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लंगूर की हत्या के बाद झगड़े में घायल प्रधान के भाई की मौत
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जंगबहादुरगंज। पसगवां थाना क्षेत्र के गांव रतनपुर में गुरुवार को लंगूर की हत्या के विरोध में दो पक्षों में हुई मारपीट और फायरिंग में गोली लगने से प्रधान पंकज यादव का भाई 20 वर्षीय सोनेंद्र घायल हुआ था, जिसकी शाहजहांपुर के निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। दोपहर को शव गांव पहुंचा, जिसके बाद से गांव में स्थिति तनावपूर्ण है। एसडीएम और सीओ ने गांव के हालात का जायजा लिया है और पुलिस बल को तैनात किया है।
रतनपुर गांव में 13 जून की सुबह करीब आठ बजे एक लंगूर ने प्रधान पंकज यादव के भाई सोनू को काट लिया था। इससे आक्रोशित पंकज ने लंगूर को पीटकर मार डाला था। लंगूर के मारे जाने की सूचना पर कुछ ग्रामीणों ने विरोध किया, जिससे प्रधान पंकज पक्ष और विरोधी पक्ष आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों में लाठी-डंडे चले और फायरिंग हुई। पंकज यादव का भाई सोनेंद्र यादव पेट में गोली लगने से घायल हो गया था, जबकि दूसरे पक्ष के 25 वर्षीय गामा और लक्ष्मण घायल हो गए थे। प्रधान पंकज ने अपने भाई सोनेंद्र को जिला अस्पताल शाहजहांपुर में भर्ती कराया, जिसके बाद एक निजी अस्पताल में भर्ती कर इलाज कराया, जहां रविवार की सुबह मौत हो गई।
सोनेन्द्र शाहजहांपुर के एक कॉलेज में एलएलबी प्रथम वर्ष का छात्र था। उधर, दूसरे पक्ष के लक्ष्मण का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस ने प्रधान पंकज की तहरीर पर बलबा और हत्या के प्रयास के आरोप में 22 अभियुक्तों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया था। जबकि दूसरे पक्ष के हेम सिंह ने प्रधान पंकज यादव सहित चार लोगों के विरुद्ध धारा 308 सहित कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। उधर, इलाज के दौरान सोनेन्द्र की मौत की खबर मिलते ही गांव में माहौल तनावपूर्ण हो गया है। गांव में काफी फोर्स तैनात कर दिया गया है। मोहम्मदी एसडीएम स्वाति शुक्ला और सीओ श्रेष्ठा ठाकुर भी रतनपुर गांव पहुंची और हालात का जायजा लिया। रविवार को दोपहर बाद सोनेंद्र का शव गांव पहुंचा, तो घर में कोहराम मच गया। शव की अन्त्येष्टि सोमवार को होगी। प्रधान पक्ष ने अपने ऊपर दर्ज मुकदमे को रद्द करने, सोनेंद्र की हत्या में आरोपियों की तुंरत गिरफ्तारी करने और पीड़ित परिवार को मुआवजा दिलाने की मांग एसडीएम और सीओ से की है।
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प्रधान ने घटना के पीछे बताई पुरानी रंजिश
घटना के पीछे प्रधान पंकज यादव ने रंजिश बताई। पंकज के मुताबिक 1984 में प्रधानी चुनाव की रंजिश में गामा के पिता चोबर ने अपने भाई व साथियों के साथ मिलकर उसके ताऊ महेंद्र की हत्या कर दी थी। इस हत्या में चोबर समेत सात लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। तब से रंजिश चली आ रही है। हालांकि अब चोबर की मृत्यु हो चुकी है। इस बार चोबर के बेटे ने अपने साथियों के साथ मिलकर उसके भाई की जान ले ली।
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रतनपुर गांव में 13 जून की सुबह करीब आठ बजे एक लंगूर ने प्रधान पंकज यादव के भाई सोनू को काट लिया था। इससे आक्रोशित पंकज ने लंगूर को पीटकर मार डाला था। लंगूर के मारे जाने की सूचना पर कुछ ग्रामीणों ने विरोध किया, जिससे प्रधान पंकज पक्ष और विरोधी पक्ष आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों में लाठी-डंडे चले और फायरिंग हुई। पंकज यादव का भाई सोनेंद्र यादव पेट में गोली लगने से घायल हो गया था, जबकि दूसरे पक्ष के 25 वर्षीय गामा और लक्ष्मण घायल हो गए थे। प्रधान पंकज ने अपने भाई सोनेंद्र को जिला अस्पताल शाहजहांपुर में भर्ती कराया, जिसके बाद एक निजी अस्पताल में भर्ती कर इलाज कराया, जहां रविवार की सुबह मौत हो गई।
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सोनेन्द्र शाहजहांपुर के एक कॉलेज में एलएलबी प्रथम वर्ष का छात्र था। उधर, दूसरे पक्ष के लक्ष्मण का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस ने प्रधान पंकज की तहरीर पर बलबा और हत्या के प्रयास के आरोप में 22 अभियुक्तों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया था। जबकि दूसरे पक्ष के हेम सिंह ने प्रधान पंकज यादव सहित चार लोगों के विरुद्ध धारा 308 सहित कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। उधर, इलाज के दौरान सोनेन्द्र की मौत की खबर मिलते ही गांव में माहौल तनावपूर्ण हो गया है। गांव में काफी फोर्स तैनात कर दिया गया है। मोहम्मदी एसडीएम स्वाति शुक्ला और सीओ श्रेष्ठा ठाकुर भी रतनपुर गांव पहुंची और हालात का जायजा लिया। रविवार को दोपहर बाद सोनेंद्र का शव गांव पहुंचा, तो घर में कोहराम मच गया। शव की अन्त्येष्टि सोमवार को होगी। प्रधान पक्ष ने अपने ऊपर दर्ज मुकदमे को रद्द करने, सोनेंद्र की हत्या में आरोपियों की तुंरत गिरफ्तारी करने और पीड़ित परिवार को मुआवजा दिलाने की मांग एसडीएम और सीओ से की है।
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प्रधान ने घटना के पीछे बताई पुरानी रंजिश
घटना के पीछे प्रधान पंकज यादव ने रंजिश बताई। पंकज के मुताबिक 1984 में प्रधानी चुनाव की रंजिश में गामा के पिता चोबर ने अपने भाई व साथियों के साथ मिलकर उसके ताऊ महेंद्र की हत्या कर दी थी। इस हत्या में चोबर समेत सात लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। तब से रंजिश चली आ रही है। हालांकि अब चोबर की मृत्यु हो चुकी है। इस बार चोबर के बेटे ने अपने साथियों के साथ मिलकर उसके भाई की जान ले ली।