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पुलिस के पास 97 वाहन, चालक हैं सिर्फ 33
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लखीमपुर खीरी। थाना और चौकियां पुलिस बल की कमी से तो जूझ ही रही हैं, साथ ही परिवहन शाखा भी इससे अछूती नहीं है। खीरी पुलिस के बेड़े में छोटे-बड़े वाहनों की संख्या 97 पहुंच गई, लेकिन चालकों का नियतन अब भी दशकों पुराना है। उसमें भी 49 के स्थान पर सिर्फ 33 चालक हैं। चालकों की कमी से जूझ रहा महकमा अप्रशिक्षत सिपाहियों, होमगार्डों और निजी चालकों से काम चला रहा है।
पुलिस के बेड़े में छोटे-बड़े वाहनों की संख्या बढ़कर 97 पहुंच गई हैं। इनमें 12 वाहन ऐसे हैं जो कबाड़ घोषित होकर नीलाम हो चुके हैं। यह वाहन भी जल्द ही खीरी पुलिस को मिलने वाले हैं। अगर चालकों की बात करें तो यहां कई दशकों पुराना 49 पदों का नियतन है। वर्तमान समय में सिर्फ 33 चालक सिपाही हैं। इसमें भी तीन बीमार हैं तो एक काफी लंबे वक्त से गैरहाजिर चल रहा है। पुलिस महकमे के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि जिले में बढ़ते वाहनों को देखते हुए 105 चालकों का नियतन होना चाहिए, जोकि नहीं है। यही स्थिति इनके चालकों की है।
कई निजी चालकों के हाथों में है स्टेयरिंग
चालकों की कमी से जूझ रहे पुलिस महकमे के अधिकतर वाहन या तो अप्रशिक्षु सिपाही चला रहे हैं या फिर कई थाना प्रभारियों और चौकी इंचार्ज निजी चालकों को रखकर काम चला रहे हैं। प्राइवेट चालकों के कारण पुलिस की गोपनीयता भी भंग होती है।
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दो साल पहले एसपी ने लगाई थी रोक
दो साल पहले थानों और चौकियों की जीप चलाने वाले कुछ प्राइवेट चालकों की अपराधियों से सांठगांठ की बात सामने आई थी, इस पर तत्कालीन एसपी रामलाल ने निजी चालकों को हटा दिया था, लेकिन एसपी के जाने के बाद एक बार फिर कई सरकारी वाहनों की स्टेयरिंग निजी चालकों के हाथ में थमा दिए गए।
थाना प्रभारी का करीबी बता गांठते हैं रौब
थाना प्रभारी व चौकी इंचार्ज का सरकारी वाहन चलाने वाला चालक खुद को थानेदार से कम नहीं समझता। थानेदार का करीबी होकर लोगों पर जहां रौब गालिब करता है। वहीं उसकी अपराधियों से भी सांठगांठ हो जाती है। पुलिस के नाम पर लोगों को हड़काते भी हैं, वह अलग।
पुलिस बेड़े में शामिल वाहनों पर एक नजर
बड़े ट्रक 02
बड़ा बंदी वाहन 01
चार पहिया वाहन 73
टाटा 407 05
क्रेन 01
मिनी बस 01
दंगा नियंत्रण वाहन 02
सभी थाना प्रभारियों को पहले से ही निर्देश हैं कि थानों की गाडियां प्राइवेट चालक नहीं चलाएंगे। जहां चालक नहीं हैं। वहां लाइसेंस धारक सिपाही से गाडिय़ां चलवाएंगे। यदि किसी थाने की गाड़ी को प्राइवेट चालक चलाता मिला तो संबंधित थाना प्रभारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
-विजय ढुल, एसपी
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पुलिस के बेड़े में छोटे-बड़े वाहनों की संख्या बढ़कर 97 पहुंच गई हैं। इनमें 12 वाहन ऐसे हैं जो कबाड़ घोषित होकर नीलाम हो चुके हैं। यह वाहन भी जल्द ही खीरी पुलिस को मिलने वाले हैं। अगर चालकों की बात करें तो यहां कई दशकों पुराना 49 पदों का नियतन है। वर्तमान समय में सिर्फ 33 चालक सिपाही हैं। इसमें भी तीन बीमार हैं तो एक काफी लंबे वक्त से गैरहाजिर चल रहा है। पुलिस महकमे के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि जिले में बढ़ते वाहनों को देखते हुए 105 चालकों का नियतन होना चाहिए, जोकि नहीं है। यही स्थिति इनके चालकों की है।
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कई निजी चालकों के हाथों में है स्टेयरिंग
चालकों की कमी से जूझ रहे पुलिस महकमे के अधिकतर वाहन या तो अप्रशिक्षु सिपाही चला रहे हैं या फिर कई थाना प्रभारियों और चौकी इंचार्ज निजी चालकों को रखकर काम चला रहे हैं। प्राइवेट चालकों के कारण पुलिस की गोपनीयता भी भंग होती है।
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दो साल पहले एसपी ने लगाई थी रोक
दो साल पहले थानों और चौकियों की जीप चलाने वाले कुछ प्राइवेट चालकों की अपराधियों से सांठगांठ की बात सामने आई थी, इस पर तत्कालीन एसपी रामलाल ने निजी चालकों को हटा दिया था, लेकिन एसपी के जाने के बाद एक बार फिर कई सरकारी वाहनों की स्टेयरिंग निजी चालकों के हाथ में थमा दिए गए।
थाना प्रभारी का करीबी बता गांठते हैं रौब
थाना प्रभारी व चौकी इंचार्ज का सरकारी वाहन चलाने वाला चालक खुद को थानेदार से कम नहीं समझता। थानेदार का करीबी होकर लोगों पर जहां रौब गालिब करता है। वहीं उसकी अपराधियों से भी सांठगांठ हो जाती है। पुलिस के नाम पर लोगों को हड़काते भी हैं, वह अलग।
पुलिस बेड़े में शामिल वाहनों पर एक नजर
बड़े ट्रक 02
बड़ा बंदी वाहन 01
चार पहिया वाहन 73
टाटा 407 05
क्रेन 01
मिनी बस 01
दंगा नियंत्रण वाहन 02
सभी थाना प्रभारियों को पहले से ही निर्देश हैं कि थानों की गाडियां प्राइवेट चालक नहीं चलाएंगे। जहां चालक नहीं हैं। वहां लाइसेंस धारक सिपाही से गाडिय़ां चलवाएंगे। यदि किसी थाने की गाड़ी को प्राइवेट चालक चलाता मिला तो संबंधित थाना प्रभारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
-विजय ढुल, एसपी