{"_id":"597359324f1c1b92538b4a63","slug":"the-children-had-fabricated-the-false-story-of-abduction","type":"story","status":"publish","title_hn":"बच्चों ने ही गढ़ी थी अपहरण की झूठी कहानी","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
बच्चों ने ही गढ़ी थी अपहरण की झूठी कहानी
अमर उजाला ब्यूरो पलियाकलां।
Updated Sat, 22 Jul 2017 11:57 PM IST
विज्ञापन
किडनैप
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्कूल नहीं जाने चाहते थे बच्चे, झाड़ियों में छिपा दिया था बैग, बैग न मिलने पर रची कहानी
शुक्रवार को स्कूल जाते समय बच्चों के अपहरण करने के प्रयास की बात पुलिस की जांच में झूठी निकली। पुलिस का दावा है कि बच्चे स्कूल नहीं जाना चाहते थे, इसीलिए उन्होंने अपना बैग झाड़ी में छिपा दिया और खेलने चले गए, लेकिन जब खेलकर वापस आए और बैग गायब मिला तो उन्होंने घर वालों की डांट से बचने के लिए मनगढ़त कहानी रच दी।
मुहल्ला टेहरा शहरी निवासी मुन्नालाल ने पुलिस को दी तहरीर में कहा था कि उसके दो पोते आलोक और सचिन स्कूल जा रहे थे। रास्ते में रेलवे क्रासिंग के पास दो नकाबपोश बदमाशों ने उनके अपहरण की कोशिश की। बच्चों के अनुसार अपहरणकर्ताओं ने उनके बैग छीन लिए, जिसके बाद बच्चे घर आ गए। इस पूरी कहानी की पुलिस ने गहनता से छानबीन की तो मामला कुछ और ही निकला। एसओ विपिन कुमार सिंह ने बताया कि छानबीन व पड़ताल प्रारंभ की गई तथा बच्चों से भी उनके घर वालों की मौजूदगी में वार्ता हुई, जिसके बाद सच्चाई सामने आ गई। दरअसल दोनों बच्चे अपनी बुआ के बच्चों के साथ रोज स्कूल जाते थे। शुक्रवार को बुआ के बच्चे स्कूल नहीं गए और इसी वजह से वे दोनों भी स्कूल नहीं जाना चाहते थे, लेकिन परिवारीजनों के दबाव और डांट के बाद दोनों को स्कूल के लिए निकलना पड़ा। रास्ते में दोनों बच्चों ने स्कूल जाने के बजाए अपना बैग रेलवे क्रासिंग के पास झाड़ी में रख दिया और खेलकूद में लग गए। जब वे वापस बैग लेने पहुंचे तो बस्ते गायब थे, ऐसे में बच्चे डर गए कि अब एक तो बैग गायब होने पर पिटाई होगी दूसरा स्कूल न जाने पर भी डांट पड़ेगी। इसी वजह से दोनों ने अपहरण की कोशिश की कहानी गढ़ दी और घर वालों को वही कहानी सुनाई।
विज्ञापन
शुक्रवार को स्कूल जाते समय बच्चों के अपहरण करने के प्रयास की बात पुलिस की जांच में झूठी निकली। पुलिस का दावा है कि बच्चे स्कूल नहीं जाना चाहते थे, इसीलिए उन्होंने अपना बैग झाड़ी में छिपा दिया और खेलने चले गए, लेकिन जब खेलकर वापस आए और बैग गायब मिला तो उन्होंने घर वालों की डांट से बचने के लिए मनगढ़त कहानी रच दी।
मुहल्ला टेहरा शहरी निवासी मुन्नालाल ने पुलिस को दी तहरीर में कहा था कि उसके दो पोते आलोक और सचिन स्कूल जा रहे थे। रास्ते में रेलवे क्रासिंग के पास दो नकाबपोश बदमाशों ने उनके अपहरण की कोशिश की। बच्चों के अनुसार अपहरणकर्ताओं ने उनके बैग छीन लिए, जिसके बाद बच्चे घर आ गए। इस पूरी कहानी की पुलिस ने गहनता से छानबीन की तो मामला कुछ और ही निकला। एसओ विपिन कुमार सिंह ने बताया कि छानबीन व पड़ताल प्रारंभ की गई तथा बच्चों से भी उनके घर वालों की मौजूदगी में वार्ता हुई, जिसके बाद सच्चाई सामने आ गई। दरअसल दोनों बच्चे अपनी बुआ के बच्चों के साथ रोज स्कूल जाते थे। शुक्रवार को बुआ के बच्चे स्कूल नहीं गए और इसी वजह से वे दोनों भी स्कूल नहीं जाना चाहते थे, लेकिन परिवारीजनों के दबाव और डांट के बाद दोनों को स्कूल के लिए निकलना पड़ा। रास्ते में दोनों बच्चों ने स्कूल जाने के बजाए अपना बैग रेलवे क्रासिंग के पास झाड़ी में रख दिया और खेलकूद में लग गए। जब वे वापस बैग लेने पहुंचे तो बस्ते गायब थे, ऐसे में बच्चे डर गए कि अब एक तो बैग गायब होने पर पिटाई होगी दूसरा स्कूल न जाने पर भी डांट पड़ेगी। इसी वजह से दोनों ने अपहरण की कोशिश की कहानी गढ़ दी और घर वालों को वही कहानी सुनाई।
विज्ञापन