{"_id":"581232fa4f1c1b944ebc4056","slug":"the-court-sentenced-him-to-ten-years-adj","type":"story","status":"publish","title_hn":"एडीजे कोर्ट ने दस साल की सजा सुनाई","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
एडीजे कोर्ट ने दस साल की सजा सुनाई
मोहम्मदी।
Updated Thu, 27 Oct 2016 11:05 PM IST
विज्ञापन
court shimla
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पांच हजार रुपये जुर्माना डाला
एडीजे कोर्ट ने दहेज हत्या की आरोपी सास को दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए पांच हजार रुपये का जुर्माना डाला। इस मामले में अभियुक्त ससुर की मुकदमे के दौरान मौत हो गई थी, जबकि पति के नाबालिग होने के कारण उसका मुकदमा बाल न्यायालय में लंबित है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता संजय सिंह के अनुसार सीतापुर के थाना महोली के छहेलिया गांव के आशाराम ने गत सात सितंबर 2013 को रिपोर्ट दर्ज करते हुए कहा था कि उसने अपनी पुत्री बबली का विवाह पसगवां थाने के भिलावा गांव के सेवाराम के पुत्र अरुण से किया था। जिसमें अपनी हैसियत के अनुसार दान दहेज दिया था, लेकिन ससुराल वाले बाइक तथा सोने की चेन की मांग कर रहे थे। मांग पूरी न करने पर उसे सात फरवरी 2013 को मिट्टी का तेल डालकर जला दिया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी। पुलिस ने सास, ससुर तथा पति के खिलाफ दहेज हत्या आदि धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली थी।
तीन साल तक चले मुकदमे में वादी आशाराम, मृतका की मां सियालली, डॉ. राजेश कुमार, तहसीलदार दशरथ कुमार आदि की गवाही हुई, जबकि मामले की विवेचना सीओ एसी श्रीवास्तव ने की थी। मामले की सुनवाई पूरी करते हुए एडीजे संजय खरे ने मृतका की सास नन्हीं देवी को दस साल की सजा सुनाई तथा पांच हजार रुपये जुर्माना डाला। पति अरुण के नाबालिग होने के कारण उसका मामला बाल न्यायालय खीरी में लंबित है। इस मामले के तीसरे अभियुक्त ससुर सेवाराम की मुकदमे के दौरान मौत हो चुकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
एडीजे कोर्ट ने दहेज हत्या की आरोपी सास को दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए पांच हजार रुपये का जुर्माना डाला। इस मामले में अभियुक्त ससुर की मुकदमे के दौरान मौत हो गई थी, जबकि पति के नाबालिग होने के कारण उसका मुकदमा बाल न्यायालय में लंबित है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता संजय सिंह के अनुसार सीतापुर के थाना महोली के छहेलिया गांव के आशाराम ने गत सात सितंबर 2013 को रिपोर्ट दर्ज करते हुए कहा था कि उसने अपनी पुत्री बबली का विवाह पसगवां थाने के भिलावा गांव के सेवाराम के पुत्र अरुण से किया था। जिसमें अपनी हैसियत के अनुसार दान दहेज दिया था, लेकिन ससुराल वाले बाइक तथा सोने की चेन की मांग कर रहे थे। मांग पूरी न करने पर उसे सात फरवरी 2013 को मिट्टी का तेल डालकर जला दिया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी। पुलिस ने सास, ससुर तथा पति के खिलाफ दहेज हत्या आदि धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली थी।
विज्ञापन
तीन साल तक चले मुकदमे में वादी आशाराम, मृतका की मां सियालली, डॉ. राजेश कुमार, तहसीलदार दशरथ कुमार आदि की गवाही हुई, जबकि मामले की विवेचना सीओ एसी श्रीवास्तव ने की थी। मामले की सुनवाई पूरी करते हुए एडीजे संजय खरे ने मृतका की सास नन्हीं देवी को दस साल की सजा सुनाई तथा पांच हजार रुपये जुर्माना डाला। पति अरुण के नाबालिग होने के कारण उसका मामला बाल न्यायालय खीरी में लंबित है। इस मामले के तीसरे अभियुक्त ससुर सेवाराम की मुकदमे के दौरान मौत हो चुकी है।
विज्ञापन