{"_id":"553fa820273cf770cb30f8345ead70f1","slug":"co-and-questions-raised-on-the-role-of-provost-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक दरोगा मारा गया, बाकी को खरोंच तक नहीं ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
एक दरोगा मारा गया, बाकी को खरोंच तक नहीं
खीरी टाउन (लखीमपुर खीरी)।
Updated Fri, 11 Sep 2015 11:23 PM IST
विज्ञापन
गश्त के दौरान पशु तस्करों की गोली से शहीद हुए थाना फरीदपुर (बरेली) के दरोगा मनोज मिश्रा के शव को सुबह सात बजे लहरपुर रोड पर रखकर ग्रामीणों के साथ परिवार वालों ने जाम लगा दिया। परिवार वालों ने मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। शहीद के पिता श्याम मुरारी मिश्रा ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित पत्र डीएम को देकर कई गंभीर सवाल उठाते हुए बरेली पुलिस को कठघरे में खड़ा किया है। मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में सबसे बड़ा सवाल यह उठाया गया है कि उनका दरोगा बेटा तो मारा गया, मगर बाकी किसी पुलिस कर्मी को खरोंच तक नहीं आई और न ही किसी हमलावर को कोई चोट आई। पिता का कहना है कि उनके बेटे की साजिश के तहत हत्या की गई है। इस दौरान डीएम किंजल सिंह के मौके पर पहुंचने पर शहीद के पिता ने बरेली के एक वरिष्ठ सपा नेता पर यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने बेेटे को जान से मारने की धमकी दी थी, जिसकी रिकार्डिंग मनोज के मोबाइल में थी। बाद में मनोज ने इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से की थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। डीएम ने इन सभी बातों को सुनने के बाद परिवारवालों को हरसंभव मदद का आश्वासन देकर जाम खुलवाया।
बुधवार रात फरीदपुर थाना क्षेत्र के पदारथपुर में हुई घटना में मिश्रा शहीद हो गए थे। बृहस्पतिवार रात करीब आठ बजे उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव हरदासपुर पहुंचा, तो पूरा गांव शोक में डूब गया। शुक्रवार को शहीद के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार होना था लेकिन सुबह सात बजे परिवार के लोगों ने सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर शव सड़क पर रखकर जाम लगा दिया। परिवार के लोगों ने पुलिस विभाग पर आरोप लगाते हुए प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। आसपास के दर्जनों गांव के सैकड़ों लोग इस प्रदर्शन में शामिल हुए।
इस दौरान परिवार के भरण पोषण, बच्चों की शिक्षा और क्षतिपूर्ति के लिए 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग भी की गई। सड़क पर करीब तीन घंटे तक हंगामा होता रहा। इस दौरान सीओ धौरहरा मनोज यादव, एसडीएम सदर आलोक वर्मा और खीरी एसओ महेंद्र सचान ने जाम खुलवाने का प्रयास किया लेकिन परिवार वाले भड़क गए और डीएम को बुलाने की मांग की। करीब साढ़े दस बजे डीएम किंजल सिंह मौके पर पहुंची और परिवार के लोगों को ढांढस बंधाते हुए मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन लिया। मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन देकर जाम खुलवाया। इसके बाद डीएम की मौजूदगी में गांव में शव का अंतिम संस्कार किया गया।
विज्ञापन
यह कहा गया मुख्यमंत्री के नाम चिट्ठी में
- मनोज मिश्रा गो हत्या करने वालों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई कर रहे थे।
- इस कार्रवाई से फरीदपुर क्षेत्र में गोकशी का व्यवसाय प्रभावित हो रहा था।
- गोकशी में लिप्त व्यक्तियों की पहुंच उच्च अधिकारियों एवं नेताओं तक है।
- मुठभेड़ के दौरान अन्य पुलिस कर्मियों व गो तस्करों के कोई चोट क्यों नहीं आई।
शहीद मनोज मिश्रा के पिता ने दिया ज्ञापन
शहीद मनोज मिश्रा के पिता श्याम मुरारी मिश्रा ने डीएम किंजल सिंह को ज्ञापन में विभाग के आला अफसरों और नेताओं पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सीओ और कोतवाल की भूमिका पर सवाल उठाए हैं और पूछा है कि यह कैसी मुठभेड़ है, जिसमें कोई अन्य पुलिस कर्मी घायल नहीं हुआ और न किसी पशु तस्कर को गोली लगी। क्षेत्र के सफेदपोश नेताओं और पुलिस की मिलीभगत से साजिशन हत्या का आरोप लगाया है। आरोप है कि तीन माह पहले बरेली के सपा के एक बड़े नेता ने फोन पर जान से मारने की धमकी दी थी, जिसकी रिकार्डिंग मनोज के फोन में सुरक्षित है। इस मामले की मनोज मिश्रा ने शिकायत विभाग के उच्चाधिकारियों से की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। लिहाजा इस मामले की निष्पक्षता से सीबीआई जांच जरूरी है।
और निकल पड़े डीएम की आंखों से आंसू
डीएम किंजल सिंह जैसे ही शहीद मनोज मिश्रा के शव के करीब पहुंची और उनके बच्चों और पत्नी शशि मिश्रा से मिलकर अचानक फफक-फफक कर रो पड़ीं। उन्होंने बच्चों को गले से लगा लिया। प्रदर्शन स्थल से गांव तक दादी लाजवंती को पकड़कर गांव के अंदर पैदल गई। इसके बाद डीएम अंतिम संस्कार में भी शामिल हुईं।
विज्ञापन
बुधवार रात फरीदपुर थाना क्षेत्र के पदारथपुर में हुई घटना में मिश्रा शहीद हो गए थे। बृहस्पतिवार रात करीब आठ बजे उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव हरदासपुर पहुंचा, तो पूरा गांव शोक में डूब गया। शुक्रवार को शहीद के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार होना था लेकिन सुबह सात बजे परिवार के लोगों ने सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर शव सड़क पर रखकर जाम लगा दिया। परिवार के लोगों ने पुलिस विभाग पर आरोप लगाते हुए प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। आसपास के दर्जनों गांव के सैकड़ों लोग इस प्रदर्शन में शामिल हुए।
विज्ञापन
इस दौरान परिवार के भरण पोषण, बच्चों की शिक्षा और क्षतिपूर्ति के लिए 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग भी की गई। सड़क पर करीब तीन घंटे तक हंगामा होता रहा। इस दौरान सीओ धौरहरा मनोज यादव, एसडीएम सदर आलोक वर्मा और खीरी एसओ महेंद्र सचान ने जाम खुलवाने का प्रयास किया लेकिन परिवार वाले भड़क गए और डीएम को बुलाने की मांग की। करीब साढ़े दस बजे डीएम किंजल सिंह मौके पर पहुंची और परिवार के लोगों को ढांढस बंधाते हुए मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन लिया। मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन देकर जाम खुलवाया। इसके बाद डीएम की मौजूदगी में गांव में शव का अंतिम संस्कार किया गया।
विज्ञापन
यह कहा गया मुख्यमंत्री के नाम चिट्ठी में
- मनोज मिश्रा गो हत्या करने वालों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई कर रहे थे।
- इस कार्रवाई से फरीदपुर क्षेत्र में गोकशी का व्यवसाय प्रभावित हो रहा था।
- गोकशी में लिप्त व्यक्तियों की पहुंच उच्च अधिकारियों एवं नेताओं तक है।
- मुठभेड़ के दौरान अन्य पुलिस कर्मियों व गो तस्करों के कोई चोट क्यों नहीं आई।
शहीद मनोज मिश्रा के पिता ने दिया ज्ञापन
शहीद मनोज मिश्रा के पिता श्याम मुरारी मिश्रा ने डीएम किंजल सिंह को ज्ञापन में विभाग के आला अफसरों और नेताओं पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सीओ और कोतवाल की भूमिका पर सवाल उठाए हैं और पूछा है कि यह कैसी मुठभेड़ है, जिसमें कोई अन्य पुलिस कर्मी घायल नहीं हुआ और न किसी पशु तस्कर को गोली लगी। क्षेत्र के सफेदपोश नेताओं और पुलिस की मिलीभगत से साजिशन हत्या का आरोप लगाया है। आरोप है कि तीन माह पहले बरेली के सपा के एक बड़े नेता ने फोन पर जान से मारने की धमकी दी थी, जिसकी रिकार्डिंग मनोज के फोन में सुरक्षित है। इस मामले की मनोज मिश्रा ने शिकायत विभाग के उच्चाधिकारियों से की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। लिहाजा इस मामले की निष्पक्षता से सीबीआई जांच जरूरी है।
और निकल पड़े डीएम की आंखों से आंसू
डीएम किंजल सिंह जैसे ही शहीद मनोज मिश्रा के शव के करीब पहुंची और उनके बच्चों और पत्नी शशि मिश्रा से मिलकर अचानक फफक-फफक कर रो पड़ीं। उन्होंने बच्चों को गले से लगा लिया। प्रदर्शन स्थल से गांव तक दादी लाजवंती को पकड़कर गांव के अंदर पैदल गई। इसके बाद डीएम अंतिम संस्कार में भी शामिल हुईं।