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Lakhimpur Kheri News: चार से आठ जून तक बेहड़ा बाबा मंदिर में लगेगा मेला
Sun, 01 Jun 2025 11:32 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 01 Jun 2025 11:32 PM IST
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धनगढ़ी के बेहड़ा बाबा मंदिर के द्वार। संवाद
धनगढ़ी (नेपाल)। कैलाली जिले में स्थित प्रसिद्ध बेहड़ा बाबा मंदिर भारत व नेपाल के नागरिकों के आस्था का प्रतीक है। ज्येष्ठ माह में यहां पांच दिवसीय मेला लगता है। इस बार मेला चार से आठ जून तक लगेगा।
धनगढ़ी से दस किलोमीटर दूर रामपुर गांव में स्थित बेहड़ा बाबा मंदिर की काफी मान्यता है। मंदिर समिति के अध्यक्ष खेम बहादुर चंद ने बताया कि सालों पहले इस स्थान पर घना जंगल था, यहां पर एक भारतीय को जमीन में शिवलिंग दबा मिला। जिसे उसने खोद कर ले जाना चाहा पर वह जितना खोदता था शिवलिंग उतना ही ऊपर उठ जाता था। अंत में उसने शिवलिंग नहीं निकाला, उल्टे उसपर कुल्हाड़ी से वार किया। वार का निशान आज भी शिवलिंग पर मौजूद है।
उन्होंने बताया कि बेहड़ा बाबा मंदिर के पास दो ताल भी हैं, जिन्हें महादेव और सहदेव ताल के नाम से जाना जाता है। महादेव ताल की विशेषता है कि इसका पानी कभी नहीं सूखता। प्रत्येक वर्ष तीन लाख से अधिक भारतीय व नेपाली शिवभक्त यहां आकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं।
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गौरीफंटा सीमा तक आने पर धनगढ़ी होते हुए बेली गांव के पुल के पास से नीचे ऊर्मा गांव होते हुए करीब 10 किमी दूरी तय कर मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा राजमार्ग अतरिया होते हुए चौमाला बाजार के पास से मंदिर तक भी पहुंचा जा सकता है। ऐसे में धनगढ़ी से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पड़ती है।
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धनगढ़ी से दस किलोमीटर दूर रामपुर गांव में स्थित बेहड़ा बाबा मंदिर की काफी मान्यता है। मंदिर समिति के अध्यक्ष खेम बहादुर चंद ने बताया कि सालों पहले इस स्थान पर घना जंगल था, यहां पर एक भारतीय को जमीन में शिवलिंग दबा मिला। जिसे उसने खोद कर ले जाना चाहा पर वह जितना खोदता था शिवलिंग उतना ही ऊपर उठ जाता था। अंत में उसने शिवलिंग नहीं निकाला, उल्टे उसपर कुल्हाड़ी से वार किया। वार का निशान आज भी शिवलिंग पर मौजूद है।
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उन्होंने बताया कि बेहड़ा बाबा मंदिर के पास दो ताल भी हैं, जिन्हें महादेव और सहदेव ताल के नाम से जाना जाता है। महादेव ताल की विशेषता है कि इसका पानी कभी नहीं सूखता। प्रत्येक वर्ष तीन लाख से अधिक भारतीय व नेपाली शिवभक्त यहां आकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं।
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गौरीफंटा सीमा तक आने पर धनगढ़ी होते हुए बेली गांव के पुल के पास से नीचे ऊर्मा गांव होते हुए करीब 10 किमी दूरी तय कर मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा राजमार्ग अतरिया होते हुए चौमाला बाजार के पास से मंदिर तक भी पहुंचा जा सकता है। ऐसे में धनगढ़ी से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पड़ती है।

धनगढ़ी के बेहड़ा बाबा मंदिर के द्वार। संवाद