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नवजात को छूने से पहले धुलें हाथ
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Wed, 01 Mar 2017 10:17 PM IST
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बच्ची का जन्म
- फोटो : अमर उजाला
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सुंदरवल में हुई कार्यशाला में आशाओं को दिया नवजात शिशु की देखभाल का प्रशिक्षण
आशाओं को दी गई शिशु देखभाल किट
फूलबेहड़ ब्लॉक के सुंदरवल में गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की देखरेख के लिए कार्यशाला हुई, जिसमें आशाओं को इनकी देखभाल करने के लिए प्रशिक्षित करने के साथ ही बच्चों के लिए सेहत किट दी गई।
जिला सामुदायिक प्रक्रिया प्रबंधक हरिकीरत सिंह ने आशाओं को उनके कार्यों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने आशाओं को उनकी जिम्मेदारी, गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं की देखरेख और समय-समय पर उनकी निगरानी करने के बारे में जानकारी दी। आशाओं को बताया कि नवजात शिशु वाले घरों का निंरतर भ्रमण करें और उन्हें बच्चों को छूने से पहले अच्छी तरह से हाथ धुलने के लिए जागरूक करें। सीएचसी अधीक्षक फूलबेहड़ डॉ. वसीम अहमद ने आशाओं को थर्मामीटर से बच्चों का तापमान मापना, वजन करना, नवजात और कमजोर बच्चों की देखरेख करने के बारे में बताया। हरिकीरत सिंह ने आशाओं से कहा कि मातृ और शिशु मृत्युदर में कमी लाने की जिम्मेदारी उनकी है, क्योंकि नवजात शिशु की मौत अधिकांशत 28 दिनों में ही होती है, इसलिए पहला घंटा, पहला दिन और पहला सप्ताह बच्चों की देखरेख के लिए अति महत्वपूर्ण होता है। इन दिनों में बच्चों को हाइपोथर्मिया, डायरिया और श्वांस लेने की दिक्कत प्रमुख रूप से होती हैं। कार्यशाला में आशाओं को थर्मामीटर, कटोरी, बैग, वजन मशीन, कंबल, घड़ी आदि सामग्री दी गई। इस मौके पर प्रशिक्षक के रूप में डॉ. विनोद, कमलेश गौतम, प्रियंका, कृष्ण कुमार मिश्रा सहित कई लोग मौजूद रहे।
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आशाओं को दी गई शिशु देखभाल किट
फूलबेहड़ ब्लॉक के सुंदरवल में गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की देखरेख के लिए कार्यशाला हुई, जिसमें आशाओं को इनकी देखभाल करने के लिए प्रशिक्षित करने के साथ ही बच्चों के लिए सेहत किट दी गई।
जिला सामुदायिक प्रक्रिया प्रबंधक हरिकीरत सिंह ने आशाओं को उनके कार्यों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने आशाओं को उनकी जिम्मेदारी, गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं की देखरेख और समय-समय पर उनकी निगरानी करने के बारे में जानकारी दी। आशाओं को बताया कि नवजात शिशु वाले घरों का निंरतर भ्रमण करें और उन्हें बच्चों को छूने से पहले अच्छी तरह से हाथ धुलने के लिए जागरूक करें। सीएचसी अधीक्षक फूलबेहड़ डॉ. वसीम अहमद ने आशाओं को थर्मामीटर से बच्चों का तापमान मापना, वजन करना, नवजात और कमजोर बच्चों की देखरेख करने के बारे में बताया। हरिकीरत सिंह ने आशाओं से कहा कि मातृ और शिशु मृत्युदर में कमी लाने की जिम्मेदारी उनकी है, क्योंकि नवजात शिशु की मौत अधिकांशत 28 दिनों में ही होती है, इसलिए पहला घंटा, पहला दिन और पहला सप्ताह बच्चों की देखरेख के लिए अति महत्वपूर्ण होता है। इन दिनों में बच्चों को हाइपोथर्मिया, डायरिया और श्वांस लेने की दिक्कत प्रमुख रूप से होती हैं। कार्यशाला में आशाओं को थर्मामीटर, कटोरी, बैग, वजन मशीन, कंबल, घड़ी आदि सामग्री दी गई। इस मौके पर प्रशिक्षक के रूप में डॉ. विनोद, कमलेश गौतम, प्रियंका, कृष्ण कुमार मिश्रा सहित कई लोग मौजूद रहे।
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