत्साहित किया जाता है। वहीं, उन्होंने बताया कि शुरुआत में विद्यालय की स्थिति काफी बहत्तर थी, बच्चों के लिए खेल का मैदान भी नहीं था। सामुदायिक भागीदारी से विद्यालय को इस काबिल बनाया है। इससे और अधिक बेहतर बनाने के लिए प्रयास भी जारी रहेगा। लोगों के घरों में फालतू पड़ी बच्चों की किताबों व खेल-खिलौनों को एकत्रित करके प्ले सेंटर रूम स्थापित किया है।
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सभी शिक्षकों में होना चाहिए कुछ कर दिखाने का जज्बा
मसौरा कलां के प्राथमिक विद्यालय नई बस्ती देहरे बाबा के प्रधानाध्यापक व स्टाफ की तरह सभी विद्यालयों के शिक्षकों में भी अपने विद्यालय व विद्यालय के बच्चों के लिए कुछ बेहतर कर दिखाने का जज्बा होना चाहिए। अन्य शिक्षकों के लिए इससे सीख लेनी चाहिए व प्रेरित होना चाहिए।
- अंबरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, ललितपुर।